: तोते पालने वालों को हो सकती है जेल: छत्तीसगढ़ में DFO ने दिया 7 दिन का अल्टीमेटम, कहा- चिड़ियाघर में जमा करें, टोल फ्री नंबर जारी
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तोते समेत अन्य पक्षी पालना अपराध
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार मई-2022 में संशोधित वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची में शामिल तोते या अन्य पक्षियों की खरीद-फरोख्त और पालना पूरी तरह प्रतिबंधित है। इसे अपराध की श्रेणी में रखा गया है।
वन विभाग की टीम करेगी छापेमारी
वन विभाग की ओर से आदेश जारी होने के बाद अब तोते समेत सभी पक्षियों को तय समय सीमा के भीतर कान्हा पेंडारी जू में जमा करना होगा। तय समय सीमा पूरी होने के बाद वन विभाग की टीम लोगों के घर जाकर छापेमारी करेगी और पक्षियों को रखने की शिकायत मिलने पर कार्रवाई करेगी।
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आदेश के बाद भी अगर पक्षियों को पिंजरे में रखा गया तो उनके खिलाफ मामला दर्ज कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। आदेश जारी होने के बाद अब यहां सख्त कार्रवाई करने की तैयारी है। वनकर्मियों, अफसरों और उड़नदस्ते को जांच के निर्देश दिए गए हैं।
स्वस्थ पक्षियों को तत्काल मुक्त किया जाएगा
मुख्यालय से जारी आदेश में कहा गया है कि पक्षियों को नजदीकी सरकारी चिड़ियाघर को सौंप दिया जाएगा। अगर कोई पक्षी स्वस्थ है तो उसे तत्काल प्राकृतिक आवास क्षेत्र में छोड़ना होगा।
चिड़ियाघर में बने क्वारंटीन सेंटर में सिर्फ उन्हीं पक्षियों को रखा जाएगा जो अस्वस्थ हैं। वन्य जीव चिकित्सक उनका उपचार करेंगे। जब वे पूरी तरह स्वस्थ हो जाएंगे तो उन्हें जंगल में छोड़ दिया जाएगा।
जुर्माने के साथ जेल भी- एसडीओ
इस मामले में बिलासपुर वन विभाग के एसडीओ अभिनव कुमार ने बताया कि अल्टीमेटम दिया गया है। अगर 7 दिन के अंदर कान्हा पेंडारी में जमा नहीं किया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
जेल के साथ जुर्माने की कार्रवाई भी की जाएगी। तोतों को पिंजरे में रखने से जैव विविधता पर बुरा असर पड़ रहा है। साथ ही शिकार और तस्करी रोकने का भी फैसला लिया गया है।
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टोल फ्री नंबर भी जारी
पक्षियों की खरीद-फरोख्त और पालन-पोषण रोकने के लिए वन मुख्यालय स्तर पर टोल फ्री नंबर (18002337000) भी जारी किया गया है। इसके अलावा वन प्रभाग स्तर पर अधिकारी का नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर भी जारी करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके साथ ही अगर कहीं भी लोग खरीद-फरोख्त करते नजर आएं तो इसकी सूचना दे सकते हैं। सूचना मिलने के बाद विभागीय अमला तुरंत मौके पर पहुंचेगा।
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