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करंट से तेंदुए को तड़पा-तड़पाकर मार डाला : अनूपपुर में वन विभाग के खोदे गड्ढे में फेंका शव, जंगल में छिपाए सबूत, जानिए कौन हैं कातिल ?

शिवम साहू, अनूपपुर। मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के जैतहरी वन परिक्षेत्र (Jaithari Forest Range) में वन्यजीव अपराध का एक गंभीर मामला सामने आया है, जहां तेंदुए (Leopard Death Case) की करंट की चपेट में आने से मौके पर ही मौत हो गई। यह घटना Wildlife Crime in Madhya Pradesh की एक और भयावह कड़ी बनकर सामने आई है। तेंदुए की संदिग्ध मौत की जानकारी मिलते ही Forest Department Anuppur ने मामले को गंभीरता से लेते हुए तत्काल जांच शुरू कर दी।

वन विभाग द्वारा गठित विशेष Investigation Team ने तेंदुए की मौत को लेकर हर पहलू की जांच की। शुरुआती जांच में यह स्पष्ट हुआ कि मामला Illegal Hunting और Poaching Network से जुड़ा हो सकता है। इसके बाद शहडोल से Dog Squad Shahdol को बुलाया गया, जिसकी मदद से जंगल क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों और आरोपियों की तलाश की गई।

डॉग स्क्वाड की सहायता और तकनीकी जांच के दौरान कुछ संदिग्धों को चिन्हित कर उनसे गहन पूछताछ की गई। पूछताछ के दौरान संदिग्धों ने अपराध में शामिल अन्य लोगों के नाम उजागर किए। इसके बाद Forest Department Raid के तहत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी के बाद जब उनसे सख्ती से पूछताछ की गई, तो सभी आरोपियों ने Leopard Poaching Case में अपनी संलिप्तता स्वीकार कर ली।

गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सूरज भारिया (21 वर्ष), नोहर कोल (25 वर्ष), सुखलाल भैना (32 वर्ष) और हीरालाल कोल (38 वर्ष) के रूप में हुई है। सभी आरोपी जैतहरी वार्ड क्रमांक 15 (Jaithari Ward No. 15) के निवासी बताए जा रहे हैं। आरोपियों ने स्वीकार किया कि वे सभी मिलकर Wild Boar Hunting के उद्देश्य से जंगल में तार लगाकर करंट फैलाए थे।

पूछताछ में यह भी सामने आया कि इसी दौरान एक Leopard उस करंट लगे तार की चपेट में आ गया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। तेंदुए की मौत के बाद आरोपी घबरा गए और Evidence Destruction की नीयत से तेंदुए के शव को घसीटकर वन विभाग द्वारा पहले से खोदे गए एक गड्ढे में फेंक दिया। इतना ही नहीं, उन्होंने Electric Wire, Bamboo Stakes और Other Hunting Equipment को भी नदी के उस पार जंगल में छिपा दिया।

वन विभाग की टीम ने सभी आरोपियों को साथ लेकर Spot Verification कराई, जहां घटना स्थल और सामान छिपाने के स्थान की शिनाख्त करवाई गई। इसके बाद मौके से सभी आपत्तिजनक सामान की Seizure Memo के तहत जब्ती की गई और विधिवत Spot Panchnama तैयार किया गया।

जांच पूरी होने के बाद सभी आरोपियों के खिलाफ Forest Offence No. 4795/5 के तहत मामला दर्ज किया गया। आरोपियों पर Wildlife Protection Act 1972 की धारा 2(16)(a)(b), 9, 39, 50, 51 और 52 के अंतर्गत गंभीर अपराध पंजीबद्ध किए गए। यह मामला Leopard Protection Law India के तहत अत्यंत संवेदनशील माना जा रहा है।

विवेचना पूरी होने के बाद चारों आरोपियों को Judicial Custody में District Court Anuppur में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उन्हें District Jail Anuppur भेजने के आदेश दिए। इस कार्रवाई को वन विभाग द्वारा Anti-Poaching Operation के तहत एक बड़ी सफलता माना जा रहा है।

वन विभाग के अधिकारियों का कहना है कि Wildlife Crime Control को लेकर आगे भी सख्त निगरानी और कार्रवाई जारी रहेगी, ताकि Endangered Species Protection सुनिश्चित की जा सके। तेंदुए जैसे संरक्षित वन्यजीवों के शिकार पर किसी भी तरह की लापरवाही या अपराध को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

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