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राजेंद्रग्राम में गला घोंटकर मारा, फिर जलाकर गाड़ा : कोख से तौली गई जिंदगी, रिश्ते के भीतर पनपी साजिश, जानिए कैसे तड़पा-तड़पाकर मार डाला पति ?

मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के राजेन्द्रग्राम क्षेत्र में 26 जनवरी को जंगल से सटे एक नाले के पास मिला नरकंकाल सिर्फ एक हत्या की खबर नहीं था, बल्कि उस सामाजिक क्रूरता का सबूत था, जिसमें एक औरत की जिंदगी उसकी कोख से तौली जाती है। जली हुई हड्डियां, अधजले कपड़े और राख के ढेर के बीच दबी यह कहानी रिश्ते, संतान और पुरुष अहंकार की उस हिंसक परिणति को बयान कर रही थी, जिसका अंत मौत में हुआ।

यह कहानी है राजेश नंदिनी उर्फ सुरसा की—एक पत्नी, जिसने सिर्फ इसलिए अपनी जान गंवाई, क्योंकि वह मां नहीं बन सकी।

नरकंकाल से शुरू हुई जांच, जंगल में फैली सनसनी

26 जनवरी की सुबह राजेन्द्रग्राम थाना क्षेत्र के बरबसपुर गांव में जोगी नाला के पास कुछ ग्रामीण लकड़ी बीनने पहुंचे थे। नाले के किनारे गड्ढे में पड़े जले हुए मानव अवशेषों पर नजर पड़ते ही उनके होश उड़ गए। देखते ही देखते पूरे इलाके में सनसनी फैल गई। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल को सील कर जांच शुरू की।

हड्डियों के साथ जले कपड़े, बाल और राख मिले। शुरुआती जांच में पुलिस को साफ संकेत मिल गए थे कि यह कोई हादसा नहीं, बल्कि हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने की साजिश है। शव पूरी तरह जल चुका था, लेकिन दांत सुरक्षित थे—यहीं से केस की असली दिशा तय हुई।

दांतों और अधजले कपड़ों से हुई पहचान

पुलिस ने आसपास के गांवों में गुमशुदगी की जानकारी जुटाई और शक के आधार पर राजेश नंदिनी के मायके पक्ष को सूचना दी। जब परिजन मौके पर पहुंचे, तो मां की आंखें भर आईं और पिता कांपते हाथों से बोले—“ये दांत… ये कपड़े… मेरी बेटी के ही हैं।”

शॉर्ट पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने भी पुष्टि कर दी कि मौत प्राकृतिक नहीं, बल्कि गला दबाकर की गई हत्या है। अब सवाल सिर्फ एक था—किसने मारा?

शादी के बाद से ही तनाव, संतान न होने का ताना

जांच आगे बढ़ी तो पुलिस के सामने एक बेहद आम, लेकिन उतनी ही खौफनाक तस्वीर उभरी। राजेश नंदिनी की शादी रामकुमार उर्फ राजकुमार चंद्रवंशी से हुई थी। शादी को कई साल बीत चुके थे, लेकिन संतान नहीं होने की वजह से घर में तनाव लगातार बढ़ता गया।

धीरे-धीरे ताने शुरू हुए, झगड़े आम हो गए। पति खुलकर कहने लगा—“मुझे दूसरी शादी करनी है।”

राजेश नंदिनी ने इसका विरोध किया। वह जानती थी कि दूसरी शादी का मतलब सिर्फ एक नई पत्नी नहीं, बल्कि उसका सामाजिक और भावनात्मक अंत है।

मायके से घर लाने के बहाने रची गई मौत की साजिश

पुलिस के मुताबिक, वारदात वाले दिन आरोपी अपनी पत्नी को मायके से वापस घर ला रहा था। रास्ते में दोनों के बीच फिर वही पुराना विवाद शुरू हो गया। बरबसपुर के जोगी नाला के पास बहस ने हिंसक रूप ले लिया।

गुस्से में आरोपी ने कहा—“तू रास्ते से हट जा, तभी मेरी जिंदगी चलेगी…” इसी दौरान उसने पत्नी का गला दबा दिया। कुछ ही मिनटों में राजेश नंदिनी की सांसें हमेशा के लिए थम गईं।

शव जलाकर सबूत मिटाने की कोशिश

हत्या के बाद आरोपी घबरा गया, लेकिन डर से ज्यादा उसमें चालाकी थी। उसने शव को नाले के पास ले जाकर आग के हवाले कर दिया। जब शरीर जलकर राख हो गया, तो गड्ढा खोदकर अवशेष दबा दिए।

उसे लगा—लाश खत्म, कहानी खत्म। लेकिन अपराध की राख भी गवाही देती है।

परिजनों का शक, पुलिस की सख्ती और कबूलनामा

मायके वालों ने शुरू से ही पति पर शक जताया था। उनका सीधा सवाल था—
“अगर बेटी साथ थी, तो पति कहां है?”

29 जनवरी को पुलिस ने आरोपी को राजेन्द्रग्राम से हिरासत में लिया। शुरुआत में वह टालता रहा, लेकिन जब सख्ती बरती गई, तो टूट गया। आरोपी ने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

आरोपी की निशानदेही पर अहम सबूत बरामद

पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर मृतका का मोबाइल फोन, आधार कार्ड और रेलवे टिकट बरामद किए। ये वही चीजें थीं, जो हत्या के बाद अचानक गायब हो गई थीं।

SP का खुलासा: सुनियोजित हत्या थी

शुक्रवार को पुलिस अधीक्षक मोती उर रहमान ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि यह हत्या पारिवारिक विवाद का नतीजा थी। आरोपी दूसरी शादी करना चाहता था और पत्नी के विरोध से परेशान था। उसने साक्ष्य मिटाने की पूरी कोशिश की, लेकिन सफल नहीं हो सका।

एक सवाल जो समाज से टकराता है

राजेश नंदिनी की मौत सिर्फ एक अपराध नहीं है। यह समाज से टकराता सवाल छोड़ जाती है—
क्या संतान न होना किसी औरत का अपराध है?
क्या शादी सिर्फ बच्चे पैदा करने का सौदा है?
और क्या समाज का दबाव कानून से भी बड़ा हो चुका है?

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