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अमरकंटक नर्मदा मंदिर में करोड़ों की चढ़ावा चोरी ? : 25 साल के सोने-चांदी का रिकॉर्ड गायब, ट्रस्ट का दावा- थाने में रखा; टीआई बोले- यहां कुछ भी नहीं

अनूपपुर। राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के बाद पारदर्शिता बढ़ाने के दावे करने वाले अमरकंटक के मां नर्मदा उद्गम मंदिर में अब दान-चढ़ावे को लेकर बड़ा खुलासा हुआ है। मंदिर में 2021 के बाद दान में मिले सोना-चांदी और नकदी का पूरा हिसाब उपलब्ध नहीं है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि करोड़ों के चढ़ावे में मिले जेवरात और अन्य कीमती सामान आखिर कहां हैं। ट्रस्ट का दावा है कि जेवरात थाने में जमा हैं, लेकिन थाना प्रभारी इससे साफ इनकार कर रहे हैं।

मामला सिर्फ रिकॉर्ड तक सीमित नहीं है। नगर परिषद के पास ट्रस्ट का बायलॉज नहीं है, दानपेटियों की गिनती वाले कक्ष का CCTV निरीक्षण के दौरान बंद मिला, रजिस्टरों में कटिंग और व्हाइटनर के निशान हैं। वहीं, पुजारी दुर्गेश द्विवेदी ने दानपेटी खोलने और गिनती की प्रक्रिया में फर्जी या बाद में हस्ताक्षर कराने के आरोप लगाए हैं। इन सभी तथ्यों ने मां नर्मदा उद्गम मंदिर में दान-चढ़ावे के पूरे प्रबंधन को सवालों के घेरे में खड़ा कर दिया है।

अब पढ़िए डिटेल में पूरी कहानी

मां नर्मदा के उद्गम स्थल अमरकंटक स्थित नर्मदा उद्गम मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर गंभीर अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि मंदिर को सालों से दान में मिले सोने-चांदी के जेवरात का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है। वहीं मंदिर ट्रस्ट का दावा है कि दान में मिले जेवरात अमरकंटक थाने में जमा कराए जाते हैं और इसकी रसीद ट्रस्ट के पास है। हालांकि, अमरकंटक थाना प्रभारी (TI) का कहना है कि थाने में मंदिर का कोई चढ़ावा या जेवरात जमा नहीं रखा जाता।

नर्मदा उद्गम मंदिर का संचालन स्थानीय नगर परिषद के माध्यम से होता है, लेकिन नगर परिषद के पास ही ट्रस्ट का बायलॉज (उपनियम) उपलब्ध नहीं है। ऐसे में दानपेटियों की गिनती, सोने-चांदी के संरक्षण, जवाबदेही और अन्य प्रक्रियाओं के स्पष्ट नियम मौजूद नहीं हैं। श्री नर्मदा मंदिर उद्गम ट्रस्ट का गठन वर्ष 2001 में किया गया था। ट्रस्ट पर मंदिर संचालन, निर्माण कार्य, दानपेटियों की राशि और सोने-चांदी के प्रबंधन की जिम्मेदारी है, लेकिन हालिया खुलासों के बाद इसकी कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े हो गए हैं।

25 साल के सोने-चांदी का पूरा रिकॉर्ड नहीं

मंदिर ट्रस्ट के पास कुल 10 दानपेटियां हैं। इनमें मुख्य उद्गम मंदिर, कार्तिक स्वामी मंदिर, राम मंदिर, ग्यारह रुद्र मंदिर, उद्गम स्थल, विष्णु मंदिर और माई की बगिया सहित अन्य स्थानों की दानपेटियां शामिल हैं।

मंदिर प्रबंधन के अनुसार ट्रस्ट के खाते में वर्तमान में करीब 1.41 करोड़ रुपए जमा हैं। हालांकि, साल 2001 से अब तक मंदिर को दान में मिले सोने-चांदी के जेवरात का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

2021 के बाद नई सूची बनी, पुराने रिकॉर्ड अधूरे

साल 2021 से व्यवस्था संभाल रहे कर्मचारी गणेश पाठक ने बताया कि उनके कार्यभार संभालने के बाद मंदिर के जेवरातों की सूची तैयार की गई। उन्होंने कहा कि पुराने रजिस्टरों में प्रविष्टियां स्पष्ट नहीं हैं, इसलिए मंदिर के पास कुल कितने जेवरात हैं और उनका पूरा विवरण क्या है, इसकी स्पष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है।

गणेश पाठक के मुताबिक राम मंदिर चोरी प्रकरण के बाद समिति ने नए जेवरातों की फोटो सहित रिकॉर्डिंग शुरू की, लेकिन पुराने जेवरातों का रिकॉर्ड आज भी अधूरा है।

बैंक लॉकर की जगह थाने में रखने का दावा, लेकिन TI ने किया इनकार

आमतौर पर मंदिरों के कीमती जेवरात बैंक लॉकर में सुरक्षित रखे जाते हैं, लेकिन अमरकंटक मंदिर के मामले में ट्रस्ट का कहना है कि जेवरात थाने में जमा कराए जाते हैं।

ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष और नगर परिषद के सीएमओ चैन सिंह परस्ते ने स्वीकार किया कि उन्हें यह जानकारी नहीं है कि यह व्यवस्था कब और किस आधार पर शुरू हुई। उन्होंने यह भी माना कि मंदिर के सोने-चांदी का पूरा रिकॉर्ड उनके पास उपलब्ध नहीं है। उन्होंने कहा कि जेवरात कब, किसकी मौजूदगी में और किस प्रक्रिया से थाने भेजे जाते हैं, इसका भी कोई स्पष्ट रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

दूसरी ओर अमरकंटक थाना प्रभारी (TI) का कहना है कि थाने में मंदिर का कोई भी चढ़ावा या जेवरात जमा नहीं रखा जाता। ट्रस्ट और पुलिस के इस विरोधाभासी दावे ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया है।

नगर परिषद के पास ही नहीं ट्रस्ट का बायलॉज

मंदिर का संचालन स्थानीय नगर परिषद के माध्यम से होता है, लेकिन परिषद के पास ट्रस्ट का बायलॉज ही उपलब्ध नहीं है। ऐसे में दान की गिनती, सोने-चांदी के संरक्षण, जवाबदेही और अन्य प्रक्रियाओं के लिए कोई लिखित नियम मौजूद नहीं हैं।

सीएमओ चैन सिंह परस्ते ने पुष्टि की कि नगर परिषद के पास ट्रस्ट का बायलॉज उपलब्ध नहीं है और फिलहाल पुरानी व्यवस्था के आधार पर ही पूरा काम किया जा रहा है।

दान की गिनती वाले कमरे में CCTV पर भी सवाल

वर्तमान में मंदिर की दानपेटियों की राशि की गिनती मंदिर परिसर के प्रसाद कक्ष में की जाती है, जिसका निर्माण करीब सात साल पहले हुआ था। इससे पहले दान की गिनती किसी अन्य स्थान पर होती थी।

उपलब्ध जानकारी के मुताबिक कई वर्षों तक दानपेटियों की गिनती बिना CCTV निगरानी के होती रही। हाल ही में गणना कक्ष में एक CCTV कैमरा लगाया गया, लेकिन निरीक्षण के दौरान वह कैमरा बंद मिला, जिससे पारदर्शिता को लेकर सवाल और गहरे हो गए।

दानपेटी खोलने और हस्ताक्षर प्रक्रिया पर भी आरोप

मंदिर के पुजारी दुर्गेश द्विवेदी ने आरोप लगाया है कि दानपेटी खोलने के लिए जिन सदस्यों को बुलाया जाता है, उनमें से कुछ गिनती के समय मौजूद ही नहीं रहते। इसके बावजूद बाद में रजिस्टर में उनके हस्ताक्षर करा दिए जाते हैं।

दुर्गेश द्विवेदी का आरोप है कि कई मामलों में फर्जी हस्ताक्षर किए जाते हैं या बाद में हस्ताक्षर कराए जाते हैं। उनका कहना है कि इससे दान राशि की गिनती की पारदर्शिता और विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े होते हैं।

रजिस्टर में कटिंग और व्हाइटनर के इस्तेमाल पर भी सवाल

दान राशि और सोने-चांदी के रिकॉर्ड से जुड़े सरकारी रजिस्टरों में कई जगह कटिंग और व्हाइटनर का इस्तेमाल दिखाई देता है। कुछ प्रविष्टियों में पहले दर्ज आंकड़ों को मिटाकर नए आंकड़े लिखे गए हैं। दस्तावेजों के अनुसार जेवरातों के वजन और रिकॉर्ड में भी विसंगतियों के आरोप हैं। इससे पूरे रिकॉर्ड की विश्वसनीयता और पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

ट्रस्ट की जिम्मेदारी, लेकिन जवाबों से बढ़े सवाल

श्री नर्मदा मंदिर उद्गम ट्रस्ट का गठन वर्ष 2001 में मंदिर संचालन, निर्माण कार्य, दानपेटियों की राशि और सोने-चांदी के संरक्षण के लिए किया गया था। लेकिन सोने-चांदी का पूरा रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होना, ट्रस्ट और पुलिस के अलग-अलग दावे, नगर परिषद के पास बायलॉज का नहीं होना, CCTV व्यवस्था पर सवाल, हस्ताक्षर प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियां और रजिस्टरों में कटिंग-व्हाइटनर जैसे मामलों ने मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ट्रस्ट में कौन-कौन, जिनके कार्यकाल में उठे सवाल

श्री नर्मदा मंदिर उद्गम ट्रस्ट का गठन वर्ष 2001 में हुआ था। मंदिर के संचालन, दानपेटियों की राशि, सोने-चांदी के जेवरात और निर्माण कार्यों की जिम्मेदारी ट्रस्ट पर है। हालिया खुलासों में दान-चढ़ावे के रिकॉर्ड, जेवरातों के संरक्षण और गिनती प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं।

ट्रस्ट में प्रमुख जिम्मेदार पद

  • अध्यक्ष: कलेक्टर, अनूपपुर

  • उपाध्यक्ष: एसडीएम, पुष्पराजगढ़

  • कोषाध्यक्ष: नगर परिषद सीएमओ चैन सिंह परस्ते

  • सचिव: (यदि नाम उपलब्ध हो तो जोड़ें)

  • सदस्य: संबंधित विभागों के अधिकारी एवं नामित सदस्य

इन्हीं के कार्यकाल में उठे ये सवाल

  • 2021 के बाद दान में मिले सोने-चांदी और नकदी के रिकॉर्ड पर सवाल।

  • ट्रस्ट के पास जेवरातों का स्पष्ट और संपूर्ण रिकॉर्ड नहीं।

  • ट्रस्ट का दावा- जेवरात थाने में जमा, जबकि थाना प्रभारी ने इससे इनकार किया।

  • नगर परिषद के पास ट्रस्ट का बायलॉज उपलब्ध नहीं।

  • दानपेटी की गिनती वाले कक्ष का CCTV निरीक्षण में बंद मिला।

  • रजिस्टरों में कटिंग और व्हाइटनर के इस्तेमाल के आरोप।

  • पुजारी दुर्गेश द्विवेदी ने गिनती के दौरान फर्जी या बाद में हस्ताक्षर कराने के आरोप लगाए।

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