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: Delhi Riots Tahir Hussain Case: दिल्ली दंगा के आरोपी की जमानत पर बंट गए सुप्रीम कोर्ट के 2 जज, जानिए किस जस्टिस ने क्या कहा ?

Delhi Riots Tahir Hussain Case: दिल्ली दंगों के आरोपी और विधानसभा चुनाव में एआईएमआईएम उम्मीदवार ताहिर हुसैन की जमानत याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की दो जजों की बेंच आम सहमति नहीं बना पाई।

Delhi Riots Tahir Hussain Case: बुधवार को हुई सुनवाई में जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ताहिर को जमानत देने के पक्ष में थे, जबकि जस्टिस पंकज मित्तल ने याचिका खारिज कर दी। सीजेआई संजीव खन्ना 3 जजों की नई बेंच बनाएंगे। जस्टिस मित्तल ने कहा कि चुनाव लड़ने के लिए अंतरिम जमानत देने से भानुमती का पिटारा खुल जाएगा। चुनाव पूरे साल होते हैं। हर कैदी यह दलील लेकर आएगा कि उसे चुनाव लड़ने के लिए जमानत दी जाए। Delhi Riots Tahir Hussain Case: जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह ने कहा कि आरोपी मार्च 2020 से जेल में है। उसे चुनाव प्रचार के लिए जमानत दी जानी चाहिए। यह जीवन और स्वतंत्रता से जुड़ा मामला है, इसलिए हर दिन सुनवाई हो रही है।

कोर्ट रूम लाइव-

ताहिर हुसैन की जमानत पर जस्टिस मित्तल, जस्टिस अमानुल्लाह ने दलीलें सुनीं। दिल्ली पुलिस की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और ताहिर की ओर से एडवोकेट सिद्धार्थ अग्रवाल पेश हुए।

  • जस्टिल मित्तल: चार्जशीट में ताहिर पर गंभीर आरोप हैं। उसके घर और ऑफिस की छत को दंगों में इस्तेमाल किया गया था। चुनाव के लिए 10-15 दिनों का प्रचार काफी नहीं है। विधानसभा में लंबे समय तक काम करना पड़ता है। जबकि आरोपी 4 सालों से जेल में था। उसे रिहा करने का कोई कारण नहीं है।
  • जस्टिस अमानुल्लाह: आरोप गंभीर और संगीन हैं लेकिन वे केवल आरोप ही हैं। आरोपी ने जेल में करीब 5 साल गुजारे हैं। धारा 482 और 484 BNSS 2023 के तहत 4 फरवरी तक अंतरिम जमानत दी जा सकती है। इसके बाद ताहिर सरेंडर कर देगा।
  • जस्टिस मित्तल: आरोपी को अंतरिम जमानत नहीं दी जा सकती। रिहाई के बाद आरोपी प्रचार करने उस इलाके में जाएगा जहां दंगे हुए और गवाह रहते हैं। उसकी गवाहों से मिलने की संभावना है।
  • एसवी राजू: एक जमानत याचिका दिल्ली हाईकोर्ट में है। ताहिर पहले आम आदमी पार्टी में था और अब AIMIM ने उन्हें टिकट दिया है। चुनाव में प्रचार सिर्फ अंतरिम जमानत लेने का बहाना है। इसके बाद रेपिस्ट भी बेल मांगेंगे।
  • जस्टिस अमानुल्लाह: हाईकोर्ट ने माना कि नामांकन भरने के लिए पैरोल दी जा सकती है। चुनाव आयोग ने भी कहा है कि हुसैन चुनाव के लिए अयोग्य नहीं है।
  • एसवी राजू: उसे नामांकन भरने की परमिशन देने का चुनाव प्रचार करने की अनुमति देने से कोई लेना-देना नहीं है। नामांकन से प्रचार करने का अधिकार नहीं मिलता।
  • एसवी राजू: ताहिर UAPA और मनी लॉन्ड्रिंग में भी आरोपी है। भले ही इस मामले में जमानत मिल जाए लेकिन उसे जेल में ही रहना होगा। क्योंकि UAPA केस में चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत नहीं मिलती है।
  • एडवोकेट सिद्धार्थ: UAPA और PMLA मामलों में नियमित और अंतरिम जमानत की याचिकाएं लंबित हैं। सुप्रीम कोर्ट ने PMLA मामले में CBI केस लंबित होने के बावजूद अरविंद केजरीवाल को जमानत दी है।
  • एसवी राजू: ताहिर के लिए पार्टी प्रचार कर सकती है। हुसैन के एजेंट अभी भी उनके लिए प्रचार कर सकते हैं।
  • जस्टिस अमानुल्लाह: जमानत देने के बाद चुनाव बराबरी का होगा। 5 साल में केस आगे क्यों नहीं बढ़ा है। हम अपनी आंखें बंद नहीं कर सकते।
चुनाव लड़ने के लिए मांगी जमानत 4 साल 9 महीने से जेल में बंद ताहिर हुसैन को ओवैसी की पार्टी AIMIM ने दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए मुस्तफाबाद से उम्मीदवार बनाया है। उसने दिल्ली चुनाव लड़ने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जमानत याचिका दायर की है। Delhi Riots Tahir Hussain Case: इस मामले की 20 जनवरी को सुनवाई भी हुई थी। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जेल में बंद सभी लोगों को चुनाव लड़ने से रोक दिया जाना चाहिए। ताहिर की ओर से पेश हुए वकील सिद्धार्थ अग्रवाल ने कोर्ट से 21 जनवरी को सुनवाई की मांग की थी। तब जस्टिस मित्तल ने कहा था कि अब लोग जेल में बैठकर चुनाव लड़ते हैं। जेल में बैठकर चुनाव जीतना आसान है। इन सभी को चुनाव लड़ने से रोक दिया जाना चाहिए। हाईकोर्ट ने नामांकन के लिए कस्टडी पैरोल दी थी ताहिर पर दिल्ली दंगों के दौरान 25 फरवरी 2020 को आईबी अधिकारी अंकित शर्मा की हत्या का आरोप है। ताहिर ने चुनाव प्रचार के लिए 14 जनवरी से 9 फरवरी तक के लिए हाईकोर्ट से अंतरिम जमानत मांगी थी। 13 जनवरी को हाईकोर्ट ने कहा था कि जेल से भी नामांकन दाखिल किया जा सकता है। इस पर ताहिर की वकील तारा नरूला ने दलील दी कि इंजीनियर राशिद को चुनाव प्रचार के लिए अंतरिम जमानत दी गई थी। उसके खिलाफ आतंकी फंडिंग का मामला भी चल रहा है। ताहिर को एक राष्ट्रीय पार्टी ने उम्मीदवार बनाया है। वह अपनी सारी संपत्ति का ब्योरा देने को तैयार है। उसे अपने लिए प्रस्तावक भी तलाशना है और दिल्ली में चुनाव प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। मामले में ट्रायल शुरू हो चुका है और अब तक 114 गवाहों में से 20 से पूछताछ हो चुकी है। ऐसे में ट्रायल जल्द पूरा होने की उम्मीद नहीं है। ताहिर 4 साल 9 महीने से ज्यादा समय से हिरासत में है। हाईकोर्ट ने 14 जनवरी को ताहिर की कस्टडी पैरोल मंजूर की थी। 16 जनवरी को ताहिर कड़ी सुरक्षा के बीच तिहाड़ जेल से बाहर आया और नामांकन दाखिल करने के बाद वापस जेल चला गया। इसके बाद ताहिर ने जमानत के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। जानें क्या है दिल्ली दंगा 24 फरवरी 2020 को दिल्ली में शुरू हुआ दंगा 25 फरवरी को थम गया। उत्तर पूर्वी दिल्ली में हुए इस दंगे में 53 लोगों की जान चली गई। दिल्ली के जाफराबाद, सीलमपुर, भजनपुरा, ज्योति नगर, करावल नगर, खजूरी खास, गोकुलपुरी, दयालपुर और न्यू उस्मानपुर समेत 11 थानों के इलाकों में दंगाइयों ने खूब उत्पात मचाया। इस दंगे में कुल 520 लोगों पर केस दर्ज किया गया दंगों में लाइसेंसी पिस्तौल के इस्तेमाल का आरोप दिल्ली दंगा मामले में क्राइम ब्रांच ने कड़कड़डूमा कोर्ट में दो चार्जशीट दाखिल की थीं। पहला केस चांद बाग हिंसा से जुड़ा था और दूसरा केस जाफराबाद दंगे से जुड़ा था। चांद बाग हिंसा मामले में पुलिस ने ताहिर हुसैन को मास्टरमाइंड बताया था। ताहिर के अलावा उसके भाई शाह आलम समेत 15 लोगों को आरोपी बनाया गया था। चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने कहा था कि हिंसा के समय ताहिर हुसैन अपने घर की छत पर था और उसकी वजह से ही हिंसा भड़की थी। ताहिर ने दंगों में अपनी लाइसेंसी पिस्तौल का इस्तेमाल किया था। पुलिस के मुताबिक हुसैन ने दंगों से ठीक एक दिन पहले खजूरी खास थाने में जमा अपनी पिस्तौल निकाली थी। जांच के दौरान पुलिस ने पिस्तौल जब्त कर ली थी। Read More- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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