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राजिम भक्तिन माता के दर पर फ्री भोजन : भक्तों को परोसे जाते हैं छत्तीसगढ़िया व्यंजन, 15 दिनों तक चलेगा भंडारा

गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में राजिम भक्तिन माता भोग भंडारा में रोजाना 5 हजार श्रद्धालुओं को निःशुल्क भोजन कराया जा रहा है। लाला राम साहू के पहल पर सर्व समाज के मदद से पिछले 5 साल से मेला के दौरान 15 दिनों तक भंडारा चलता है। सेवा के लिए स्वयंसेवक भी जुटते हैं।

राजिम में भक्ति और संस्कृति का अनोखा संगम नजर आया। राजिम कुंभ कल्प में चल रहे भक्तिन माता भोग भंडारा ने 15 दिनों तक श्रद्धालुओं को भरपूर भोजन और सेवा का अनुभव दिया।

राजिम कुंभ कल्प में राजिम भक्तिन माता भोग भंडारा में निशुल्क भोजन की व्यवस्था की गई है। यहां रोजाना करीब 5 हजार श्रद्धालु भरपेट भोजन करते हैं।भोजन में सिर्फ छत्तीसगढ़िया व्यंजन ही परोसे जाते हैं।

भंडारे की शुरुआत पांच साल पहले साहू समाज के वरिष्ठ लाला साहू की पहल से हुई थी। खास बात यह है कि भोजन को प्रसाद के रूप में वितरण किया जाता है।भोजन तैयार होने के बाद पहला भोग राजिम भक्तिन माता को अर्पित किया जाता है।

इसके बाद श्रद्धालुओं को थाली में बड़े आदर भाव से भोजन कराया जाता है। मंदिर ट्रस्ट, साहू समाज और अन्य श्रद्धालुओं के आर्थिक सहयोग के साथ दर्जनों स्वयंसेवक रोजाना समय दान देकर पंडाल में सेवा करते हैं।

15 दिनों तक चलने वाले इस मेले में संस्कृति, आस्था और सेवा का अद्भुत संगम देखने को मिलता है। भक्तिन माता भोग भंडारा इस उत्सव का केंद्र बिंदु बनकर श्रद्धा, सेवा और सद्भाव का संदेश पूरे राज्य में फैलाता है।

छत्तीसगढ़िया भोजन भरपेट खाते हैं

भंडारे में भोजन थाली में परोसा जाता है। खास बात यह है कि रोजाना छत्तीसगढ़िया व्यंजन ही थाली में परोसा जाता है। जिसे आगंतुकों को बिठाकर प्रेम भाव से खिलाया जाता है।

संगम तट पर लक्ष्मण झूला से पहले नदी में यह भंडारा मौजूद है। भगवान के दर्शन के बाद श्रद्धालु यहां आकर भूख और थकान दोनों दूर करते हैं। साहू समाज के इस पहल से मेले में भोजन के लिए पैसे खर्च नहीं करना पड़ता।

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