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: Indore Law College: हिंदुओं की भावनाओं को भड़काने वाली किताब की लेखिका बीमार, दोनों किडनी फेल, मिली जमानत

News Desk / Wed, Dec 7, 2022


काॅलेज में मिली थी विवादित किताबें

काॅलेज में मिली थी विवादित किताबें - फोटो : SOCIAL MEDIA

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इंदौर के सरकारी लॉ कॉलेज की लाइब्रेरी में मिली विवादित किताब की लेखिका डॉ. फरहत खान को इंदौर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वह इस समय पुणे के एक अस्पताल में भर्ती हैं। डाॅ. फरहत की दोनों किडनी फेल है। वह इसका इलाज करा रही है। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर मौके पर ही जमानत दे दी है। उन्हें पुलिस ने पूछताछ के लिए और कोर्ट में पेश होने को कहा है।

डॉ. फरहत खान की गिरफ्तारी सामूहिक हिंसा और दांडिक न्याय पद्धति शीर्षक से प्रकाशित किताब में लिखी आपत्तिजनक बातों को लेकर हुई है। इस किताब में कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद को अल्पसंख्यकों पर बलपूर्वक गुलाम बनाने की बात कही गई है। संघ के ही अनुषांगिक संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों ने पिछले दिनों इंदौर के लॉ कॉलेज में इस विवादित किताब के मिलने का मुद्दा उठाया था। कॉलेज में प्रदर्शन किया था। इसके बाद मप्र सरकार के गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के निर्देश पर भंवरकुआ पुलिस थाने में केस दर्ज हुआ था। इस मामले में लेखिका, प्रकाशक अमर लॉ पब्लिकेशन, प्राचार्य इमानुर रहमान के साथ ही एक अन्य प्रोफेसर को आरोपी बनाया गया है। एक दिन पहले ही गृहमंत्री मिश्रा ने कहा था कि लेखिका को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की टीमें बनाई गई हैं। इस मामले में जल्द ही गिरफ्तारी होगी।  

पहले ही लग चुकी है पाबंदी
फरहत खान की किताब को लेकर तीन साल पहले बवाल हुआ था। तब वर्तमान महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने ही किताब के विवादित हिस्सों को लेकर शिकायत की थी। उस समय किताब को प्रतिबंधित कर दिया गया था। पिछले साल इस किताब को वापस ले लिया गया था। लेखिका ने एक माफीनामा जारी किया था। साथ ही पुस्तक से विवादित अंशों को हटाकर उसे फिर से प्रकाशित कराया था। हालांकि, लाइब्रेरी में संपादित किताब के बजाय प्रतिबंधित किताब मिलने को लेकर एबीवीपी ने हंगामा किया। इसके बाद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. इनामुर रहमान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। 

प्रकरण दर्ज होने के बाद शुरू हुई थी खोज
पुलिस का कहना है कि प्रकरण दर्ज होने के बाद सेंधवा तक उनका मोबाइल फोन काम कर रहा था। इसके बाद बंद हो गया था। पुलिस को पता चला कि वह पुणे में हैं। पुणे में एक टीम भेजकर लेखिका की गिरफ्तारी की गई। अस्पताल में ही जमानत दे दी गई। पुलिस ने लाइब्रेरी में किताब रखने के मामले में काॅलेज के पूर्व प्राचार्य डाॅ. रहमान को आरोपी बनाया है। वे भी तबियत खराब होने के कारण निजी अस्पताल में भर्ती हैं। जिला कोर्ट ने अग्रिम जमानत आवेदन खारिज कर दिया है। अब पुलिस उनके ठीक होने का इंतजार कर रही है।

उच्च शिक्षा विभाग की कमेटी कर रही है जांच
उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव के निर्देश पर सात सदस्यीय समिति इस मामले की जांच कर रही है। समिति ने जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ताओं छात्रों से पूछताछ की गई। साथ ही विभाग के अन्य लोगों से भी चर्चा की जा रही है। आदेश के अनुसार गुरुवार तक जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपी जानी है।  

विस्तार

इंदौर के सरकारी लॉ कॉलेज की लाइब्रेरी में मिली विवादित किताब की लेखिका डॉ. फरहत खान को इंदौर पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। वह इस समय पुणे के एक अस्पताल में भर्ती हैं। डाॅ. फरहत की दोनों किडनी फेल है। वह इसका इलाज करा रही है। पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर मौके पर ही जमानत दे दी है। उन्हें पुलिस ने पूछताछ के लिए और कोर्ट में पेश होने को कहा है।

डॉ. फरहत खान की गिरफ्तारी सामूहिक हिंसा और दांडिक न्याय पद्धति शीर्षक से प्रकाशित किताब में लिखी आपत्तिजनक बातों को लेकर हुई है। इस किताब में कथित तौर पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और विश्व हिंदू परिषद को अल्पसंख्यकों पर बलपूर्वक गुलाम बनाने की बात कही गई है। संघ के ही अनुषांगिक संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) के छात्रों ने पिछले दिनों इंदौर के लॉ कॉलेज में इस विवादित किताब के मिलने का मुद्दा उठाया था। कॉलेज में प्रदर्शन किया था। इसके बाद मप्र सरकार के गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा के निर्देश पर भंवरकुआ पुलिस थाने में केस दर्ज हुआ था। इस मामले में लेखिका, प्रकाशक अमर लॉ पब्लिकेशन, प्राचार्य इमानुर रहमान के साथ ही एक अन्य प्रोफेसर को आरोपी बनाया गया है। एक दिन पहले ही गृहमंत्री मिश्रा ने कहा था कि लेखिका को गिरफ्तार करने के लिए पुलिस की टीमें बनाई गई हैं। इस मामले में जल्द ही गिरफ्तारी होगी।  

पहले ही लग चुकी है पाबंदी
फरहत खान की किताब को लेकर तीन साल पहले बवाल हुआ था। तब वर्तमान महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने ही किताब के विवादित हिस्सों को लेकर शिकायत की थी। उस समय किताब को प्रतिबंधित कर दिया गया था। पिछले साल इस किताब को वापस ले लिया गया था। लेखिका ने एक माफीनामा जारी किया था। साथ ही पुस्तक से विवादित अंशों को हटाकर उसे फिर से प्रकाशित कराया था। हालांकि, लाइब्रेरी में संपादित किताब के बजाय प्रतिबंधित किताब मिलने को लेकर एबीवीपी ने हंगामा किया। इसके बाद कॉलेज के प्राचार्य डॉ. इनामुर रहमान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। 

प्रकरण दर्ज होने के बाद शुरू हुई थी खोज
पुलिस का कहना है कि प्रकरण दर्ज होने के बाद सेंधवा तक उनका मोबाइल फोन काम कर रहा था। इसके बाद बंद हो गया था। पुलिस को पता चला कि वह पुणे में हैं। पुणे में एक टीम भेजकर लेखिका की गिरफ्तारी की गई। अस्पताल में ही जमानत दे दी गई। पुलिस ने लाइब्रेरी में किताब रखने के मामले में काॅलेज के पूर्व प्राचार्य डाॅ. रहमान को आरोपी बनाया है। वे भी तबियत खराब होने के कारण निजी अस्पताल में भर्ती हैं। जिला कोर्ट ने अग्रिम जमानत आवेदन खारिज कर दिया है। अब पुलिस उनके ठीक होने का इंतजार कर रही है।


उच्च शिक्षा विभाग की कमेटी कर रही है जांच
उच्च शिक्षा मंत्री मोहन यादव के निर्देश पर सात सदस्यीय समिति इस मामले की जांच कर रही है। समिति ने जांच शुरू कर दी है। शिकायतकर्ताओं छात्रों से पूछताछ की गई। साथ ही विभाग के अन्य लोगों से भी चर्चा की जा रही है। आदेश के अनुसार गुरुवार तक जांच पूरी कर रिपोर्ट सौंपी जानी है।  

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