गरियाबंद में सड़क के गड्ढों में बोया धान और बेशरम का पौधा : 68 लाख की PM सड़क 1 साल में ही उखड़ी, अफसरों ने झाड़ा पल्ला तो भड़के 7 गांवों के लोग
गिरीश जगत। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के आदिवासी बहुल मैनपुर विकासखंड में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (PMGSY) में हुए भ्रष्टाचार की पोल खोलती एक अनोखी तस्वीर सामने आई है। 68 लाख रुपये की लागत से बनी सड़क के घटिया निर्माण और अफसरों की अनदेखी से तंग आकर सैकड़ों ग्रामीणों का गुस्सा फूट पड़ा।
ग्राम गौरघाट, देहारगुड़ा, गिरहोला, आमागुड़ा, सिंहार और रामपारा के ग्रामीणों ने रैली निकालकर शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की और विरोध का अनोखा तरीका अपनाते हुए सड़क के लबालब भरे गड्ढों में धान की रोपाई कर दी। साथ ही अफसरों की कार्यशैली पर तंज कसते हुए गड्ढों में 'बेशरम के पौधे' भी रोप दिए।

2018 में शुरू हुआ था काम, उखड़ गई सड़क तो अफसरों ने दिया बेशरम तर्क
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार की कहानी निर्माण के पहले दिन से ही लिखी जा रही थी। सड़क का निर्माण कार्य 2018 में शुरू हुआ था, जिसे पूरा होने में ही 3 साल लग गए।
निर्माण पूरा होने के महज 1 साल के भीतर ही डामर बह गया और सड़क बड़े-बड़े जानलेवा गड्ढों में तब्दील हो गई।
जब ग्रामीणों ने शुरुआती साल में शिकायत की तो सिर्फ आश्वासन मिला। अब जब सड़क पूरी तरह गायब हो चुकी है, तो PMGSY के अफसर यह बेतुका तर्क दे रहे हैं कि "सड़क निर्माण की 5 साल की गारंटी अवधि अब बीत चुकी है।" ग्रामीणों का सवाल है कि जब गारंटी पीरियड के दौरान ही शिकायत की गई थी, तब अफसरों ने ठेकेदार से मेंटेनेंस क्यों नहीं कराया?

दजनभर स्कूलों के हजारों बच्चे परेशान, अफसरों ने साधी चुप्पी
इस बदहाल सड़क का खामियाजा 7 से ज्यादा गांवों (गौरघाट, देहारगुड़ा, खामभाठा, गिरहोला, अचानपुर, सिंहार, रामपारा) के हजारों ग्रामीणों और रोजाना आवाजाही करने वाले मासूम स्कूली बच्चों को भुगतना पड़ रहा है।
मार्ग पर एक दर्जन से अधिक स्कूल स्थित हैं। सड़क पर बने 2-2 फीट गहरे गड्ढों के कारण आए दिन छात्र और ग्रामीण दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं।
जब इस भ्रष्टाचार और ग्रामीणों के भारी आक्रोश को लेकर संबंधित विभाग के अधिकारियों से जवाब मांगा गया, तो अफसरों ने मीडिया के सामने चुप्पी साध ली।
चक्काजाम और उग्र आंदोलन की चेतावनी
अनोखा प्रदर्शन कर रहे ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन को अंतिम अल्टीमेटम दिया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द से जल्द जर्जर सड़क की जांच कर इसका नया निर्माण और री-कार्पेटिंग शुरू नहीं की गई, तो वे मुख्य मार्ग पर बैठकर अनिश्चितकालीन चक्काजाम और उग्र आंदोलन करने को मजबूर होंगे।
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