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आपकी कार-बाइक भंगार बना रही सरकार ? : Ethanol से Petrol Tanks में जम रही काली फंगस, माइलेज घटा, सर्विसिंग चार्ज डबल, जानिए इंजन कैसे हुए खटारा ?

देश की सड़कों पर चलती-फिरती लाखों गाड़ियां अब 'वॉकिंग डेड' बनती जा रही हैं। गाड़ियों की खूनी कत्ले-आम के जिम्मेदार सरकार के E20 इथेनॉल के नाम पर थोपा गया जहरीला ईंधन। ये 'हरा-भरा' दिखने वाला फॉर्मूला असल में टैंकों, पाइपों और इंजनों में 'काली फंगस' की तरह फैल रहा है, जो पेट्रोल पंप से लेकर सिलेंडर तक हर नली-नक्कारे को चिपचिपा कर सड़ा रहा है।

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मानो किसी ने गाड़ी के सीने में ज़हर का टीका लगा दिया हो। रबर के पुर्जे फट रहे हैं। फ्यूल इंजेक्टर जाम हो रहे हैं। पिस्टन के रिंग इतने घिस रहे हैं कि इंजन से निकलने वाला धुआं भी मौत की चीख लगाता नजर आता है। माइलेज तो 20% तक गोता लगा चुका है, मानो ईंधन की ताकत ही खत्म हो गई हो।

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इस तबाही के बीच गाड़ी मालिकों की जेब से सर्विसिंग चार्ज दोगुने हो गए। सरकारी मशीनरी बेपरवाही से E5-E10 जैसे सुरक्षित विकल्पों को मिट्टी में मिला चुकी है। जनता की सुविधा उनकी नजरों में कूड़ा हो। ये सरकार देश की गाड़ियों को 'भंगार' बनाने की औद्योगिक हत्या कर रही है। ये महज 'नीति' नहीं, ये 'इंजन-हत्या' है। 'काली फंगस' के पीछे छुपी सच्चाई ये है कि जनता की गाड़ियां खराब हो रही हैं।

अब पढ़िए देश के गाड़ी मालिक की पीड़ा

विक्रम दिल्ली के पालिका भवन में काम करते हैं। तीन साल पहले पुरानी कार खरीदी। एक साल बाद ही कार के फ्यूल सिस्टम में दिक्कत आ गई। पता चला कि कार में सिर्फ 10% एथेनॉल (E10) वाला पेट्रोल ही डाल सकते थे, लेकिन 20% एथेनॉल वाला, यानी E20 फ्यूल डाल दिया गया। इसका असर कार के माइलेज पर भी दिख रहा है। पहले साल में कार की सर्विसिंग में 15-20 हजार रुपए खर्च हुए। अगले साल खर्च दोगुना हो गया।

पालिका भवन में ही 22 साल के कुणाल कार रिपेयर कराने पहुंचे। वे कहते हैं, ‘जब से पेट्रोल में चींटी लगने का वीडियो देखा, तब से गाड़ी खराब होने का डर सताने लगा। इसलिए पावर पेट्रोल ही भरवा रहा हूं।‘ गाड़ियों को लेकर ये फिक्र अकेले विक्रम या कुणाल की नहीं है। सोशल मीडिया पर भी एथेनॉल फ्यूल से गाड़ियों में गड़बड़ी का दावा करने वाले ढेरों वीडियो शेयर हो रहे हैं।

देश में 5 जून 85% एथेनॉल वाला E85 भी लॉन्च

देश में 5 जून को फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों के लिए डिजाइन 85% एथेनॉल वाला E85 भी लॉन्च कर दिया गया। आगे 100% एथेनॉल फ्यूल लाने की तैयारी है। अभी E20 फ्यूल का गाड़ियों पर क्या असर हो रहा है, ये जानने के लिए हम दिल्ली के सबसे बड़े कार रिपेयरिंग मार्केट पालिका पहुंचे।

‘फ्यूल टैंक में काली फंगस जमने से जंग लग रही’

दीपक राज यहां 20 साल से कार रिपेयरिंग का काम कर रहे हैं। वो कहते हैं, ‘2 साल से गाड़ियों में फ्यूल से जुड़ी दिक्कतें बढ़ गई हैं। फ्यूल टैंक में काई जमा होने की शिकायतें मिल रही हैं। दरअसल एथेनॉल में पानी सोखने की क्षमता होती है, जिसकी वजह से फ्यूल के सेंसर खराब हो रहे हैं। टैंक में काली परत सी जमी दिखती है, जिसकी वजह से फ्यूल पंप में जंग लग रही है।‘

दीपक आगे कहते हैं, ‘जब से पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ी है, तब से फ्यूल से जुड़े पार्ट्स फ्यूल सेंसर, पंप और फिल्टर तीनों में दिक्कत आ रही है। पिछले 1 महीने में मर्सिडीज की 6-7 गाड़ियों में एक जैसी ही दिक्कत देखी गई।‘

कार चलते-चलते अचानक बंद होने की शिकायतें बढ़ीं

मोहसिन 2006 से कार रिपेयरिंग का काम कर रहे हैं। वो कहते हैं कि गाड़ियों में एथेनॉल वाला पेट्रोल डलने के बाद से शिकायतें बढ़ी हैं। गाड़ियों फ्यूल पंप और हाई प्रेशर पंप बैठ जाते हैं। नई कारें भी चलते-चलते अचानक बंद हो जाती हैं। इंजन के इंजेक्टर, फ्यूल फिल्टर, फ्यूल पंप, पिस्टन, वाल्व सभी पार्ट्स में खराबी आ रही है।

मोहसिन कहते हैं, ‘नई गाड़ियां E20 पेट्रोल के हिसाब से बनी हैं। अब अगर एथेनॉल की मात्रा पहले से बढ़ाई गई, तो ये गाड़ियां कैसे चलेंगी। जो गाड़ियां सिर्फ पेट्रोल या फिर E10 के लिए बनी हैं, उनमें तो गड़बड़ी आनी शुरू हो चुकी है।’

8-10 साल में खराब होने वाला फ्यूल पंप एक साल में बेकार

मयंक मलिक दिल्ली में कार डीलर हैं। वे ऑडी, BMW, मर्सिडीज जैसी प्रीमियम कारों में डील करते हैं। मयंक कहते हैं कि एथेनॉल का सबसे ज्यादा असर गाड़ियों में इस्तेमाल होने वाले रबर और प्लास्टिक पार्ट्स पर हुआ है। वो गलकर जल्दी खराब हो रहे हैं। गाड़ी में रिपेयर वर्क ज्यादा आ रहा है। माइलेज भी घटा है। पुरानी कारों पर असर सबसे ज्यादा है।

कार के ऑटोपार्ट्स की दुकान चलाने वाले राजेश कहते हैं कि पहले गाड़ियों में 8-10 साल बाद ही फ्यूल पंप खराब होता था, लेकिन अब एक साल पुरानी गाड़ियों के फ्यूल पंप खराब हो रहे हैं। ये गड़बड़ी भी पेट्रोल गाड़ियों में ही देखने को मिल रही है। डीजल गाड़ी में ये शिकायतें नहीं आ रहीं।

एथेनॉल फ्यूल के बाद बाइक में 5 शिकायतें आ रहीं…

बाइक मैकेनिक चंद्रप्रकाश 35 साल से काम कर रहे हैं। वे कहते हैं कि पिछले एक साल से बाइक में फ्यूल फिल्टर और थ्रोटल बॉडी में ज्यादा शिकायतें आ रही हैं। थ्रोटल बॉडी एक्सीलरेटर के मुताबिक इंजन में जाने वाली हवा की मात्रा को कंट्रोल करती है।

मार्केट में अलग-अलग मैकेनिक और डीलर्स से बात करने पर बाइक में आने वाली ये 5 दिक्कतें समझ आईं…

1. कोल्ड स्टार्ट: ऐसी बाइकें जो E20 फ्यूल के लिए नहीं बनी हैं, उन्हें सुबह के वक्त स्टार्ट करने में दिक्कत आ रही है। ठंड के मौसम में परेशानी बढ़ जाती है।

2. रबर और प्लास्टिक पार्ट पर असर: इससे फ्यूल से जुड़े पार्ट्स जैसे- सील, होज और गैस्केट जल्दी खराब हो रहे हैं। E20 फ्यूल को सपोर्ट करने वाली नई बाइक में ये दिक्कतें नहीं आ रहीं।

3 फ्यूल टैंक में नमी और जंग: पिछले एक से डेढ़ साल में देखा गया कि लंबे समय तक बाइक बंद पड़ी रहने पर फ्यूल सिस्टम में जंग लग जाती है। इससे जुड़े पार्ट्स भी खराब हो जाते हैं।

4. माइलेज में कमी: माइलेज में करीब 5-7% की कमी देखी गई।

5. इंजन की परफॉर्मेंस: गाड़ी के पिकअप और थ्रोटल रिस्पॉन्स में फर्क महसूस हो रहा है।

‘माइलेज और इंजन की टेस्टिंग का डेटा तैयार करना जरूरी’

ऑटोमोटिव एक्सपर्ट टूटू धवन कहते हैं, ‘एथेनॉल से लोग गाड़ियों का माइलेज कम होने की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन इसकी सही तरीके से टेस्टिंग नहीं हो रही है। सरकार और एजेंसी को माइलेज की टेस्टिंग करके डेटा पेश करना चाहिए।’

‘एथेनॉल के नमी सोखने से इंजन में कितनी दिक्कत हो रही है, इस पर डिटेल स्टडी की जरूरत है। इंजन के रबर और प्लास्टिक पार्ट पर भी असर होना तय है। पुरानी गाड़ियों के इंजन पर असर होगा, लेकिन ऐसा नहीं है कि गाड़ी 2-3 दिन में ही खराब हो जाए। इसमें वक्त लगेगा।’

पुरानी कार वाले ओनर्स के लिए वे 3 सलाह देते हैं…

1. गाड़ी लंबे वक्त तक खड़ी न रखें, बीच-बीच में चलाते रहें।

2. फ्यूल से जुड़े पार्ट्स को समय-समय पर मॉनीटर करें।

3. पेट्रोल के साथ 0.5% टू-टी ऑयल डालें।

एथेनॉल की वजह से गाड़ियों में आ रही दिक्कतों को लेकर हमने सरकार का पक्ष जानने की कोशिश की। हमने पेट्रोलियम मिनिस्ट्री को सवाल भी भेजे हैं, जिनका जवाब मिलने पर खबर में शामिल करेंगे।

कौन-कौन सी कंपनियां करती हैं लागू?

भारत की तीन बड़ी ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) इसे लागू करती हैं:

1. Indian Oil Corporation Limited (IOCL)

  • भारत की सबसे बड़ी तेल कंपनी

  • पेट्रोल में एथनॉल मिलाने का सबसे बड़ा नेटवर्क

  • रिफाइनरी + डिपो + पंप तक सप्लाई कंट्रोल

2. Bharat Petroleum Corporation Limited (BPCL)

  • देश की दूसरी बड़ी PSU तेल कंपनी

  • रिटेल पेट्रोल पंप और सप्लाई चेन संभालती है

  • एथनॉल ब्लेंडिंग टारगेट फॉलो करती है

3. Hindustan Petroleum Corporation Limited (HPCL)

  • तीसरी प्रमुख सरकारी ऑयल कंपनी

  • रिफाइनरी से लेकर डिस्ट्रीब्यूशन तक काम

  • एथनॉल मिश्रित पेट्रोल सप्लाई करती है

एथनॉल आता कहां से है?

  • शुगर मिल्स (गन्ने से)

  • अनाज आधारित डिस्टिलरी

  • प्राइवेट और सरकारी दोनों सप्लायर्स

1. एक लीटर एथनॉल बनाने में पानी कितना लगता है

एथनॉल मुख्य रूप से गन्ना (मोलासेस) और अनाज (मक्का आदि) से बनाया जाता है। भारत में अधिकतर उत्पादन गन्ना आधारित होता है।

फैक्ट्री स्तर पर पानी की खपत

एक लीटर एथनॉल के उत्पादन में लगभग 8 से 15 लीटर पानी खर्च होता है। यह पानी फर्मेंटेशन, डिस्टिलेशन और कूलिंग जैसी प्रक्रियाओं में उपयोग होता है।

कुल जल-खपत (खेती सहित)

यदि गन्ने की खेती से लेकर प्रोसेसिंग तक पूरा चक्र देखा जाए, तो एक लीटर एथनॉल के लिए लगभग 1000 से 3000 लीटर या उससे अधिक पानी खर्च हो सकता है। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा सिंचाई का होता है।

निष्कर्ष यह है कि वास्तविक जल-खपत का अधिकांश हिस्सा कृषि क्षेत्र में होता है, न कि फैक्ट्री में।

2. एक लीटर एथनॉल बनाने में लागत कितनी होती है

भारत में एथनॉल की कीमत सरकार द्वारा तय की जाती है, जिसे ऑयल मार्केटिंग कंपनियां खरीदती हैं।

मोलासेस आधारित एथनॉल

इसकी लागत लगभग 50 से 60 रुपये प्रति लीटर होती है।

अनाज आधारित एथनॉल

इसकी लागत लगभग 60 से 75 रुपये प्रति लीटर तक होती है।

लागत किन घटकों में आती है

  • कच्चा माल (गन्ना, मोलासेस या मक्का)

  • फर्मेंटेशन प्रक्रिया

  • डिस्टिलेशन प्रक्रिया

  • ऊर्जा (बिजली और भाप)

  • वेस्ट ट्रीटमेंट

  • परिवहन और भंडारण

3. एक लीटर एथनॉल कितने लीटर पेट्रोल में मिलाया जाता है

भारत सरकार ने एथनॉल ब्लेंडिंग का लक्ष्य E20 रखा है, जिसका अर्थ है 20 प्रतिशत एथनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल।

मिश्रण अनुपात

1 लीटर एथनॉल को 4 लीटर पेट्रोल में मिलाया जाता है। इससे कुल 5 लीटर E20 फ्यूल बनता है।

सरल रूप में

  • 1 लीटर एथनॉल + 4 लीटर पेट्रोल = 5 लीटर मिश्रित ईंधन

  • यह मिश्रण 20 प्रतिशत एथनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का होता है

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