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: रायपुर में वेंटिलेटर पर अस्पताल या मरीज ? अंबेडकर और DKS में 245 वेंटिलेटर, सिर्फ 98 ही चालू, मेंटेनेंस के पैसे नहीं, वेटिंग में मरीज

DKS Super Specialty and Ambedkar Hospital Story: डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल। शाम के 6 बजे। इमरजेंसी वार्ड के बाहर लगी कुर्सियां फुल हैं। कोई सिर झुकाए बैठा है तो कोई अपने रिश्तेदार से बातें कर रहा है। सभी के चेहरे पर तनाव, क्योंकि उनका कोई न कोई करीबी रिश्तेदार इमरजेंसी वार्ड में वेंटिलेटर पर है।

किसी को यहां बैठे दो दिन हो गए तो किसी की पूरी रात कुर्सी पर ही गुजर गई। सभी को इंतजार में हैं कि आईसीसीयू में वेंटिलेटर बेड खाली होने का... क्योंकि तभी उनके मरीज को इमरजेंसी वार्ड से शिफ्ट किया जाएगा। अभी आईसीसीयू में वेंटिलेटर खाली नहीं है, इस वजह से यहां इमरजेंसी वार्ड में रखकर इंतजार किया जा रहा है। अंबेडकर अस्पताल में भी यही स्थिति डीकेएस ही नहीं कई बार अंबेडकर अस्पताल में भी यही स्थिति पैदा हो जाती है। ऐसा क्यों? पड़ताल करने पर पता चला अंबेडकर अस्पताल के 184 वेंटिलेटर में 59 ही चालू हैं, यही स्थिति डीकेएस की है यहां 61 में 39 ही चल रहे हैं। बंद वेंटिलेटर को सुधारने कहीं पैसे नहीं तो कहीं कंपनी सुधारने नहीं आ रही। ये स्थिति लगभग एक डेढ़ साल से है। एक-एक कर वेंटिलेटर बंद होते गए और मरीजों की दिक्कत शुरू होती गई। इसके बावजूद यहां वेंटिलेटर एक-एक कर बंद होते गए लेकिन सुधारा नहीं गया। ICCU में इसलिए शिफ्ट करना जरूरी 6 घंटों को गोल्डर ऑवर ऑफ लाइफ कहा जाता है। इस वजह से मरीजों को इमरजेंसी वार्ड में रखकर जीवन बचाने के प्रयास किए जाते हैं। आईसीसीयू में मरीज को स्टेबल रखने के साथ इलाज किया जाता है। इमरजेंसी में 12 वेंटिलेटर, ये भी फुल, लौटा दिए जाते हैं मरीज डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में 12 वेंटिलेटर बेड इमरजेंसी वार्ड में हैं। सभी हमेशा फुल रहते हैं। भास्कर ने तीन दिनों तक अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड का सर्वे किया। इस दौरान हमेशा वहां के वेंटिलेटर बेड फुल मिले। यानी यहां भी बेड खाली होने पर ही मरीजों को भर्ती किया जाता है। इमरजेंसी वार्ड के वेंटिलेटर फुल रहने पर जब नए गंभीर मरीज आते हैं तो कई बार उन्हें लौटा दिया जाता है। तीन दिन पहले अंबेडकर के अधीक्षक ने खुद डीकेएस जिम्मेदारों को फोन कर पूछा था कि यहां ब्रेन हेमरेज के मरीजों को भी क्यों रिफर किया जा रहा है। केस-1 आईसीसीयू ले गए थे, लौट आए डीकेएस में इमरजेंसी वार्ड के बाहर कुर्सी में परेशान हाल बैठे एक युवक ने बताया कि हम पखांजूर से आए हैं। 17 साल का बेटा है सड़क हादसे में घायल हो गया। कल सुबह लाया गया था। दिन यहीं गुजरा। रात को कहा गया आईसीसीयू चलो, बेड खाली हो गया है। वहां मरीज को लेकर गए तो पता चला एक भी बेड खाली नहीं है। फिर वापस यहीं ले लाए। दूसरा दिन है, यहीं बैठकर इंतजार कर रहे हैं। केस- 2 बेड खाली होने पर ले जाएंगे गिरौदपुरी से आए शिव प्रसाद को ब्रेन हैमरेज हो गया है। खेत में काम करते-करते अचानक बेहोश होकर गिर गया। अंबेडकर अस्पताल से यहां जब से लाए हैं, बुजुर्ग को इमरजेंसी वार्ड में ही रखा गया है। बेटे ने बताया कि डॉक्टर ने कहा कि आईसीसीयू में बिस्तर खाली होगा, तभी वहां शिफ्ट करेंगे। यहां बैठने-उठने में दिक्कत है। आईसीसीयू में बड़े डॉक्टर भी रहते हैं। मशीनों की खरीदी पर राजनीति, भुगतान नहीं तो मेंटेनेंस अटका डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल 2018 में शुरू हुआ। कुछ ही महीनों के भीतर राज्य में सत्ता परिवर्तन हो गया और यहां कांग्रेस की सरकार बन गई। कांग्रेस सरकार ने डीकेएस में खरीदी की जांच शुरू कर दी। जांच रिपोर्ट में धांधली तो सामने नहीं आई लेकिन शासन ने मशीनों का भुगतान नहीं किया गया। अब राज्य में भाजपा की सरकार बन गई है, उसके बाद भी मशीनों और उपकरणों का भुगतान नहीं किया गया है। इस वजह से जिन कंपनियों ने वेंटिलेटर सहित अन्य मशीनों की सप्लाई की है, वे उसका मेंटेनेंस नहीं कर रही हैं। Read More- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS  

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