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क्या छिन जाएगी Kailash Vijayvargiya की कुर्सी ? : Amit Shah ने कैलाश-प्रहलाद को Delhi बुलाया; आखिर सीनियर मंत्री मोहन सरकार से क्यों हैं नाराज ?

Amit Shah Summons Ministers | Kailash Virodhi Naarazgi Explained: तारीख 24 फरवरी 2026। मध्य प्रदेश विधानसभा में नगरीय आवास एवं विकास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा हो रही थी। इस चर्चा के दौरान कांग्रेस के वरिष्ठ विधायक डॉ. राजेंद्र कुमार सिंह ने कहा- अध्यक्ष महोदय, हमारी यह मंशा नहीं थी, हम तो कह रहे थे कि सदन में जो कबूतर उड़ रहा है, वह भी हमें कुछ सिखाने के लिए आया है।

Amit Shah Summons Ministers | Kailash Virodhi Naarazgi Explained: इस पर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बोले- अध्यक्ष महोदय, मुझे पता नहीं है, इतने समय से, इतने साल से सदन चल रहा है, आज ही कबूतर क्यों आया। यह दिल्ली से तो नहीं आया (हंसी) मैंने पहली बार अंदर कबूतर देखा है।

Amit Shah Summons Ministers | Kailash Virodhi Naarazgi Explained: कैलाश विजयवर्गीय ने भले ही ये बात हंसी मजाक में कही हो मगर विधानसभा के बजट सत्र के दौरान कैलाश बनाम सरकार का जो सियासी घमासान देखने को मिला, उसने जरूर दिल्ली के कान खड़े कर दिए।

विधानसभा का बजट सत्र खत्म होने के बाद 28 फरवरी को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव दिल्ली पहुंचे, जबकि उनका ऑफिशियल कार्यक्रम श्योपुर का था। दिल्ली में वो केंद्रीय मंत्री अमित शाह के अलावा राष्ट्रीय संगठन महामंत्री बीएल संतोष से मिले।

विजयवर्गीय और पटेल को दिल्ली से आया बुलावा

Amit Shah Summons Ministers | Kailash Virodhi Naarazgi Explained: सीएम की इन दोनों नेताओं से मुलाकात के बाद अमित शाह के दफ्तर से कैलाश विजयवर्गीय को दिल्ली पहुंचने का संदेश मिला। इसके बाद वो इंदौर से रवाना हुए। ऐसा ही संदेश सीनियर मंत्री प्रहलाद पटेल को भी मिला था।

सूत्रों का और जानकारों का कहना है कि विधानसभा सत्र के दौरान कैलाश विजयवर्गीय के जो तेवर दिखे हैं और उन्होंने जो बयान दिए हैं। कहीं न कहीं उसने पार्टी को असहज किया है। ये मुलाकात इसलिए थी। दरअसल, पिछले साल भागीरथपुरा दूषित पानी मामले के बाद से ही कैलाश विजयवर्गीय के तेवर सरकार की कार्यप्रणाली को लेकर तल्ख थे।

Amit Shah Summons Ministers | Kailash Virodhi Naarazgi Explained: मप्र और छत्तीसगढ़ के क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जामवाल इस पर नजर रखे हुए थे। सत्र के दौरान तो विजयवर्गीय के तल्ख तेवर की वजह से सीएम को सदन में माफी भी मांगना पड़ी।

आखिर वो कौन से बयान थे जिनकी वजह से सरकार असहज हुई? कैलाश के तेवर अचानक बदले? या फिर भागीरथपुरा कांड के बाद वो जिस तरह से सरकार के रवैये से नाराज दिखे, ये उसका नतीजा था। या फिर बीजेपी के सीनियर मंत्री अब सरकार बनने के ढाई साल बाद खुद को जूनियर मुख्यमंत्री के साथ काम करने में असहज महसूस कर रहे हैं।

बयान नंबर- 1

दरअसल, ये बयान कैलाश विजयवर्गीय ने हंसी मजाक के लहजे में दिया था। हालांकि इस चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच राजनीतिक तल्खी भी देखने को मिली थी। भोपाल उत्तर के विधायक आतिफ अकील और बड़वानी के विधायक राजन मंडलोई ने ध्यानाकर्षण के जरिए मुद्दा उठाया था।

भोपाल में डॉग बाइट के रोजाना 40 से 50 मामले और साल 2025 में 19 हजार दर्ज मामलों का हवाला देते हुए विपक्ष ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया। ये भी आरोप लगाया था कि राजधानी में हर साल करीब 2 करोड़ रुपए नसबंदी और वैक्सीनेशन पर खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन सड़कों पर हालात में कोई खास सुधार नजर नहीं आता।

Amit Shah Summons Ministers | Kailash Virodhi Naarazgi Explained: नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब देते हुए कुत्ता की जगह श्वान शब्द का उपयोग किया और उन्हें इंसानों का पुराना दोस्त बताया। कांग्रेस विधायक भंवर सिंह शेखावत ने उन्हें कुत्तों का प्रभारी मंत्री कह दिया तो इस पर सत्ता पक्ष ने आपत्ति जताई। कैलाश विजयवर्गीय ने भी तंज कसते हुए कहा कि सारे कुत्तों से मुझे ही निपटना पड़ता है।

बयान नंबर- 2

कैलाश ने नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार को औकात में रहने की सलाह इसलिए दी क्योंकि चर्चा में अडानी समूह का नाम आ गया था। दोनों के बीच इतनी तीखी बहस हुई कि सदन की कार्यवाही तीन बार स्थगित करना पड़ी। कांग्रेस ने इसे आदिवासी का अपमान बताकर जमकर नारेबाजी की।

Amit Shah Summons Ministers | Kailash Virodhi Naarazgi Explained: दरअसल, राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान सिंघार ने आरोप लगाया कि सरकार अडानी समूह पर मेहरबान है। उन्हें सवाल लाख करोड़ रुपए देने की तैयारी है। सिंघार ने दावा कि कि सरकारी फाइलें अडानी के दफ्तर में देखी जा रही है। इस पर मंत्री विश्वास सारंग ने आपत्ति जताई कि जो व्यक्ति सदन का सदस्य नहीं है उसका नाम न लिया जाए।

सिंघार बोले- उनके पास इस बात के प्रमाण हैं, तो विजयवर्गीय बोले- है तो रखो। इसी के बाद विजयवर्गीय ने सिंघार को अपनी औकात में रहने की नसीहत दी। जवाब में सिंघार ने कहा- मैं तुम्हें औकात दिखा दूंगा। हालांकि इस बयान पर सीएम ने माफी मांगी। तो कैलाश ने कहा कि सीएम कैप्टन है माफी मांगी तो क्या गलत हुआ।

बयान नंबर- 3

Amit Shah Summons Ministers | Kailash Virodhi Naarazgi Explained: दरअसल, कांग्रेस इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित मौतों के मामले में स्थगन प्रस्ताव लेकर आई थी। स्थगन प्रस्ताव स्वीकार किया जाए या नहीं इसे लेकर चर्चा शुरू हुई। कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि भागीरथपुरा का इलाका मुंबई के धारावी जैसा है। यह 80-90 साल पुरानी बस्ती है। वहां कुछ अशिक्षित लोग रहते हैं, जिससे नगर निगम के लिए हर दृष्टि से व्यवस्थित काम करना कठिन हो जाता है।

इन हालात में कर्मचारी भी प्रॉपर काम नहीं कर पाते थे। उन्होंने घटना को कलंक और व्यक्तिगत आत्मग्लानि का विषय बताया। उन्होंने अफसरों की गलती मानी और ये भी कहा कि कांग्रेस का धरना प्रदर्शन गलत था। जहां मलहम की जरूरत थी वहां लाशों पर राजनीतिक रोटियां सेंकी गईं। इस पर नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि वो संवेदना व्यक्त करने गए थे राजनीति करने नहीं।

बयान नंबर- 4

Amit Shah Summons Ministers | Kailash Virodhi Naarazgi Explained: इसी चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने ये आरोप लगाया कि मंत्री जी भागीरथपुरा की घटना को लेकर कलंक और आत्मग्लानि बता रहे हैं, लेकिन उन्हें पता ही नहीं कि कितनी मौतें हुई हैं। सरकार 20 मौतें बता रही, हकीकत में मीडिया 35 मौतें बता चुका। जयवर्धन सिंह ने भी कहा कि उन्होंने इसी सत्र में स्वास्थ्य मंत्री से सवाल पूछा तो उन्होंने मौतों के अलग-अलग आंकडे पेश किए।

सरकार बताना नहीं चाहती कि कितनी मौतें हुई है। सदन में इसे लेकर जोरदार बहस हुई। इसके बाद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर के कमरे में कैलाश विजयवर्गीय ने प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की मौजूदगी में कहा कि अफसर उनके खिलाफ साजिश कर रहे हैं। उन्हें मौतों के आंकड़े सही नहीं बताए गए। अफसरों की वजह से विपक्ष को उन्हें घेरने का मौका मिला।

सूत्र बताते हैं कि विधानसभा अध्यक्ष ने एसीएस संजय दुबे को चेंबर में बुलाया और पूछा कि ऐसा जवाब क्यों लिखा? कैलाश विजयवर्गीय बोले की जिसने जवाब बनाया उसे सस्पेंड करिए। संजय दुबे ने कहा कि मेरे ही साइन से जवाब आया है तो मुझे ही सस्पेंड कर दीजिए। उन्होंने ये भी कहा कि जवाब गलत नहीं है। भागीरथपुरा में 20 मौतें हुई है और बाकी मौतें उस टाइम पीरियड में हुई लेकिन दूषित पानी से नहीं हुई।

बयान नंबर- 5

Amit Shah Summons Ministers | Kailash Virodhi Naarazgi Explained: कैलाश ने मेट्रो और दो बड़े शहरों के मास्टर प्लान को लेकर सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। दरअसल, नगरीय विकास एवं आवास विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान भोपाल और इंदौर के मास्टर प्लान को लेकर नेता प्रतिपक्ष ने तंज कसा और पूछा कि ड्राफ्ट क्या बैलगाड़ी से आ रहा है, इतनी देरी क्यों हो रही है?

इस पर नगरीय प्रशासन मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जवाब दिया कि विभाग डेढ़ साल पहले ही मास्टर प्लान का ड्राफ्ट तैयार कर मुख्यमंत्री को भेज चुका है। इसे जारी करना मुख्यमंत्री का अधिकार है। उनकी मंजूरी का इंतजार है। दरअसल, चर्चा की शुरुआत करते हुए कांग्रेस विधायक जयवर्धन सिंह ने सवाल किया था और कहा कि भोपाल का मास्टर प्लान 20 साल पहले खत्म हो गया है।

अब तक नया प्लान नहीं बना है। कैग भी आपत्ति ले चुका है। कैलाश ने ये भी कहा कि मुख्यमंत्री से 3-4 बार इस पर बात हुई है, उनका कहना कि मेट्रोपॉलिटन प्लान के हिसाब से इसे री-कंसीडर करना पड़ेगा। वे कहेंगे तो ड्राफ्ट दोबारा बनवाएंगे। इसी तरह मेट्रो को लेकर भी जवाब दिया।

केंद्रीय मंत्री शाह नेताओं से अलग अलग समय पर मिले

Amit Shah Summons Ministers | Kailash Virodhi Naarazgi Explained: शुक्रवार को विधानसभा का बजट सत्र खत्म होने के बाद कैलाश विजयवर्गीय इंदौर चले गए। इधर मुख्यमंत्री मोहन यादव और प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी दिल्ली रवाना हो गए। सूत्र बताते हैं कि शुक्रवार रात को इंदौर में कैलाश विजयवर्गीय एक कार्यक्रम में थे तभी उन्हें अमित शाह के दफ्तर से कॉल किया और शनिवार सुबह मिलने के बुलाया।

कैलाश जिस कार्यक्रम में थे उससे जल्द ही फारिग होकर देर रात की फ्लाइट से दिल्ली रवाना हो गए। शनिवार को वे अमित शाह से मिले। इससे पहले मुख्यमंत्री शाह से मिल चुके थे। हालांकि दोनों ही नेताओं ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर तस्वीरें साझा करते हुए लिखा कि समसामयिक मुद्दों पर केंद्रीय मंत्री से बात हुई।

अमित शाह ने प्रदेश अध्यक्ष खंडेलवाल से भी मुलाकात की, लेकिन अलग से। दूसरी तरफ राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन से हेमंत खंडेलवाल और मुख्यमंत्री दोनों एक साथ मिले। अमित शाह ने न केवल कैलाश को बुलाया था, बल्कि प्रहलाद पटेल से भी वे मिले। ऐसे में शीर्ष नेताओं का दिल्ली में होना और केंद्रीय मंत्री से अलग-अलग मुलाकात करने से एमपी की सियासत गर्मा गई। कई तरह से कयास लगाए जाने लगे। सूत्रों का कहना है कि विधानसभा में हुई गहमागहमी के बाद से ही दोनों नेताओं को दिल्ली बुलाया गया था।

एक्सपर्ट बोले- काफी दिनों का दर्द अब सार्वजनिक हुआ

Amit Shah Summons Ministers | Kailash Virodhi Naarazgi Explained: अब विधानसभा में हुए इस पूरे एपिसोड को लेकर एक्सपर्ट का कहना है कि सीनियर मंत्रियों का काफी दिनों का दर्द अब जाकर सार्वजनिक रूप से छलका है। वरिष्ठ पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक एन के सिंह कहते हैं कि जब से प्रदेश में मोहन यादव की सरकार बनी है। तभी से कई वरिष्ठ मंत्रियों को, जो पार्टी में ओहदे और अनुभव में सीनियर रहे हैं।

उन्हें अपने जूनियर साथी के हाथ के नीचे काम करना पड़ रहा है। ये सीनियर मंत्रियों के लिए पीड़ा दायक है और ये दर्द अब छलक रहा है। वे कहते हैं कि विधानसभा में हमने देखा कि दोनों पक्ष यानी एक विपक्ष और दूसरा सरकार के भीतर कैलाश के खिलाफ काम करने वाला पक्ष, दोनों ही अब सार्वजनिक तौर पर गुत्थम गुत्था नजर आ रहे हैं।

दोनों को जानबूझकर इग्नोर किया जा रहा

Amit Shah Summons Ministers | Kailash Virodhi Naarazgi Explained: अगले साल लोकल बॉडी इलेक्शन है। नगरीय प्रशासन और पंचायत दोनों ही विभाग सीनियर मंत्रियों के पास है। जिस तरह से तल्खी सामने आई है तो क्या इसका असर चुनाव पर पड़ेगा? इस सवाल का जवाब देते हुए एनके सिंह कहते हैं कि दोनों वरिष्ठ मंत्री हैं। दोनों की पृष्ठभूमि साफ सुथरी रही है। दोनों ही राजनीति के मंझे खिलाड़ी है।

Amit Shah Summons Ministers | Kailash Virodhi Naarazgi Explained: मुझे नहीं लगता कि इलेक्शन में वो पार्टी को नुकसान पहुंचाएंगे। दोनों इस हद तक भी नहीं जाएंगे कि हाईकमान उनके खिलाफ एक्शन लेने के लिए मजबूर हो जाए। वे कहते हैं कि इंदौर में कार्यकर्ताओं और नेताओं से बात करने पर इसकी असली जड़ समझ आएगी। कैलाश को इंदौर की ही पॉलिटिक्स में इग्नोर किया जा रहा है। इससे पहले ऐसा नहीं होता था। कोई भी मुख्यमंत्री रहा हो वो इंदौर के कैलाश विजयवर्गीय को हवाले छोड़ देते थे। प्रहलाद पटेल अपने लिए स्वतंत्र रहते थे।

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