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BMO पर कार्रवाई हुई तो ठप होंगी सेवाएं : देवभोग में जांच से पहले कार्रवाई, स्वास्थ्य अमला की धमकी, धरने पर बैठेंगे कर्मचारी

MP CG Times / Wed, Jun 3, 2026

गिरी जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के देवभोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के खंड चिकित्सा अधिकारी (बीएमओ) डॉ. प्रकाश साहू पर लगे अभद्र व्यवहार और धमकी देने के आरोपों को लेकर अब विवाद गहराता जा रहा है। एक ओर सुपेबेड़ा निवासी टंकधर आडिल ने बीएमओ पर दवा मांगने के दौरान अभद्रता और थप्पड़ मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है, वहीं दूसरी ओर देवभोग ब्लॉक का पूरा स्वास्थ्य अमला डॉ. साहू के समर्थन में खुलकर सामने आ गया है।

मंगलवार को विकासखंड के स्वास्थ्य अधिकारियों और कर्मचारियों ने अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) देवभोग को ज्ञापन सौंपकर आरोपों को निराधार और दुर्भावनापूर्ण बताया। कर्मचारियों ने मांग की कि मामले की निष्पक्ष और तथ्यपरक जांच कराई जाए तथा जांच पूरी होने से पहले किसी प्रकार की एकपक्षीय कार्रवाई न की जाए।

एसडीएम को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच की मांग

स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों द्वारा सौंपे गए ज्ञापन में कहा गया है कि डॉ. प्रकाश साहू अपने शासकीय दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, समर्पण और सकारात्मक सोच के साथ कर रहे हैं। उन्होंने हमेशा मरीजों के हितों को प्राथमिकता दी है तथा कर्मचारियों को मार्गदर्शन देने के साथ-साथ शासन की स्वास्थ्य योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि डॉ. साहू के कार्यकाल में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। ऐसे में उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच होना आवश्यक है ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके।

आधारहीन शिकायतों से टूट रहा अधिकारियों का मनोबल

ज्ञापन में कर्मचारियों ने चिंता जताते हुए कहा कि हाल के वर्षों में बिना पर्याप्त तथ्यों के शासकीय अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ शिकायतें करने की प्रवृत्ति बढ़ी है। इस तरह के आरोप न केवल अधिकारियों और कर्मचारियों का मनोबल गिराते हैं, बल्कि शासकीय कार्यों को भी प्रभावित करते हैं।

स्वास्थ्य अमले ने प्रशासन से मांग की है कि टंकधर आडिल द्वारा की गई शिकायत की पूरी निष्पक्षता के साथ जांच कराई जाए। साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी है कि यदि जांच पूरी होने से पहले किसी प्रकार की एकपक्षीय कार्रवाई की जाती है या अस्पताल परिसर में शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने की कोशिश होती है, तो विकासखंड के समस्त स्वास्थ्य अधिकारी और कर्मचारी कार्य बंद कर धरना-प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे।

दवा कटौती के बाद बढ़ा असंतोष, विवाद से जोड़कर देखे जा रहे हालात

स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों और कर्मचारियों का कहना है कि विवाद की पृष्ठभूमि केवल व्यक्तिगत आरोपों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे स्वास्थ्य सुविधाओं और दवाओं की उपलब्धता में आई कमी भी एक बड़ा कारण है।

सुपेबेड़ा क्षेत्र लंबे समय से किडनी रोग से प्रभावित इलाके के रूप में जाना जाता है। पिछले लगभग एक दशक तक यहां किडनी पीड़ित मरीजों को पर्याप्त मात्रा में दवाएं, जांच सुविधाएं और अन्य स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराई जाती रही थीं। लेकिन पिछले एक वर्ष के दौरान निःशुल्क दवाओं की उपलब्धता में उल्लेखनीय कटौती हुई है।

कर्मचारियों का मानना है कि दवाओं की कमी के कारण मरीजों और उनके परिजनों में असंतोष बढ़ा है। स्थानीय स्तर पर कई लोग इस स्थिति को किसी प्रकार की अनियमितता या गड़बड़ी से जोड़कर देख रहे हैं। बताया जा रहा है कि टंकधर आडिल भी अपनी बीमार पत्नी के लिए लगातार दवा की मांग कर रहे थे। दवा उपलब्ध नहीं होने पर उन्होंने डॉक्टरों पर दवा बेचने का आरोप लगाया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद की स्थिति निर्मित हुई।

डॉक्टरों की कमी से भी जूझ रहा देवभोग अस्पताल

देवभोग अस्पताल पहले से ही चिकित्सकों की कमी की समस्या का सामना कर रहा है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार करीब एक वर्ष पहले तक अस्पताल में आठ से अधिक डॉक्टर पदस्थ थे और स्वास्थ्य सेवाएं अपेक्षाकृत बेहतर ढंग से संचालित हो रही थीं।

हालांकि संविदा डॉक्टरों की सेवाएं समाप्त होने और उनकी वापसी के बाद अस्पताल में चिकित्सकों की संख्या लगभग आधी रह गई है। सीमित स्टाफ और संसाधनों के बीच स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी सेवाएं देने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में वर्तमान विवाद ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर अतिरिक्त दबाव बना दिया है।

अब जांच रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

बीएमओ डॉ. प्रकाश साहू पर लगे आरोपों और स्वास्थ्य कर्मचारियों द्वारा उनके समर्थन में दिए गए ज्ञापन के बाद पूरे मामले पर प्रशासन की नजर बनी हुई है। एक ओर शिकायतकर्ता निष्पक्ष कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य अमला भी जांच पूरी होने तक किसी भी प्रकार की जल्दबाजी में कार्रवाई का विरोध कर रहा है। ऐसे में अब सभी की निगाहें प्रशासन द्वारा कराई जाने वाली जांच और उसकी रिपोर्ट पर टिकी हुई हैं।

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