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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा...क्या झुक गई सरकार? : NEET पेपर लीक पर 36 दिन से डटे है प्रदर्शनकारी; जंतर-मंतर पर पुलिस पर पथराव, लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागे

नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली का जंतर-मंतर शनिवार को एक बार फिर जंग का मैदान बन गया। NEET पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर पिछले 36 दिनों से जारी आंदोलन शनिवार दोपहर 1:30 बजे बेहद हिंसक रूप ले बैठा।

प्रदर्शनकारियों के उग्र होने, पथराव और गाड़ियों में तोड़फोड़ के बाद हुए भीषण लाठीचार्ज के बीच आखिरकार बड़ी खबर आई— शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।

शनिवार दोपहर 1:30 बजे कैसे भड़की हिंसा?

शनिवार दोपहर जंतर-मंतर पर LIC बिल्डिंग के पास माहौल अचानक तनावपूर्ण हो गया।

पथराव और तोड़फोड़: प्रदर्शनकारियों ने अचानक पुलिस टीम पर पत्थरों से हमला बोल दिया और सड़क पर खड़ी गाड़ियों में जमकर तोड़फोड़ की।

पुलिस का एक्शन: भीड़ को बेकाबू होते देख पुलिस ने पहले चेतावनी दी, फिर आंसू गैस के गोले दागे और जमकर लाठीचार्ज किया।

कई घायल: इस हिंसक झड़प में कई पुलिसकर्मियों के सिर और हाथ-पैर में चोटें आई हैं, वहीं कई प्रदर्शनकारी भी घायल हुए हैं।

'प्रधान के इस्तीफे से कम कुछ मंजूर नहीं' — CJP का सख्त रुख

प्रदर्शन की अगुवाई कर रही कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने शनिवार को दोटूक शब्दों में कह दिया था कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक सरकार से किसी भी तरह की वार्ता का कोई मतलब नहीं है।

आंदोलनकारियों का रुख

"NEET पेपर लीक से देश के लाखों युवाओं का भविष्य बर्बाद हुआ है। इसके लिए सीधे तौर पर शिक्षा मंत्री जिम्मेदार हैं। इस्तीफे से कम पर आंदोलन खत्म होने का सवाल ही नहीं उठता।"

6 दिनों में तीसरी बार लाठीचार्ज, भड़का हुआ था गुस्सा

जंतर-मंतर पर शनिवार को हुआ यह बवाल पिछले एक हफ्ते से उबल रहे आक्रोश का नतीजा था:

20 जुलाई: CJP के संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारी भिड़े।

21 जुलाई रात: संसद मार्ग पर पुलिस ने फिर लाठीचार्ज किया।

25 जुलाई (शनिवार): LIC बिल्डिंग के पास हिंसक झड़प और पथराव।

इन तीन झड़ों में अब तक 100 से ज्यादा प्रदर्शनकारी और पुलिस के जवान घायल हो चुके हैं। फिलहाल धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई है और पूरे इलाके को छावनी में बदल दिया गया है।

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