क्या खत्म हो गया लाल आतंक का साम्राज्य ? : गरियाबंद में 2 साल में 31 नक्सली ढेर और 29 सरेंडर, पढ़िए लाल सलाम से सन्नाटा तक की कहानी
गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। पुलिस दस्तावेजों के मुताबिक, जनवरी 2024 से लेकर अब तक सुरक्षा बलों ने नक्सल संगठन को अंदर तक हिला देने वाली कार्रवाई की है।
इस अवधि में 7 शीर्ष नक्सली नेताओं सहित कुल 31 माओवादी मारे गए, जबकि 29 नक्सलियों ने सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण किया। यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि उस नेटवर्क के टूटने की कहानी है जो वर्षों से जंगलों में अपनी जड़ें जमाए बैठा था।

ऑपरेशन की रणनीति, कैसे बदली पूरी तस्वीर
25 जनवरी 2024 को ग्राम तोरिभुई क्षेत्र में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ के बाद एक अहम सुराग हाथ लगा। इस मुठभेड़ में सक्रिय नक्सली सदस्य पार्वती (पिता उंगा, निवासी सिलगेर, जिला बीजापुर) के मारे जाने के बाद यह पुष्टि हुई कि इलाके में शीर्ष नक्सली नेतृत्व की मौजूदगी है।
यही इनपुट पूरे ऑपरेशन का टर्निंग पॉइंट बना। इसके बाद गरियाबंद पुलिस ने अपने अभियान और ऑपरेशन टीम का पुनर्गठन किया, रणनीति को नया रूप दिया और विशेष प्रशिक्षण के साथ बलों को आधुनिक संसाधनों से लैस किया।

जनवरी 2025: पहला बड़ा प्रहार
19 से 23 जनवरी 2025 के बीच बेसराजर-भालूडीग्गी की पहाड़ियों में चलाए गए विशेष अभियान ने इतिहास रच दिया। यह छत्तीसगढ़ में पहली बार था जब नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व को एक साथ इतना बड़ा नुकसान पहुंचा।
इस ऑपरेशन में CC (केंद्रीय कमेटी) स्तर के नेता चलपति, SZCM सदस्य सत्यं गवड़े, जयराम उर्फ गुड्डू और आलोक सहित कुल 16 नक्सली मारे गए। यह नक्सल संगठन के लिए सबसे बड़ा झटका माना गया।

सितंबर 2025: दूसरा बड़ा ऑपरेशन
11-12 सितंबर 2025 को ग्राम मेटाल-भालूडीग्गी क्षेत्र में एक और बड़े अभियान को अंजाम दिया गया। इस बार भी निशाने पर शीर्ष नेतृत्व था। इस ऑपरेशन में CC सदस्य मनोज उर्फ मोडेम बालाकृष्ण, SZCM प्रमोद उर्फ पांडू और विमल उर्फ सुरेंद्र उर्फ जाड़ी वेंकट सहित कुल 10 नक्सलियों को मार गिराया गया। यह लगातार दूसरी बार था जब शीर्ष स्तर पर नक्सल संगठन को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

सरेंडर की लहर: टूटता मनोबल
लगातार हो रही कार्रवाई का असर यह हुआ कि नक्सलियों के भीतर डर और असंतोष बढ़ने लगा।
7 नवंबर 2025 को उदंती एरिया कमेटी ने आत्मसमर्पण किया।
19 जनवरी 2026 को SDKS और सिनापाली एरिया कमेटी के सदस्यों ने पुलिस महानिरीक्षक के सामने हथियार डाले।
23 जनवरी 2026 को सीतानदी एरिया कमेटी ने धमतरी में आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके साथ धमतरी-गरियाबंद-नुआपाड़ा डिवीजन का पूरा चैप्टर लगभग खत्म हो गया।

हथियार, विस्फोटक और कैश: नेटवर्क का काला सच
इन ऑपरेशनों के दौरान बरामदगी ने नक्सलियों के मजबूत नेटवर्क की पोल खोल दी:
ग्रेनेड/आधुनिक हथियार: 31
अन्य हथियार: 44 (कुल 75 हथियार)
इलेक्ट्रिक डेटोनेटर: 304
नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर: 22
IED बम: 14
कोर्डेक्स वायर: लगभग 114.49 मीटर
बीजीएल सेल: 89
नकद राशि: ₹1,08,81,500 (एक करोड़ आठ लाख इक्यासी हजार पांच सौ रुपए)
यह बरामदगी बताती है कि नक्सल संगठन सिर्फ जंगलों में छिपे लड़ाके नहीं, बल्कि एक संगठित और फंडेड नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था।

क्या खत्म हो रहा है नक्सलवाद?
गरियाबंद में पिछले दो सालों में जो कुछ हुआ, वह सिर्फ पुलिस ऑपरेशन नहीं बल्कि एक सुनियोजित रणनीतिक अभियान का नतीजा है। लगातार मुठभेड़, शीर्ष नेताओं का खात्मा, बड़े पैमाने पर सरेंडर और करोड़ों की बरामदगी—ये सभी संकेत देते हैं कि इस क्षेत्र में नक्सलवाद की पकड़ कमजोर हो रही है।
लेकिन सवाल अब भी बाकी है—क्या यह अंत है, या सिर्फ एक बड़े अध्याय का समापन? क्योंकि जंगलों की इस जंग में हर जीत के बाद एक नई चुनौती जन्म लेती है।
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