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: MP News: 'मामा' के मंत्री ने कहा- नई शिक्षा नीति के तहत अब बाप-बेटे और दादा-पोते को भी एडमिशन मिल सकेगा

News Desk / Tue, Nov 29, 2022


उच्च शिक्षा मंत्री, मोहन यादव

उच्च शिक्षा मंत्री, मोहन यादव - फोटो : अमर उजाला

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राजगढ़ जिले में सात करोड़ की लागत से तैयार हुआ पीजी कॉलेज का अतिरिक्त भवन लोकार्पण उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने किया। मंच से संबोधित करते हुए कहा, नई शिक्षा नीति में सारी बाधाएं टूट गईं, बाप-बेटे और दादा-पोते सभी को एडमिशन चाहिए तो मिल सकता है। वह जमाना गया जब 25 साल की उम्र में एडमिशन होता था।

मंत्री मोहन यादव ने कहा, अब ज्ञान अर्जन में कोई बाधा नहीं होना चाहिए, जो कोई कॉलेज- स्कूल सालों पहले छोड़ दिया हो, सरपंच-किसान और व्यापारी बन गया। यहां से अन्य जगह रहने चला गया, उसको पढ़ना है तो राजा भोज विश्वविद्यालय के माध्यम से वह पढ़ाई वापस जारी कर सकेगा। साइंस पढ़ते-पढ़ते किसी को संगीत सीखना हो, किसी को आर्ट में कोई सब्जेक्ट लेना हो, यहां सारे सब्जेक्ट लेकर पढ़ाई कर सकता है। डॉक्टर बनते-बनते उसको लगता है, हिस्ट्री का पेपर लेना है, यहां ले सकता है।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा, एनसीसी-एनएसएस खेल इन सब की गुंजाइश अब पाठ्यक्रम में आ गई। यह एक्टिविटी पहले गतिविधियों के नाम से जानी जाती थी। दुर्भाग्य से पहले बाकी शिक्षकों की श्रेणी से इन शिक्षकों को छोटा माना जाता था।

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राजगढ़ जिले में सात करोड़ की लागत से तैयार हुआ पीजी कॉलेज का अतिरिक्त भवन लोकार्पण उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव ने किया। मंच से संबोधित करते हुए कहा, नई शिक्षा नीति में सारी बाधाएं टूट गईं, बाप-बेटे और दादा-पोते सभी को एडमिशन चाहिए तो मिल सकता है। वह जमाना गया जब 25 साल की उम्र में एडमिशन होता था।

मंत्री मोहन यादव ने कहा, अब ज्ञान अर्जन में कोई बाधा नहीं होना चाहिए, जो कोई कॉलेज- स्कूल सालों पहले छोड़ दिया हो, सरपंच-किसान और व्यापारी बन गया। यहां से अन्य जगह रहने चला गया, उसको पढ़ना है तो राजा भोज विश्वविद्यालय के माध्यम से वह पढ़ाई वापस जारी कर सकेगा। साइंस पढ़ते-पढ़ते किसी को संगीत सीखना हो, किसी को आर्ट में कोई सब्जेक्ट लेना हो, यहां सारे सब्जेक्ट लेकर पढ़ाई कर सकता है। डॉक्टर बनते-बनते उसको लगता है, हिस्ट्री का पेपर लेना है, यहां ले सकता है।

उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा, एनसीसी-एनएसएस खेल इन सब की गुंजाइश अब पाठ्यक्रम में आ गई। यह एक्टिविटी पहले गतिविधियों के नाम से जानी जाती थी। दुर्भाग्य से पहले बाकी शिक्षकों की श्रेणी से इन शिक्षकों को छोटा माना जाता था।


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