IGNTU में भूख से जंग, न्याय की उम्मीद : 7 दिन से भूख हड़ताल पर छात्र वास्को, प्रशासन की खामोशी से सुलग रहा है कैंपस, क्या जनजातीय विश्वविद्यालय में ही असुरक्षित
मध्य प्रदेश के अमरकंटक स्थित इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय (IGNTU) में पिछले एक हफ्ते से माहौल तनावपूर्ण है। B.Voc छठे सेमेस्टर के छात्र वास्को अपनी मांगों को लेकर पिछले 7 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं।
सात रातों से खुले आसमान के नीचे धरने पर बैठे वास्को का शरीर अब जवाब देने लगा है, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन की 'चुप्पी' ने छात्रों के आक्रोश को और भड़का दिया है।

शिक्षा के मंदिर में सामाजिक न्याय पर सवाल
यह मामला केवल एक छात्र के व्यक्तिगत विरोध का नहीं है, बल्कि यह उन बुनियादी सवालों से जुड़ा है जिनके लिए इस केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना की गई थी। वास्को और उनका समर्थन कर रहे छात्रों का आरोप है कि परिसर में समानता और सम्मान के संवैधानिक मूल्यों की अनदेखी की जा रही है।
सात दिन बीत जाने के बाद भी कुलपति या किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का वास्को से संवाद न करना प्रशासन की संवेदनशीलता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कमजोर होती काया, मजबूत होती आवाज
भूख हड़ताल के कारण वास्को की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। साथी छात्रों के मुताबिक "वास्को का वजन तेजी से गिरा है और उन्हें कमजोरी महसूस हो रही है, लेकिन वे किसी भी चिकित्सीय सहायता को लेने से पहले अपनी मांगों पर लिखित आश्वासन चाहते हैं।"

आंदोलन का व्यापक असर
वास्को का यह धरना अब एक 'जन-आंदोलन' की शक्ल ले चुका है। सोशल मीडिया से लेकर कैंपस की गलियों तक, छात्र सामाजिक न्याय और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। इस मामले ने उन चुनौतियों को फिर से सतह पर ला दिया है, जिनका सामना अक्सर दूर-दराज के जनजातीय क्षेत्रों से आने वाले छात्र उच्च शिक्षा संस्थानों में करते हैं।
आखिर मांगें क्या हैं? (प्रमुख बिंदु)
समान अवसर: शैक्षणिक और प्रशासनिक गतिविधियों में सभी वर्गों को समान सम्मान और भागीदारी।
जवाबदेही: छात्रों के साथ होने वाले भेदभावपूर्ण व्यवहार पर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई।
पारदर्शिता: विश्वविद्यालय के निर्णयों और छात्र कल्याण से जुड़ी योजनाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना।
जातिगत भेदभाव का आरोप, SC/ST सेल को भी भेजी गई शिकायत
दलित वर्ग से आने वाले पीड़ित छात्र ने आशंका जताई है कि उसकी सामाजिक पृष्ठभूमि के कारण उसे सुनियोजित तरीके से निशाना बनाया जा रहा है। छात्र का कहना है कि यह मामला केवल व्यक्तिगत प्रताड़ना तक सीमित नहीं है, बल्कि संवैधानिक मूल्यों और सामाजिक न्याय की भावना पर सीधा हमला है।
शिकायत में प्रोफेसर विकास सिंह पर भी छात्र के खिलाफ कथित रूप से भ्रामक पीडीएफ दस्तावेज वायरल करने और गंभीर, निराधार आरोप लगाने की बात कही गई है। छात्र का दावा है कि उसके पास इन गतिविधियों से जुड़े ठोस डिजिटल साक्ष्य मौजूद हैं।
इस पूरे मामले की गंभीरता को देखते हुए छात्र ने शिकायत की प्रतिलिपि डीन स्टूडेंट वेलफेयर, डीन अकादमिक तथा विश्वविद्यालय के एससी/एसटी सेल को भी भेजी है।
छात्र की प्रमुख मांगें:
– गौरव सिंह की नियुक्ति एवं अधिकारिक स्थिति तत्काल सार्वजनिक की जाए।
– उन्हें सभी छात्र समूहों के एडमिन पद से हटाया जाए।
– पूरे मामले की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
– दोषियों पर कड़ी अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।
– छात्र को पुनः सभी आधिकारिक शैक्षणिक गतिविधियों और समूहों में शामिल किया जाए।
– जातिगत भेदभाव एवं मानसिक उत्पीड़न की स्वतंत्र जांच कर न्याय सुनिश्चित किया जाए।
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