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शहडोल में आसमान से बरसी 'मौत' : महुआ की डोरी बीनते समय गिरी आकाशीय बिजली, बुआ और 8 साल की मासूम भतीजी की मौके पर ही थमी सांसें

मध्यप्रदेश के शहडोल जिले से कुदरत के कहर की एक बेहद दर्दनाक और विचलित कर देने वाली खबर सामने आई है। पपौंध थाना क्षेत्र के ओदारी गांव में आकाशीय बिजली (गाज) गिरने से बुआ और उसकी सगी 8 वर्षीय मासूम भतीजी की मौके पर ही तड़पकर मौत हो गई।

यह हृदयविदारक हादसा उस समय हुआ जब दोनों गांव के पास ही एक पेड़ के नीचे काम कर रही थीं। इस आकाशीय हादसे में एक अन्य महिला भी गंभीर रूप से झुलस गई है, जिसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

महुआ पेड़ के नीचे बीन रही थीं डोरी, तभी काल बनकर गिरी 'बिजली'

पपौंध पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के अनुसार, ओदारी गांव की रहने वाली इत्तोबाई (50 वर्ष) और उनकी 8 साल की मासूम भतीजी सफीना सिंह शनिवार को अपने घर से करीब एक किलोमीटर दूर खेत-जंगल की तरफ गई थीं। दोनों वहां एक बड़े महुआ के पेड़ के नीचे गिर रही 'डोरी' (महुआ का फल/बीज) बीन रही थीं।

इसी दौरान अचानक मौसम का मिजाज बदल गया। आसमान में काले बादल छा गए और तेज आंधी के साथ कड़कड़ाहट शुरू हो गई। इससे पहले कि दोनों संभल पातीं या छिपने की जगह ढूंढतीं, कड़कड़ाती हुई आकाशीय बिजली सीधे उनके ऊपर आ गिरी।

मासूम सफीना और इत्तोबाई की मौके पर मौत

आसमान से गिरी इस प्राकृतिक बिजली का झटका इतना भीषण था कि 50 साल की इत्तोबाई और महज 8 साल की बच्ची सफीना सिंह ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। उनके जिस्म बुरी तरह झुलस गए थे। वहीं, उनके साथ डोरी बीन रही एक अन्य स्थानीय महिला को भी बिजली का जोरदार झटका लगा, जिससे वह अचेत होकर वहीं गिर पड़ी। दूर खेतों में काम कर रहे ग्रामीणों ने जब आसमान से धुआं उठते और चीख-पुकार सुनी, तो वे तुरंत मौके पर दौड़े और घटना की सूचना पुलिस व परिजनों को दी।

शवों को पीएम के लिए भेजा, अस्पताल में घायल का इलाज जारी

हृदयविदारक हादसे की सूचना मिलते ही पपौंध थाना प्रभारी बृजेंद्र मिश्रा पुलिस बल के साथ तत्काल घटना स्थल पर पहुंचे। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से गंभीर रूप से झुलसी महिला को तुरंत नजदीकी शासकीय अस्पताल भिजवाया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज जारी है। पुलिस ने दोनों मृतकों के शवों का पंचनामा तैयार कर उन्हें पोस्टमार्टम (Post Mortem) के लिए भेज दिया है।

थाना प्रभारी बृजेंद्र मिश्रा ने बताया कि इस दुखद मामले में मर्ग कायम कर आगे की वैधानिक जांच की जा रही है और प्राथमिक रूप से मौत का कारण आकाशीय बिजली की चपेट में आना ही है।

प्रशासन की अपील (सावधानी ही बचाव है)

जब भी मौसम खराब हो, आसमान में बादल गरज रहे हों या बिजली चमक रही हो, तो भूलकर भी खुले मैदानों, खेतों, तालाबों के किनारे या बड़े पेड़ों के नीचे शरण न लें। ऐसे समय में पक्के मकानों या सुरक्षित इमारतों के अंदर चले जाना ही जान बचा सकता है।

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