: नकली नोटों की फैक्ट्री का खुलासा: MP में किराना व्यापारी के साथ मिलकर नोट छाप रहा था चौकीदार, जल्द अमीर बनने की चाहत में पहुंचे जेल
MP CG Times / Sat, Oct 19, 2024
Madhya Pradesh Ujjain Fake note factory exposed: मध्य प्रदेश के उज्जैन में एक फैक्ट्री से नकली नोट छापने का मामला सामने आया है. यहां चौकीदार एक किराना व्यवसायी की मदद से 100-100 के नोट बना रहा था. यह घटना चिमनगंज थाना क्षेत्र में हुई. जानकारी के मुताबिक, मध्य प्रदेश के उज्जैन में पुलिस ने 100 रुपये के नकली नोट छापने वाली फैक्ट्री पर छापा मारा है.
इस दौरान पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें से एक चौकीदार और दूसरा किराना व्यवसायी है. पुलिस ने मौके से प्रिंटर, स्कैनर और कंप्यूटर समेत अन्य सामान भी जब्त किया है. आरोपी भेरूसिंह गजरी इलाके में चौकीदार है, जबकि रामनरेश चौहान कनीपुरा में किराना व्यवसायी है. दोनों ने एक दुकान से कलर प्रिंटर खरीदा और ए-4 साइज के कागज पर 100 रुपये के नकली नोट छापे. पुलिस द्वारा सख्ती से पूछताछ में उन्होंने नकली नोट छापने की पूरी कहानी बता दी.
11 हजार के नकली नोट जब्त
पुलिस ने अब तक आरोपियों से 11 हजार रुपए के नकली नोट, कलर प्रिंटर और नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला कागज जब्त किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने प्रिंटर देवास के पिंटू मालवीय को बेचा था। उसे भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
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एक ही सीरियल नंबर वाले नोट
पुलिस के मुताबिक आरोपी बहुत कम पढ़े-लिखे हैं। भेरूसिंह सिर्फ 8वीं तक पढ़ा है। रामनरेश भी ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है। आरोपियों ने 100 रुपए के नोट को स्कैन कर इमेज तैयार की और फिर प्रिंटर की मदद से ए-4 प्लेन पेपर पर छापना शुरू कर दिया। वे एक ही सीरियल नंबर वाले नोट छाप रहे थे।
जल्दी अमीर बनने की चाहत में गए जेल
पुलिस के मुताबिक आरोपी भेरूसिंह और रामनरेश नकली नोटों से छोटी-मोटी खरीदारी करते थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि 200 और 500 रुपए के बड़े नोटों को चलाना मुश्किल था। इसके चलते उन्होंने 200 और 500 के नोट नहीं छापे।जल्दी अमीर बनने की चाहत में आरोपियों ने नकली नोट छापना शुरू कर दिया।
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11 हजार के नकली नोट जब्त
पुलिस ने अब तक आरोपियों से 11 हजार रुपए के नकली नोट, कलर प्रिंटर और नोट छापने में इस्तेमाल होने वाला कागज जब्त किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपियों ने प्रिंटर देवास के पिंटू मालवीय को बेचा था। उसे भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।
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एक ही सीरियल नंबर वाले नोट
पुलिस के मुताबिक आरोपी बहुत कम पढ़े-लिखे हैं। भेरूसिंह सिर्फ 8वीं तक पढ़ा है। रामनरेश भी ज्यादा पढ़ा-लिखा नहीं है। आरोपियों ने 100 रुपए के नोट को स्कैन कर इमेज तैयार की और फिर प्रिंटर की मदद से ए-4 प्लेन पेपर पर छापना शुरू कर दिया। वे एक ही सीरियल नंबर वाले नोट छाप रहे थे।
जल्दी अमीर बनने की चाहत में गए जेल
पुलिस के मुताबिक आरोपी भेरूसिंह और रामनरेश नकली नोटों से छोटी-मोटी खरीदारी करते थे। उन्होंने पुलिस को बताया कि 200 और 500 रुपए के बड़े नोटों को चलाना मुश्किल था। इसके चलते उन्होंने 200 और 500 के नोट नहीं छापे।जल्दी अमीर बनने की चाहत में आरोपियों ने नकली नोट छापना शुरू कर दिया।
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