मोदी जी हम लालटेन के सहारे कब तक रहेंगे ? : गरियाबंद में 79 साल से अंधेरे में 48 गांव, डस्टबीन में अर्जी फेंक देते हैं अधिकारी, अब PM को खून से लेटर लिखेंगे आदिवासी
MP CG Times / Sun, Jun 7, 2026
गरियाबंद। "जब हर दरवाजा खटखटाने के बाद भी रोशनी नहीं मिली, तो अब अपने खून से गुहार लगाएंगे।" छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के सुदूर वनांचल राजापड़ाव क्षेत्र से यह आवाज उठी है। आजादी के 79 साल बाद भी बिजली, सड़क, स्वास्थ्य और शुद्ध पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हजारों आदिवासियों ने आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर दिया है।
ग्रामीणों ने फैसला लिया है कि 10 जून को ग्राम अड़गडी में हजारों लोग एकत्र होकर अपने खून से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखेंगे और क्षेत्र में बिजली की व्यवस्था कराने की मांग करेंगे। रविवार को ग्राम गोना में किसान संघर्ष समिति और जय अंबेडकरवादी युवा संगठन राजापड़ाव क्षेत्र के बैनर तले विशाल बैठक आयोजित की गई।
बैठक में क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, बुजुर्गों और युवाओं ने हिस्सा लिया। सर्वसम्मति से तय किया गया कि अब केवल ज्ञापन और धरना-प्रदर्शन नहीं, बल्कि एक प्रतीकात्मक और बड़ा जन आंदोलन किया जाएगा।

79 साल बाद भी अंधेरे में जिंदगी
राजापड़ाव क्षेत्र उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के बफर जोन में स्थित है। इस क्षेत्र के अंतर्गत 8 ग्राम पंचायतें और 48 गांव, पारा और टोले आते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि आजादी के लगभग आठ दशक बाद भी यहां के लोगों को मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।
बैठक में बताया गया कि क्षेत्र की केवल तीन ग्राम पंचायतों के मुख्य गांवों तक ही किसी तरह बिजली पहुंची है, लेकिन वहां भी कई पारा और टोले अब तक अंधेरे में हैं। दूसरी ओर, पांच ग्राम पंचायतों में आज तक बिजली नहीं पहुंच पाई है। शाम ढलते ही हजारों लोगों की जिंदगी लालटेन और ढिबरी के सहारे गुजरती है।
ग्रामीणों का कहना है कि बिजली के साथ-साथ सड़क, पुल-पुलिया, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, शुद्ध पेयजल, सामुदायिक वन संसाधन और व्यक्तिगत वन अधिकार पट्टों जैसी कई समस्याएं वर्षों से जस की तस बनी हुई हैं।

NOC का हवाला, इसलिए PM से सीधी गुहार
बैठक में ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जब भी बिजली विस्तार की मांग उठाई जाती है, तो उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और NTCA की अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) का हवाला देकर मामला टाल दिया जाता है। अधिकारियों की ओर से यह कहा जाता है कि इस मामले में केंद्र सरकार स्तर पर निर्णय होना है।
इसी वजह से क्षेत्रवासियों ने अब सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक अपनी बात पहुंचाने का फैसला लिया है। 10 जून को ग्राम अड़गडी में आयोजित होने वाली महा बैठक में हजारों लोग अपने खून से प्रधानमंत्री के नाम पत्र लिखेंगे। इस पत्र के माध्यम से वे क्षेत्र की पांच पंचायतों और पारा-टोलों में बिजली उपलब्ध कराने की मांग करेंगे।
ग्राम सभा शिलालेख बनेगा, PESA अधिकारों का होगा प्रतीक
बैठक में एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया। ग्रामीणों ने तय किया कि 10 जून को राजापड़ाव क्षेत्र में ग्राम सभा शिलालेख की स्थापना भी की जाएगी। यह शिलालेख पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों तक विस्तार) अधिनियम यानी PESA कानून के तहत ग्राम सभा के अधिकारों का प्रतीक होगा।
इसके लिए प्रत्येक गांव से 20 रुपये की सहयोग राशि एकत्र की जा रही है, ताकि सामूहिक भागीदारी के साथ इस पहल को पूरा किया जा सके।
17 सूत्रीय मांगों को लेकर SDM को सौंपेंगे ज्ञापन
ग्रामीणों ने बताया कि 29 मई को ग्राम गोना में आयोजित सुशासन तिहार कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र की 17 प्रमुख समस्याओं को सरकार के सामने रखा गया था। अब इन मांगों को समय-सीमा में पूरा कराने के लिए 8 जून को मैनपुर SDM को 17 सूत्रीय मांगपत्र सौंपा जाएगा।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन और सरकार ने उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया, तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा।
नारों से गूंजा गोना गांव
बैठक के दौरान ग्रामीणों ने अपने अधिकारों को लेकर जोरदार नारेबाजी की। "जल-जंगल-जमीन हमारा है", "बिजली-पानी अधिकार हमारा है" और "79 साल का अंधेरा अब नहीं सहेंगे" जैसे नारों से पूरा गांव गूंज उठा।
बैठक में बड़ी संख्या में बुजुर्ग मुखिया, महिलाएं और युवा शामिल हुए। सभी ने क्षेत्र के विकास और बुनियादी सुविधाओं के लिए एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया।
आयोजकों ने क्या कहा?
जय अंबेडकरवादी युवा संगठन राजापड़ाव क्षेत्र के पदाधिकारियों ने कहा कि क्षेत्र के लोगों ने वर्षों से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज उठाई है। हमने धरना दिया, प्रदर्शन किए, आवेदन सौंपे, पदयात्रा निकाली और जन संवाद भी किया, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया।
आज भी हजारों आदिवासी परिवार लालटेन युग में जी रहे हैं। जब अधिकारी कहते हैं कि प्रधानमंत्री ही इस समस्या का समाधान कर सकते हैं, तो अब हम सीधे प्रधानमंत्री से ही अपने खून से चिट्ठी लिखकर बिजली की मांग करेंगे। 10 जून को पूरा देश आदिवासी समाज का दर्द देखेगा।"
कई जनप्रतिनिधि और सामाजिक कार्यकर्ता रहे मौजूद
बैठक में जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम, जय अंबेडकरवादी युवा संगठन के अध्यक्ष पतंग मरकाम, जनपद सदस्य फूलचंद मरकाम, सर्व आदिवासी समाज के अध्यक्ष सुनील मरकाम, सरपंच घनश्याम मरकाम, दीनाचंद मरकाम, शंकर लाल नेताम, नरेश नेताम, पूर्व सरपंच अजय नेताम सहित क्षेत्र के अनेक जनप्रतिनिधि और सैकड़ों ग्रामीण मौजूद रहे।
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