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: तीन दशक बाद नक्सल इलाके में लौटेगी रौनक : छत्तीसगढ़ में जिन गांव छोड़कर चले गए थे लोग, वहां बनेगी डबल लेन सड़क

News Desk / Sun, Feb 12, 2023


बीजापुर में बासागुड़ा-तर्रेम सिंगल लेन सड़क बन चुकी है।

बीजापुर में बासागुड़ा-तर्रेम सिंगल लेन सड़क बन चुकी है। - फोटो : संवाद

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छत्तीसगढ़ के बीजापुर का नक्सल प्रभावित इलाका तीन दशक बाद फिर से गुलजार होने लगा है। कभी नक्सलियों के डर से यहां के गांवों को छोड़कर लोग दूसरी जगह बस गए थे। जिन बासागुड़ा-तर्रेम के रास्तों पर बसें दौड़ा करती थीं, नक्सलियों ने उन्हें क्षतिग्रस्त कर पूरी तरह से बंद कर दिया था। अब वहां सुरक्षाबलों ने कब्जा जमा लिया है। एक बार फिर से सड़कों का निर्माण शुरू हुआ है। इस सड़क को डबल लेन बनाने के लिए केंद्रीय सड़क एवं परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने करीब ढाई सौ करोड़ की राशि स्वीकृत की है।

केंद्रीय मंत्री ने ट्वीट कर दी जानकारी
इस सड़क के बन जाने से क्षेत्र में शिक्षा, स्वास्थ्य, सार्वजनिक वितरण प्रणाली का राशन, पेयजल, बिजली जैसी मूलभूत सुविधाओें को पहुंचाने के लिए आसानी होगी। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को ट्वीट कर खुद इसकी जानकारी दी है। उन्होंने लिखा है कि छत्तीसगढ़ राज्य के बीजापुर-आवापल्ली-बासागुड़ा-जगरगुंडा मार्ग के डबल लेन सड़क और पुल पुलिया निर्माण के लिए एलडबल्यूई योजना के तहत 240.99 करोड़ रुपए लागत की साथ स्वीकृति दी गई है। 


 

80 के दशक में चला करती थीं बसें, नक्सलियों के डर से सब बंद
अविभाजित मध्यप्रदेश के दौरान 80 के दशक में बीजापुर से बासागुड़ा-जगरगुंडा होकर दोरनापाल तक इस मार्ग पर बसें चला करती थीं। बासागुड़ा और जगरगुंडा का बाजार गुलजार रहता था। लाल आतंक के चलते बाद में बसें बंद हो गईं और नक्सलियों ने इस सड़क को जगह-जगह काट दिया। पुल-पुलिया को क्षतिग्रस्त कर दिया था। नक्सलियों के डर से कई ग्रामीण अपने गांव छोड़कर चले गए थे। अब सुरक्षा बलों की कड़ी सुरक्षा और सक्रिय सहभागिता से बासागुड़ा-तर्रेम सिंगल लेन सड़क बन चुकी है।


फिर से लौटने लगे हैं ग्रामीण
बासागुड़ा के ग्रामीण बताते हैं कि अविभाजित बस्तर जिले के दौरान यह क्षेत्र समृद्ध था। वनोपज-काष्ठ का समुचित दोहन हो रहा था। किसान अच्छी खेती-किसानी करते थे, वहीं ग्रामीण संग्राहक वनोपज का संग्रहण कर स्थानीय बासागुड़ा बाजार में विक्रय करते थे। आज से करीब 20 साल पहले लाल आतंक के चलते सड़क बंद हो गई और गांव के गांव वीरान हो गए थे। अब शासन-प्रशासन के संकल्प से बासागुड़ा-तर्रेम पक्की सड़क का सपना साकार हो गया है। सड़क बन जाने के बाद अब इस क्षेत्र में शांति और अमन-चैन की आस लेकर किसान और ग्रामीण फिर से लौटने लगे हैं। 

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