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: MP News: जवाहरलाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल प्रबंधन ने मेडिकल डॉयरेक्टर को हटाया, विरोध में डॉक्टरों का प्रदर्शन

News Desk / Fri, Sep 30, 2022


जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल में डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया

जवाहरलाल नेहरू कैंसर अस्पताल में डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया - फोटो : अमर उजाला

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जवाहर लाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल अनियमितता और गड़बड़ी के चलते लंबे समय से विवादों में है। शनिवार को अस्पताल प्रबंधन ने मेडिकल डॉयरेक्टर डॉक्टर प्रदीप कोलेकर को बिना कारण बर्खास्त कर दिया। डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ इसके विरोध में आ गए। उन्होंने दोपहर 12 बजे आधे घंटे अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया। इसमें प्रबंधन को 48 घंटे में अपनी दो मांगे पूरी नहीं करने पर अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।

अस्पताल की मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ. अलका चतुर्वेदी ने बताया कि प्रबंधन की तरफ से एचआर ने मेडिकल डॉयरेक्टर को शनिवार को एक पत्र देकर साइन करने को कहा। इसमें पहले से लिखा था कि मेरा स्वास्थ्य खराब रहता है। इसलिए मैं अपने पद से इस्तीफा देता हूं। डॉयरेक्टर ने इसका विरोध किया और कारण पूछ कर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।  इस पर एचआर की तरफ से उनको कहा गया कि यदि आप इस पर हस्ताक्षर नहीं करते है तो  आपको बर्खास्त कर दिया जाएगा। डॉयरेक्टर ने बिना लिखित कारण के हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। शनिवार को जब डॉयरेक्टर अस्पताल आए तो एचआर ने उनको बर्खास्त करने का पत्र दे दिया। इसके विरोध में अस्पताल के सभी स्टाफ आ गए। अस्पताल प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ प्रदर्शन किया। हालांकि इस दौरान किसी मरीज को परेशानी ना हो इसका पूरा ख्याल रखा गया। 

डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि हम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग, भोपाल कमिश्नर, गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन, भोपाल कलेक्टर को ज्ञापन दिया है। इसमें हमने मेडिकल डॉयरेक्टर को तुरंत बहाल करने और एचआर मैनेजर को बर्खास्त करने की मांग की है। यदि 48 घंटे में हमारी मांगों को नहीं माना जाता है तो हम अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

बता दें जवाहर लाल नेहरू कैंसर अस्पताल लंबे समय से चर्चा में है। दरअसल अस्पताल का संचालन एक समिति करती है। जिसकी अध्यक्ष आशा जोशी है। अस्पताल प्रबंधन पर दवा कंपनियों से डिस्काउंट लेने और मरीजों को प्रिंट रेट पर देने, नौकरियों में लेनेदेन, समिति के सदस्यों के  रिश्तेदारों को मोटे वेतन पर नौकरी पर रखने और उनके वेतन बढ़ाने जैसे कई गंभीर आरोप लगे है।

जवाहर लाल नेहय कैंसर अस्पताल में अभी 130 से 140 मरीज भर्ती है। अस्पताल की ओपीडी करीब 200 से 250 मरीज प्रतिदिन है। अस्पताल के निर्माण के लिए जमीन सरकार की तरफ से उपलब्ध कराई गई है। 2019 तक सरकार की तरफ से अस्पताल को प्रति वर्ष 65 लाख रुपए का अनुदान भी मिलता था। अब यह बंद हो गया है। अस्पताल की संचालन समिति के गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन और भोपाल कमिश्नर सदस्य रहते हैं। इसलिए अस्पताल स्टाफ सरकार से प्रंबंधन की मनमानी रोकने की गुहार लगा रहा है। 

विस्तार

जवाहर लाल नेहरू कैंसर हॉस्पिटल अनियमितता और गड़बड़ी के चलते लंबे समय से विवादों में है। शनिवार को अस्पताल प्रबंधन ने मेडिकल डॉयरेक्टर डॉक्टर प्रदीप कोलेकर को बिना कारण बर्खास्त कर दिया। डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ इसके विरोध में आ गए। उन्होंने दोपहर 12 बजे आधे घंटे अस्पताल परिसर में प्रदर्शन किया। इसमें प्रबंधन को 48 घंटे में अपनी दो मांगे पूरी नहीं करने पर अनिश्चितकाल के लिए हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है।

अस्पताल की मेडिकल सुप्रीटेंडेंट डॉ. अलका चतुर्वेदी ने बताया कि प्रबंधन की तरफ से एचआर ने मेडिकल डॉयरेक्टर को शनिवार को एक पत्र देकर साइन करने को कहा। इसमें पहले से लिखा था कि मेरा स्वास्थ्य खराब रहता है। इसलिए मैं अपने पद से इस्तीफा देता हूं। डॉयरेक्टर ने इसका विरोध किया और कारण पूछ कर हस्ताक्षर करने से मना कर दिया।  इस पर एचआर की तरफ से उनको कहा गया कि यदि आप इस पर हस्ताक्षर नहीं करते है तो  आपको बर्खास्त कर दिया जाएगा। डॉयरेक्टर ने बिना लिखित कारण के हस्ताक्षर करने से मना कर दिया। शनिवार को जब डॉयरेक्टर अस्पताल आए तो एचआर ने उनको बर्खास्त करने का पत्र दे दिया। इसके विरोध में अस्पताल के सभी स्टाफ आ गए। अस्पताल प्रबंधन की मनमानी के खिलाफ प्रदर्शन किया। हालांकि इस दौरान किसी मरीज को परेशानी ना हो इसका पूरा ख्याल रखा गया। 

डॉ. चतुर्वेदी ने बताया कि हम मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, चिकित्सा शिक्षा मंत्री विश्वास सारंग, भोपाल कमिश्नर, गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन, भोपाल कलेक्टर को ज्ञापन दिया है। इसमें हमने मेडिकल डॉयरेक्टर को तुरंत बहाल करने और एचआर मैनेजर को बर्खास्त करने की मांग की है। यदि 48 घंटे में हमारी मांगों को नहीं माना जाता है तो हम अनिश्चित कालीन हड़ताल पर चले जाएंगे।

बता दें जवाहर लाल नेहरू कैंसर अस्पताल लंबे समय से चर्चा में है। दरअसल अस्पताल का संचालन एक समिति करती है। जिसकी अध्यक्ष आशा जोशी है। अस्पताल प्रबंधन पर दवा कंपनियों से डिस्काउंट लेने और मरीजों को प्रिंट रेट पर देने, नौकरियों में लेनेदेन, समिति के सदस्यों के  रिश्तेदारों को मोटे वेतन पर नौकरी पर रखने और उनके वेतन बढ़ाने जैसे कई गंभीर आरोप लगे है।

जवाहर लाल नेहय कैंसर अस्पताल में अभी 130 से 140 मरीज भर्ती है। अस्पताल की ओपीडी करीब 200 से 250 मरीज प्रतिदिन है। अस्पताल के निर्माण के लिए जमीन सरकार की तरफ से उपलब्ध कराई गई है। 2019 तक सरकार की तरफ से अस्पताल को प्रति वर्ष 65 लाख रुपए का अनुदान भी मिलता था। अब यह बंद हो गया है। अस्पताल की संचालन समिति के गांधी मेडिकल कॉलेज के डीन और भोपाल कमिश्नर सदस्य रहते हैं। इसलिए अस्पताल स्टाफ सरकार से प्रंबंधन की मनमानी रोकने की गुहार लगा रहा है। 


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