मिनिस्टर बंगले में ट्रांसफर डील का स्टिंग : सीक्रेट कैमरे में बाबू बोला- मंत्री-प्रभारी मंत्री सबका हिस्सा; SDO के 15, नर्स के 5 लाख फिक्स
MP CG Times / Fri, Jun 19, 2026
मध्य प्रदेश में हालिया तबादलों के दौरान मंत्रियों के स्टाफ से लेकर बाबुओं तक पर रिश्वत की डील करने के आरोप सामने आए। स्टिंग ऑपरेशन में मंत्री के बंगले पर स्टाफ सदस्य, वल्लभ भवन का एक बाबू और ऊर्जा विकास निगम का एक कर्मचारी ट्रांसफर के बदले लाखों रुपए मांगते और सौदेबाजी करते कैमरे में कैद हुए।
स्टिंग में मंत्री के स्टाफ के कर्मचारी ने RAEO के तबादले के लिए 2.5 लाख रुपए, वल्लभ भवन के बाबू ने नर्स के तबादले के लिए 5 लाख रुपए और ऊर्जा विकास निगम के कर्मचारी ने 4.5 लाख रुपए मांगे। जांच के दौरान टीम ने 4 मंत्रियों, 1 विधायक और 4 बाबू-अफसरों से संपर्क किया था। इनमें कुछ ने किसी भी लेन-देन से इनकार किया।

राज्य सरकार ने 1 से 16 जून तक तबादलों पर लगी रोक हटाई थी। इस अवधि में विभिन्न विभागों में 20 हजार से ज्यादा तबादले हुए। प्रक्रिया के तहत ऑनलाइन आवेदन अनिवार्य था। स्टिंग ऑपरेशन के लिए टीम ने फर्जी आवेदनों के जरिए संबंधित लोगों तक पहुंच बनाई और भरोसा जीतने के बाद मुलाकातें कीं।
सूचना मिलने पर टीम ने एजेंट बनकर दिनेश बकोरिया से संपर्क किया। भरोसा बनने के बाद ऊर्जा भवन में मुलाकात तय हुई। बातचीत में दिनेश ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के मामलों में उसकी पकड़ है।

दिनेश: उनका ट्रांसफर बताया तुमने कि दमोह से जबलपुर है?
रिपोर्टर: जबलपुर नहीं, आसपास कहीं भी पाटन हो जाए।
दिनेश: भैया… आपका… स्टाफ नर्स का जो है…. आप मानकर चलिए 3.5 लाख (साढ़े तीन लाख)। मंत्री, फिर मंत्री के यहां जाना… बिना मंत्री के यहां नहीं होता।
रिपोर्टर (दिनेश को और भरोसे में लेते हुए): मैं आपको बताऊं, उन्होंने हमसे 5.5 लाख रुपए मांगे थे… अब आप बताइए। कहीं रखवा दें रुपए…?
दिनेश: भोपाल में आपका कोई पहचान का नहीं है?
रिपोर्टर: हां, कई हैं… लेकिन जो हमारी पहचान का है वह आपकी पहचान का नहीं होगा, फिर क्या मतलब निकलेगा।
दिनेश: हां, सही है। क्या मतलब पूरे पैसे रखवाने हैं या…
रिपोर्टर: एडवांस।
दिनेश: मतलब आपका यह कहना है कि 50 (हजार) दे दोगे आप अभी और 3 (लाख) कहीं रखवाने का बोल रहे हो?
रिपोर्टर: नहीं… नहीं… 50 हम आपको एडवांस दे देते हैं, बाकी काम होने पर देंगे। हम मैडम के हाथ का चेक दे देंगे, पोस्ट-डेटेड चेक। वो तो सरकारी कर्मचारी हैं। 50 हजार नकद दे दें आपको और 3 लाख का चेक दे देंगे। काम हो जाए तो आप चेक वापस दे देना, हम आपको नकद रुपए दे देंगे।
दिनेश: ठीक है।
रिपोर्टर: अब आप बताओ, विभाग दूसरा है, आप कैसे काम कराओगे?
दिनेश: करा लेंगे वो तो…। आप तो आम खाओ, गुठलियां मत गिनो।
फोन पर दो बार बातचीत के बाद अंकित अवधिया ने रिपोर्टर को वल्लभ भवन बुलाया। अलग केबिन में हुई बातचीत में उसने विभिन्न पदों के तबादलों के लिए कथित तौर पर अलग-अलग रकम बताई। नर्स के तबादले के लिए 4.5 से 5 लाख रुपए और अन्य मामलों में भुगतान व एडवांस की भी चर्चा की।

अंकित: नर्मदापुरम वाले वनरक्षक को…. मुरैना जाना है।
रिपोर्टर: हां…।
अंकित: वनरक्षक की सैलरी 40 हजार रुपए है, लेकिन क्या रहता है कि इसमें सबका फिक्स है, फिर अपन भी मेहनत करते हैं। नर्स का 5–5 (लाख) का भोपाल का है।
रिपोर्टर: और जबलपुर का…?
अंकित: वह भी ऐसा ही है..।
रिपोर्टर: जबलपुर का भी 5 ही है?
अंकित: हां… आप 4.5 लाख दे देना।
रिपोर्टर: एक बात है… हम तो विश्वास पर देते हैं। फिर काम नहीं होता है, पैसे फंस जाते हैं।
अंकित: (टेबल पर रखे एक कागज की तरफ इशारा करते हुए) टेबल पर जो कागज रखा है उसे उठाओ..।
(रिपोर्टर कागज उठाता है)
अंकित: नीचे वाली लाइन पढ़ो।
रिपोर्टर (चौंकते हुए): अरे क्या बात है! वनमंडल अधिकारी के नीचे क्या होता है… डिप्टी डीएफओ…?
अंकित: नहीं, SDO। ये सब चीजें बताने की नहीं होतीं। पैसा ऐसी चीज होती है…. ये 15 लाख का काम है, इनसे एक रुपया एडवांस नहीं लिया…।
बातचीत के दौरान अंकित ने रिकॉर्डिंग की आशंका जताते हुए रिपोर्टर का मोबाइल भी जांचा। उसने कहा- "आजकल मोबाइल-वोबाइल से डर लगता है।"

12 जून को रिपोर्टर कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना के सरकारी बंगले पहुंचा। वहां रोहन और अशोक बाथम से मुलाकात हुई। रोहन ने खुद को मंत्री का पीए बताया, जबकि बाथम मंत्री के स्टाफ का कर्मचारी है। रोहन ने आवेदन, ऑनलाइन प्रक्रिया, कर्मचारी की पोस्टिंग और पसंदीदा स्थान की जानकारी ली। बाद में रिपोर्टर की बातचीत अशोक कुमार बाथम से हुई।
बाथम: सोते हुए आए हो क्या इतनी लेट?
रिपोर्टर: हां सर, थोड़ा लेट हो गया।
बाथम: जबलपुर में कहां जाना है?
रिपोर्टर: आसपास कहीं भी करवा दीजिए।
बाथम (सीधे मुद्दे पर आते हुए): पेमेंट नकद लाए हो?
रिपोर्टर: अभी तो साथ में नहीं लाया हूं।
बाथम: कब दोगे फिर?
रिपोर्टर: जब आप कहेंगे, आज या कल में दे दूंगा।
(इसके बाद काफी देर तक बाथम, पीए रोहन और केबिन में बैठे दो अन्य लोगों के बीच सरकारी फाइलों और अन्य मामलों को लेकर चर्चा होती रही। कुछ देर बाद रोहन ने दोबारा बाथम को टोकते हुए रिपोर्टर की तरफ इशारा किया।)
रोहन: इन भैया की क्या समस्या है, इनको निपटा दो अब।
बाथम: ठीक है, निपटा दो। (रिपोर्टर की तरफ देखते हुए) भैया, वैसे तो अब सारा कारोबार (तबादलों का खेल) बंद हो गया है। लेकिन, यदि तुम ढाई लाख (2.5 लाख) रुपए तक खर्च कर सकते हो, तो आ जाना… नंबर ले लो और फोन कर लेना।
(रोहन ने तुरंत एक कागज की पर्ची उठाई, उस पर अपना नंबर लिखा और पर्ची रिपोर्टर के हाथ में थमा दी।)

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