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News Desk / Wed, Mar 8, 2023


उज्जैन जिले के बड़नगर, उन्हेल, घट्टिया तहसील के ग्रामीण इलाकों में बुधवार को ये परंपरा मनाई गई।

उज्जैन जिले के बड़नगर, उन्हेल, घट्टिया तहसील के ग्रामीण इलाकों में बुधवार को ये परंपरा मनाई गई। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

होली पर्व पर उज्जैन ही नहीं मालवा-निमाड़ क्षेत्र के कई ग्रामीण इलाकों में सदियों से एक अनूठी परंपरा का निर्वहन ग्रामीण करते आ रहे हैं। ये परंपरा 'चूल' के नाम से प्रसिद्ध है। जिसमें धधकते अंगारों पर कोई हाथ में कलश लिए तो कोई बच्चों को लिए मन्नत मांगते हुए तो कोई मन्नत पूरी होने पर चलता है।

बता दें कि मालवा-निमाड़ के जिलों में होलिका दहन के अगले दिन इस परंपरा का निर्वहन किया जाता है। इसके लिए बकायदा मेले जैसा आयोजन होता है। बच्चे, युवा, बुजुर्ग और महिलाएं हर कोई इस अनूठी परंपरा का हिस्सा बन खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं। उज्जैन जिले के बड़नगर, उन्हेल, घट्टिया तहसील के ग्रामीण इलाकों में बुधवार को ये परंपरा मनाई गई। कोई मंदिरों में मनोकामनेश्वर महादेव के आगे सर झुकाता दिखा तो कोई फाग उत्सव के गीत गाते नजर नजर आया।


 

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