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: 3 करोड़ खर्च, लेकिन लाइट नहीं, अंधेरे में सिस्टम: गरियाबंद में DMF मद से हुआ खेला, जिला पंचायत CEO बोलीं- कलेक्टर से पूछिए

MP CG Times / Wed, Apr 3, 2024

गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में हाई मास्ट लाइट लगाने DMF से करीब 3 करोड़ खर्च कर दिए गए। इसमें 5 मिनी स्टेडियम में डेढ़ करोड़ रुपए से ज्यादा खर्च हुआ है। हैरानी की बात ये है कि 6 महीने बाद भी अब तक इनमें बिजली कनेक्शन है। सभी हाई मास्ट लाइट बंद पड़े हैं।

पुलिस भर्ती की तैयारी में लगे युवा और खिलाड़ियों का कहना है कि सुबह एक बार प्रैक्टिस हो पा रही है। शुरू करने से पहले शराब की खाली बोतलें बाहर फेंकना पड़ता है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में मिले DMF फंड का ज्यादातर उपयोग सरकारी और उपयोगी संस्थानों को चकाचौंध करने में खर्च किया गया। चहते ठेकेदारों को टेंडर मिला देवभोग के अलावा मैनपुर, गरियाबंद, छुरा और राजिम के मिनिस्टेडियम में 40-40 लाख का बजट हाई मास्ट लाइट के लिए खर्च का प्रावधान किया गया। काम कराने का जिम्मा अलग अलग संस्थानों को सौंपा गया, लेकिन वर्क ऑर्डर राजधानी के सत्तासीन नेता और तत्कालीन अफसरों के इर्द गिर्द रहने वाले चहते ठेकेदारों को टेंडर मिला। सरपंच के कंधे पर रखकर देवभोग में खेल क्रियान्वयन एजेंसी भी प्रशासनिक मुखिया के मूड के आधार पर तय हुआ। छुरा, राजिम ओर मैनपुर का कार्य लोक निर्माण विभाग के बिजली शाखा के माध्यम से हुआ। गरियाबंद में इस काम को कराने वन विभाग की जिम्मेदारी मिली थी, जबकि देवभोग स्टेडियम का कार्य देवभोग सरपंच के कंधे पर रखकर कराया गया। 3 किलो वॉट से ज्यादा भार क्षमता की बिजली की जरूरत सभी कार्य के लिए 15 मई से 25 मई के बीच वर्क ऑर्डर जारी कर दिया गया था। कंपनियों ने अक्टूबर माह में काम खत्म कर ट्रायल भी पूरी कर ली। हाई मास्क लाइट को जलाने 3 किलो वॉट से ज्यादा भार क्षमता की बिजली चाहिए, जिसके लिए सभी जगह एक एक ट्रांसफार्मर की जरूरत है, लेकिन इसके अभाव में स्टेडियम के हाई मास्क का उपयोग नही हो पा रहा है। ट्रांसफार्मर लगाने के लिए कोई आवेदन नहीं मिला बिजली विभाग के कार्यपालन अभियंता अतुल तिवारी ने कहा कि उन्हें अब तक किसी भी स्थान से ट्रांसफार्मर लगाने के लिए कोई आवेदन या नहीं प्राप्त हुआ है। 2 के बजाए एक टाइम की प्रैक्टिस, पहले सफाई करना पड़ता है इन दिनों पुलिस व सेना की भर्ती की तैयारी बड़ी संख्या में कर रहे हैं। ग्रामीण अंचल में दौड़ लगाने का विकल्प है, लेकिन जिला मुख्यालय में युवाओं को सबसे ज्यादा परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इसके साथ ही खेलो इंडिया और अन्य स्पोर्ट्स के पुरुष महिला खिलाड़ी भी सुबह से गरियाबंद मिनी स्टेडियम में आ रहे हैं। मैदान में शराब की बोतलें महिला खिलाड़ी खिलेश्वरी ध्रुव ने बताया कि पूरे मैदान और बैठने की जगहों पर शराब की बोतलें पड़ी रहती हैं। प्रेक्टिस शुरू करने से पहले बोतल फेंकना पड़ता है। कूद के लिए रखे गए बालू में तक बोतल तोड़ कर कांच डाल दिया जाता है। शाम को असामाजिक लोगों का डेरा वॉलीबॉल कोच कौशल वर्मा ने कहा कि गर्मी में जल्दी तेज धूप निकल आता है। लाइट जलता तो शाम का भी वर्क आउट हो जाता। महिला आरक्षक भर्ती के लिए मेहनत में लगी मिलंती दुर्गे ने बताया की बिजली प्रबंध और शाम को असामाजिक लोगों का डेरा रहता है। मुक्ति दिलाने जिला प्रशासन को लिखित आवेदन किया गया है। डेढ़ गुना बड़ा प्राक्कलन बनाया, बिजली व्यवस्था नही ं अनुमान और किए गए काम को देखते हुए डेढ़ गुना बड़ा स्टीमेट बनने की संभावना है। टेंडर जारी करने वाली क्रियान्वयन एजेंसी में 12 से 15 प्रतिशत विलो का उपयोग किया गया है। कार्य के प्राक्कलन में सबसे महत्वपूर्ण बात ट्रांसफार्मर थी, जिसका स्वीकृति प्राक्कलन में जिक्र तक नहीं किया गया। बिजली का खर्च कैसे चलेगा इसका कोई जिक्र नहीं है। अधिकारी बदले तो काम की गुणवत्ता भी देखी गई, इसलिए भुगतान में देरी होना स्वाभाविक था। अभी तक इस मद का आधा पैसा ही संबंधितों को जारी किया गया है। आधे रुपए के लिए एजेंसियां आज भी कलेक्टोरेट और जिला पंचायत के चक्कर लगा रही हैं। जो भी पूछना है कलेक्टर से पूछिए- जिला पंचायत सीईओ गरियाबंद जिला पंचायत सीईओ रीता यादव ने कहा कि इस मामले में जो भी पूछना है कलेक्टर से पूछिए। पूरी फाइल उन्हें दे दी गई है। खाते में पैसा बचा है, उसी से ट्रांसफार्मर लगाने की प्रक्रिया की जा रही है। Read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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