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MP में CM और फैमिली की जमींदार फाइल्स ? : 335 एकड़ जमीन किसने खरीदी, बेटा-बहू, पत्नी और भाई के नाम कितने एकड़, इंडियन एक्सप्रेस ने कैसे लाया भूचाल ?

MP CM Mohan Yadav Family Property Allegations | Indian Express Report: मध्य प्रदेश की राजनीति में उस समय बड़ा विवाद खड़ा हो गया जब 'द इंडियन एक्सप्रेस' की एक खोजी रिपोर्ट के आधार पर मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़े जमीन सौदों पर सवाल उठने लगे। रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए मुख्यमंत्री के इस्तीफे और पूरे मामले की न्यायिक जांच की मांग कर दी।

कांग्रेस का आरोप है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने उज्जैन में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी, जिनमें से बड़ी संख्या ऐसी जगहों पर स्थित है जहां भविष्य में सड़क परियोजनाओं और मास्टर प्लान के कारण जमीनों की कीमत बढ़ सकती है।

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MP CM Mohan Yadav Family Property Allegations | Indian Express Report: इस पूरे विवाद की जड़ में 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट है। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि दिसंबर 2023 में मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन में कम से कम 45 करोड़ रुपए की 168 एकड़ जमीन खरीदी।

MP CM Mohan Yadav Family Property Allegations | Indian Express Report: कांग्रेस का कहना है कि इन खरीदों और सरकारी योजनाओं के बीच संबंधों की जांच होनी चाहिए, जबकि मुख्यमंत्री के करीबी इन आरोपों को राजनीतिक हमला बताते हुए कहते हैं कि यादव परिवार लंबे समय से रियल एस्टेट कारोबार से जुड़ा रहा है।

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट में क्या दावा?

'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2023 से लेकर हाल के वर्षों के दौरान मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने उज्जैन जिले में 137 भूखंड खरीदे। इन भूखंडों का कुल क्षेत्रफल लगभग 168 एकड़ बताया गया है और इनकी खरीद पर लगभग 45 करोड़ रुपए खर्च होने का दावा किया गया है।

रिपोर्ट में कहा गया है कि खरीदी गई जमीनों में से करीब 111 एकड़ ऐसे इलाकों में स्थित है, जो या तो प्रस्तावित सड़क परियोजनाओं के आसपास हैं या फिर 'उज्जैन मास्टर प्लान 2025' के तहत कृषि भूमि से आवासीय और व्यावसायिक उपयोग में परिवर्तित किए जा सकने वाले क्षेत्रों में आते हैं। इसी आधार पर रिपोर्ट में सवाल उठाया गया कि क्या इन जमीनों की खरीद भविष्य में संभावित मूल्य वृद्धि को ध्यान में रखकर की गई।

किन-किन लोगों के नाम सामने आए?

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि जमीनों की खरीद सीधे या परोक्ष रूप से मुख्यमंत्री परिवार के सदस्यों और उनसे जुड़ी कंपनियों के माध्यम से की गई। इनमें मुख्यमंत्री की पत्नी सीमा यादव, बहू शालिनी यादव, भाई नंदलाल यादव और नारायण यादव, भाभी रेखा यादव, भतीजे अभय यादव तथा चचेरे भाई गोविंद यादव और नीलेश यादव के नाम शामिल बताए गए हैं।

इसके अलावा परिवार से जुड़ी चार रियल एस्टेट कंपनियों का भी रिपोर्ट में उल्लेख किया गया है, जिनके माध्यम से जमीन खरीद के सौदे किए जाने का दावा किया गया है।

335 एकड़ जमीन पर कांग्रेस के सवाल

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने इस पूरे मामले को लेकर बड़ा सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति और उसका परिवार पहले लगभग 100 एकड़ जमीन का मालिक था, उसकी हिस्सेदारी मुख्यमंत्री बनने के बाद करीब डेढ़ साल में बढ़कर 335 एकड़ तक कैसे पहुंच गई।

पटवारी ने कहा कि जमीन स्वामित्व में हुई इस कथित बढ़ोतरी के पीछे की पूरी कहानी जनता के सामने आनी चाहिए। उन्होंने मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी मौजूदा न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की।

जयराम रमेश का हमला

कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर भाजपा सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में डबल इंजन सरकार के भीतर एक "लूट का इंजन" चल रहा है और मुख्यमंत्री स्वयं इस पूरे विवाद के केंद्र में हैं।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि राज्य की राजनीति में सत्ता संघर्ष और प्रभाव की लड़ाई के कारण यह मामला और अधिक चर्चा में आया है। हालांकि यह कांग्रेस के राजनीतिक आरोप हैं और इन पर कोई स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।

नेता प्रतिपक्ष ने क्या कहा?

विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने इस मामले पर तंज कसते हुए कहा कि देश में लोग "कश्मीर फाइल्स", "केरल फाइल्स" और "एपस्टीन फाइल्स" की चर्चा करते हैं, लेकिन अब मध्य प्रदेश में "मोहन यादव फाइल्स" चर्चा का विषय बन गई है।

उनका कहना था कि जमीन खरीद और राजनीतिक प्रभाव से जुड़े आरोपों की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

चुनावी हलफनामे में क्या जानकारी है?

साल 2023 विधानसभा चुनाव से पहले दाखिल संपत्ति विवरण के अनुसार मुख्यमंत्री मोहन यादव के पास लगभग 17 एकड़ जमीन दर्ज है। उनकी पत्नी सीमा यादव के पास लगभग 10.6 एकड़ जमीन बताई गई है।

संपत्ति विवरण में यह भी उल्लेख है कि मोहन यादव और उनकी पत्नी संयुक्त रूप से 'सिद्धि विनायक देवकॉन प्राइवेट लिमिटेड' में 73 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी रखते हैं। कंपनी के पास लगभग 39.5 एकड़ जमीन होने की जानकारी भी दर्ज है।

मुख्यमंत्री पक्ष की दलील

हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से इस विवाद पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया था, लेकिन मुख्यमंत्री के करीबियों और अधिकारियों का कहना है कि यादव परिवार वर्षों से रियल एस्टेट और निर्माण व्यवसाय से जुड़ा रहा है।

उनका तर्क है कि परिवार की कारोबारी गतिविधियों को सीधे मुख्यमंत्री के पद से जोड़ना उचित नहीं है। उनका कहना है कि जमीन खरीद के सौदों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय कारोबारी गतिविधियों के रूप में देखा जाना चाहिए।

पूरे विवाद से जुड़े बड़े सवाल

  • दिसंबर 2023 के बाद खरीदी गई 168 एकड़ जमीन का वास्तविक मूल्य क्या था?

  • 111 एकड़ जमीन विकास परियोजनाओं के आसपास ही क्यों केंद्रित रही?

  • 335 एकड़ जमीन का दावा किन दस्तावेजों के आधार पर किया जा रहा है?

  • क्या इन जमीनों के मूल्य में भविष्य में बड़े पैमाने पर वृद्धि की संभावना है?

  • क्या सरकारी नीतियों और जमीन खरीद के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध है?

  • क्या इस पूरे मामले की स्वतंत्र जांच कराई जाएगी?

फिलहाल क्या स्थिति है?

फिलहाल यह मामला राजनीतिक आरोपों और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर चर्चा में है। कांग्रेस इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाने की तैयारी में है, जबकि मुख्यमंत्री पक्ष आरोपों को राजनीतिक प्रेरित बता रहा है। आने वाले दिनों में सरकार, मुख्यमंत्री कार्यालय या जांच एजेंसियों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या जांच सामने आती है तो इस विवाद की दिशा और स्पष्ट हो सकेगी।

किसके नाम कितनी जमीन? (रिपोर्ट और हलफनामे के आधार पर)

  • मोहन यादव – 17 एकड़ जमीन (2023 चुनावी हलफनामे के अनुसार)

  • सीमा यादव (पत्नी) – 10.6 एकड़ जमीन

  • सिद्धि विनायक देवकॉन प्राइवेट लिमिटेड – 39.5 एकड़ जमीन

  • कंपनी में मोहन यादव और सीमा यादव की हिस्सेदारी – 73% से अधिक

  • मुख्यमंत्री बनने के बाद परिवार और संबंधित कंपनियों द्वारा खरीदी गई जमीन – 168 एकड़

  • खरीदे गए कुल भूखंड – 137 प्लॉट

  • जमीन खरीद पर कथित खर्च – करीब 45 करोड़ रुपए

  • नई सड़क परियोजनाओं/मास्टर प्लान क्षेत्र के पास स्थित जमीन – 111 एकड़

  • कांग्रेस के अनुसार परिवार की कुल हिस्सेदारी – 335 एकड़

रिपोर्ट में जिन नामों का उल्लेख

  • सीमा यादव (पत्नी)

  • शालिनी यादव (बहू)

  • नंदलाल यादव (भाई)

  • नारायण यादव (भाई)

  • रेखा यादव (भाभी)

  • अभय यादव (भतीजा)

  • गोविंद यादव (चचेरे भाई)

  • नीलेश यादव (चचेरे भाई)

नोट: 168 एकड़ और 335 एकड़ के आंकड़े अलग-अलग संदर्भों में सामने आए हैं। 168 एकड़ का उल्लेख 'द इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट में कथित खरीद के रूप में किया गया है, जबकि 335 एकड़ का दावा कांग्रेस ने परिवार की कुल हिस्सेदारी को लेकर किया है।

क्या बीजेपी मुख्यमंत्री मोहन यादव से इस्तीफा ले सकती है?

राजनीतिक रूप से यह सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है, लेकिन फिलहाल उपलब्ध तथ्यों के आधार पर मुख्यमंत्री मोहन यादव के इस्तीफे की संभावना को लेकर कोई आधिकारिक संकेत सामने नहीं आया है।

भाजपा में मुख्यमंत्री को हटाने या इस्तीफा लेने का फैसला पार्टी नेतृत्व और केंद्रीय संगठन स्तर पर होता है। आमतौर पर केवल राजनीतिक आरोपों के आधार पर इस्तीफा नहीं लिया जाता। ऐसे मामलों में पार्टी किसी जांच एजेंसी की रिपोर्ट, न्यायिक जांच, कानूनी कार्रवाई या ठोस सबूतों का इंतजार करती है।

कांग्रेस मुख्यमंत्री के इस्तीफे और न्यायिक जांच की मांग कर रही है, लेकिन अभी तक न तो किसी जांच एजेंसी ने मोहन यादव के खिलाफ कोई आरोप तय किया है और न ही किसी अदालत ने कोई प्रतिकूल टिप्पणी की है। ऐसे में तत्काल इस्तीफे की संभावना राजनीतिक विश्लेषकों को कम नजर आती है।

हालांकि यदि भविष्य में किसी जांच में गंभीर अनियमितताओं के प्रमाण सामने आते हैं, विपक्ष का दबाव बढ़ता है या पार्टी को राजनीतिक नुकसान की आशंका होती है, तो भाजपा नेतृत्व स्थिति की समीक्षा कर सकता है। फिलहाल मामला राजनीतिक आरोपों, मीडिया रिपोर्ट और जांच की मांग के स्तर पर ही है।

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