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अजब MP की गजब करप्शन: आपदा को अवसर में बदला CMHO, डकार गए स्वास्थ्यकर्मियों का निवाला !

भिंड। जिले में स्वास्थ्य विभाग की मुश्किलें कम होती नजर नहीं आ रही है, जहां हाल ही में वैक्सीनेशन अभियान के दौरान फर्जी टीकाकरण के आरोप लग रहे हैं, जबकि टीकाकरण व्यवस्था में आर्थिक घोटाले के भी आरोप मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी पर लग रहे हैं. इसका खुलासा पूर्व मंत्री चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने किया है, उन्होने जिले के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर अजीत मिश्रा पर गबन और घोटाले के आरोप लगाए हैं.

पूरे देश में कोरोना की तीसरी लहर से बचाव के लिए टीकाकरण तेजी से किया जा रहा है, भिंड जिले में भी टीकाकरण अभियान पर प्रशासन का पूरा ध्यान है, बावजूद इसके पिछले दिनों प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन पर हुए टीकाकरण में बड़ा घोटाला सामने आया है, जिले के कई लोगों को फर्जी वैक्सीनेशन के मैसेज पहुंचे थे, जिनमें कुछ लोग ऐसे भी थे, जो महीनों पहले दुनिया छोड़ चुके थे, स्वास्थ्य विभाग में घोटाले का खुलासा होने के बाद अब लगातार मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं, कांग्रेस नेता और दिग्विजय सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे चौधरी राकेश सिंह चतुर्वेदी ने जिला स्वास्थ्य विभाग के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर अजीत मिश्रा पर गबन के गंभीर आरोप लगाए हैं.

टीकाकरण प्रशिक्षण में CMHO ने किया घोटाला

पूर्व मंत्री का आरोप है कि भिंड में टीकाकरण महा अभियान के दौरान आर्थिक घोटाला किया गया है, जिसकी किसी को भनक तक नहीं लगी है, उनका आरोप है कि मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर अजीत मिश्रा ने वैक्सीनेशन अभियान के लिए ड्यूटी कर्मचारियों के पैसे में बड़ा घोटाला किया है, टीकाकरण केंद्रों पर ड्यूटी करने वाले कर्मचारियों, वैक्सिनेटर और अन्य स्वास्थ्यकर्मियों के लिए शासन ने प्रशिक्षण की व्यवस्था की थी, साथ ही प्रशिक्षण के दौरान प्रत्येक कर्मचारी को प्रशिक्षण के दिन 300 रुपया मानदेय देना भी तय था, लेकिन किसी भी कर्मचारी को यह भत्ता नहीं मिला है, न ही इसकी जानकारी दी गई.

कर्मचारियों का निवाला भी डकार गए CMHO

पूर्व मंत्री ने यह भी आरोप लगाया है कि प्रशिक्षण के दौरान प्रशिक्षण केन्द्रों पर व्यवस्था के लिए लॉजिस्टिक डिस्पोजल और पानी के लिए 500 रुपये प्रति केंद्र पर सत्र राशि तय की गई थी, लेकिन यह भी किसी केंद्र पर नहीं दी गई, साथ ही सत्र के दौरान जलपान-भोजन के लिए भी टीकाकरण टीम के प्रत्येक सदस्य को 100 रुपये प्रतिदिन के हिसाब से मानदेय का भुगतान किया जाना था, लेकिन यह राशि भी मुख्य चिकित्सा अधिकारी द्वारा आवंटित नहीं करते हुए स्वयं गबन कर ली गई.

आर्थिक घोटाले की उच्चस्तरीय जांच की मांग

चौधरी राकेश चतुर्वेदी ने आरोप लगाते हुए कहा कि टीकाकरण महा अभियान के नाम पर यह एक बड़ा आर्थिक घोटाला किया गया है, जिस पर किसी का ध्यान नहीं है और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी द्वारा प्रशासन की मिलीभगत से यह पूरा पैसा डकार लिया गया है, उन्होंने सरकार से भिंड जिले में हुए इस आर्थिक घोटाले पर संज्ञान लेते हुए उच्चस्तरीय जांच की मांग की है. साथ ही मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और स्वास्थ्य मंत्री के अलावा कमिश्नर छवि भारद्वाज को जांच के लिए पत्र लिखेंगे.

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