Logo
Breaking News Exclusive
68 लाख की PM सड़क 1 साल में ही उखड़ी, अफसरों ने झाड़ा पल्ला तो भड़के 7 गांवों के लोग आरोपी ने खुद बनवाया था दरिंदगी का वीडियो, सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद POCSO एक्ट में जेल फॉर्च्यूनर पर गिरा बूम, तो गाड़ी से उतरकर टोलकर्मी को जड़े तड़ातड़ 5 थप्पड़; हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाता रहा कर्मचारी प्राइवेट एयरलाइन FLY91 से जुड़े; 2037 में होना था रिटायर्ड, अब उड़ाएंगे 70 सीटर यात्री विमान फार्मर ID बनवाने पहुंचे ग्रामीणों से की बदसलूकी; बोला- 'राजघराने से हूं, अफसर मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते' बोलीं- टीचरों की ऐप से निगरानी बंद करो, अफसरों के काम का भी ऑनलाइन हिसाब हो, DEO ने थमाया नोटिस बेकाबू स्कॉर्पियो ने बाइक को मारी टक्कर, 3 सगे भाई-बहनों समेत 4 की मौत; गांव में एक साथ उठीं तीन अर्थियां 3 साल से पुल अधूरा, 20 फीट की सीढ़ी, सरिए और खाई के बीच हर पल हादसे का डर, PWD का सिस्टम फेल रात में डसा, सुबह तक झाड़-फूंक कराते रहे परिजन, समय पर सही इलाज न मिलने से तड़पकर गई जान Former IPS Rajesh Pandey का नाम टॉप पर, 5585 आवेदन में 16 इंटरव्यू, जानिए कहानी ? 68 लाख की PM सड़क 1 साल में ही उखड़ी, अफसरों ने झाड़ा पल्ला तो भड़के 7 गांवों के लोग आरोपी ने खुद बनवाया था दरिंदगी का वीडियो, सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद POCSO एक्ट में जेल फॉर्च्यूनर पर गिरा बूम, तो गाड़ी से उतरकर टोलकर्मी को जड़े तड़ातड़ 5 थप्पड़; हाथ जोड़कर गिड़गिड़ाता रहा कर्मचारी प्राइवेट एयरलाइन FLY91 से जुड़े; 2037 में होना था रिटायर्ड, अब उड़ाएंगे 70 सीटर यात्री विमान फार्मर ID बनवाने पहुंचे ग्रामीणों से की बदसलूकी; बोला- 'राजघराने से हूं, अफसर मेरा कुछ नहीं बिगाड़ सकते' बोलीं- टीचरों की ऐप से निगरानी बंद करो, अफसरों के काम का भी ऑनलाइन हिसाब हो, DEO ने थमाया नोटिस बेकाबू स्कॉर्पियो ने बाइक को मारी टक्कर, 3 सगे भाई-बहनों समेत 4 की मौत; गांव में एक साथ उठीं तीन अर्थियां 3 साल से पुल अधूरा, 20 फीट की सीढ़ी, सरिए और खाई के बीच हर पल हादसे का डर, PWD का सिस्टम फेल रात में डसा, सुबह तक झाड़-फूंक कराते रहे परिजन, समय पर सही इलाज न मिलने से तड़पकर गई जान Former IPS Rajesh Pandey का नाम टॉप पर, 5585 आवेदन में 16 इंटरव्यू, जानिए कहानी ?

क्या खत्म हो गया लाल आतंक का साम्राज्य ? : गरियाबंद में 2 साल में 31 नक्सली ढेर और 29 सरेंडर, पढ़िए लाल सलाम से सन्नाटा तक की कहानी

गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नक्सलवाद के खिलाफ चल रही जंग अब निर्णायक मोड़ पर पहुंचती नजर आ रही है। पुलिस दस्तावेजों के मुताबिक, जनवरी 2024 से लेकर अब तक सुरक्षा बलों ने नक्सल संगठन को अंदर तक हिला देने वाली कार्रवाई की है।

इस अवधि में 7 शीर्ष नक्सली नेताओं सहित कुल 31 माओवादी मारे गए, जबकि 29 नक्सलियों ने सरकार की पुनर्वास नीति के तहत आत्मसमर्पण किया। यह सिर्फ आंकड़े नहीं, बल्कि उस नेटवर्क के टूटने की कहानी है जो वर्षों से जंगलों में अपनी जड़ें जमाए बैठा था।

इसे भी पढ़ें- लाल सलाम से लहू तक, इंसाफ से खून की नदिया तक : नक्सलबाड़ी से उठी चिंगारी से कैसे फैली खूनी आग, 12 ग्राफिक्स से समझिए लाल गलियारे का काला सच

ऑपरेशन की रणनीति, कैसे बदली पूरी तस्वीर

25 जनवरी 2024 को ग्राम तोरिभुई क्षेत्र में पुलिस-नक्सली मुठभेड़ के बाद एक अहम सुराग हाथ लगा। इस मुठभेड़ में सक्रिय नक्सली सदस्य पार्वती (पिता उंगा, निवासी सिलगेर, जिला बीजापुर) के मारे जाने के बाद यह पुष्टि हुई कि इलाके में शीर्ष नक्सली नेतृत्व की मौजूदगी है।

यही इनपुट पूरे ऑपरेशन का टर्निंग पॉइंट बना। इसके बाद गरियाबंद पुलिस ने अपने अभियान और ऑपरेशन टीम का पुनर्गठन किया, रणनीति को नया रूप दिया और विशेष प्रशिक्षण के साथ बलों को आधुनिक संसाधनों से लैस किया।

जनवरी 2025: पहला बड़ा प्रहार

19 से 23 जनवरी 2025 के बीच बेसराजर-भालूडीग्गी की पहाड़ियों में चलाए गए विशेष अभियान ने इतिहास रच दिया। यह छत्तीसगढ़ में पहली बार था जब नक्सलियों के शीर्ष नेतृत्व को एक साथ इतना बड़ा नुकसान पहुंचा।

इस ऑपरेशन में CC (केंद्रीय कमेटी) स्तर के नेता चलपति, SZCM सदस्य सत्यं गवड़े, जयराम उर्फ गुड्डू और आलोक सहित कुल 16 नक्सली मारे गए। यह नक्सल संगठन के लिए सबसे बड़ा झटका माना गया।

सितंबर 2025: दूसरा बड़ा ऑपरेशन

11-12 सितंबर 2025 को ग्राम मेटाल-भालूडीग्गी क्षेत्र में एक और बड़े अभियान को अंजाम दिया गया। इस बार भी निशाने पर शीर्ष नेतृत्व था। इस ऑपरेशन में CC सदस्य मनोज उर्फ मोडेम बालाकृष्ण, SZCM प्रमोद उर्फ पांडू और विमल उर्फ सुरेंद्र उर्फ जाड़ी वेंकट सहित कुल 10 नक्सलियों को मार गिराया गया। यह लगातार दूसरी बार था जब शीर्ष स्तर पर नक्सल संगठन को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

सरेंडर की लहर: टूटता मनोबल

लगातार हो रही कार्रवाई का असर यह हुआ कि नक्सलियों के भीतर डर और असंतोष बढ़ने लगा।

  • 7 नवंबर 2025 को उदंती एरिया कमेटी ने आत्मसमर्पण किया।

  • 19 जनवरी 2026 को SDKS और सिनापाली एरिया कमेटी के सदस्यों ने पुलिस महानिरीक्षक के सामने हथियार डाले।

  • 23 जनवरी 2026 को सीतानदी एरिया कमेटी ने धमतरी में आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके साथ धमतरी-गरियाबंद-नुआपाड़ा डिवीजन का पूरा चैप्टर लगभग खत्म हो गया।

हथियार, विस्फोटक और कैश: नेटवर्क का काला सच

इन ऑपरेशनों के दौरान बरामदगी ने नक्सलियों के मजबूत नेटवर्क की पोल खोल दी:

  • ग्रेनेड/आधुनिक हथियार: 31

  • अन्य हथियार: 44 (कुल 75 हथियार)

  • इलेक्ट्रिक डेटोनेटर: 304

  • नॉन-इलेक्ट्रिक डेटोनेटर: 22

  • IED बम: 14

  • कोर्डेक्स वायर: लगभग 114.49 मीटर

  • बीजीएल सेल: 89

  • नकद राशि: ₹1,08,81,500 (एक करोड़ आठ लाख इक्यासी हजार पांच सौ रुपए)

यह बरामदगी बताती है कि नक्सल संगठन सिर्फ जंगलों में छिपे लड़ाके नहीं, बल्कि एक संगठित और फंडेड नेटवर्क के रूप में काम कर रहा था।

क्या खत्म हो रहा है नक्सलवाद?

गरियाबंद में पिछले दो सालों में जो कुछ हुआ, वह सिर्फ पुलिस ऑपरेशन नहीं बल्कि एक सुनियोजित रणनीतिक अभियान का नतीजा है। लगातार मुठभेड़, शीर्ष नेताओं का खात्मा, बड़े पैमाने पर सरेंडर और करोड़ों की बरामदगी—ये सभी संकेत देते हैं कि इस क्षेत्र में नक्सलवाद की पकड़ कमजोर हो रही है।

लेकिन सवाल अब भी बाकी है—क्या यह अंत है, या सिर्फ एक बड़े अध्याय का समापन? क्योंकि जंगलों की इस जंग में हर जीत के बाद एक नई चुनौती जन्म लेती है।

इसे भी पढ़ें- भारत में कैसे पनपा 'लाल आतंक' नक्सलवाद ? : कौन-कौन से बड़े ऑपरेशन, कितने नेताओं-ग्रामीणों की बलि, जानिए कितने साल में खात्मा ?

इसे भी पढ़ें- क्या काला जादू से विधायक बनेंगे नेताजी ? : गांव के हर घर में तांत्रिक, बोले- हम मंत्र मारेंगे, हवा में गायब हो जाएगा इंसान, चुनाव में तंत्र कराने आ रहे माननीय


इसे भी पढ़ें- लाल सलाम से लहू तक, इंसाफ से खून की नदिया तक : नक्सलबाड़ी से उठी चिंगारी से कैसे फैली खूनी आग, 12 ग्राफिक्स से समझिए लाल गलियारे का काला सच


इसे भी पढ़ें- अमरकंटक बन रहा था नक्सलियों का नया हेडक्वार्टर : यहीं से चलाते खूनी साम्राज्य, आदिवासी थे लाल आतंक के टारगेट, हाथों में थमाते हथियार; जानिए कैसे ढहा रेड कॉरिडोर ?

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन