जायसवाल 'साइको किलर' ने 8 लोगों को मार डाला : कब्रों से निकले कंकाल, जहर परखने पहले कुत्ते को दिया, एक ही पैटर्न पर हो रही थीं मौतें, वजह हैरान कर देगी
छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले के खर्वे गांव से एक ऐसा खौफनाक और हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने पूरे प्रदेश को हिलाकर रख दिया है। पिछले 3 महीनों के भीतर गांव में एक के बाद एक हुई 8 पुरुषों की रहस्यमयी मौतों के पीछे की खूनी साजिश को पुलिस ने बेनकाब कर दिया है।
गांव के ही 46 वर्षीय किराना दुकानदार रामसहाय जायसवाल ने पुरानी रंजिश, विवाद, कर्ज और टोना-टोटका के अंधविश्वास के चलते सुनियोजित तरीके से 8 लोगों की हत्या कर दी। इस रहस्य का पर्दाफाश करने के लिए पुलिस ने जिला प्रशासन की मौजूदगी में 7 मृतकों के शवों को कब्र से वापस बाहर निकलवाया और पोस्टमॉर्टम के लिए रायपुर भेजा।

रामसहाय को उसके घर-दुकान और घटनास्थल ले जाया गया।

रामसहाय ने अपना जुर्म कबूल किया, उसे गिरफ्तार कर लिया गया है।

जहर पिलाकर खुद पीड़ितों को ले जाता था अस्पताल, अंतिम संस्कार में भी रोया
पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी रामसहाय जायसवाल बेहद शातिर दिमाग अपराधी है। वह जिन ग्रामीणों से खुन्नस रखता था, उन्हें पहले अपनी दुकान या ठिकाने पर बुलाकर दोस्ती जताता और फिर चुपके से चूहा मारने का घातक जहर (बोरेक्स पाउडर/सुहागा) शराब में मिलाकर पिला देता था।
जब जहर के असर से पीड़ित तड़पने लगते, तो आरोपी शक से बचने के लिए खुद उन्हें अस्पताल ले जाने में मदद करता था। इतना ही नहीं, वह सभी 8 मृतकों के अंतिम संस्कार (शवयात्रा) में भी शामिल हुआ और परिजनों के साथ दुख जताने का नाटक करता रहा।

जहर का असर देखने के लिए पहले कुत्ते को मारा, ट्रायल
कसडोल थाना पुलिस की कड़ी पूछताछ में आरोपी रामसहाय ने अपना जुर्म कबूल करते हुए बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया। उसने बताया कि उसने बाजार से चूहे मारने के नाम पर घातक केमिकल खरीदा था। इस जहर की मारक क्षमता को परखने (Test) के लिए उसने सबसे पहले गांव के एक लावारिस कुत्ते को इसे खाने में मिलाकर दिया।
जब कुत्ता तड़प-तड़पकर मर गया और आरोपी को यकीन हो गया कि जहर पूरी तरह काम कर रहा है, तो उसने एक-एक कर उन ग्रामीणों को निशाना बनाना शुरू किया जिनसे उसका पुराना विवाद या पत्नी पर गलत नजर रखने का शक था।
मौत का खूनी कैलेंडर: 6 फरवरी से 14 मई तक ऐसे बुझे 8 चिराग
खर्वे गांव में मौत का यह सिलसिला 6 फरवरी से शुरू होकर मई के मध्य तक लगातार चलता रहा:
6 फरवरी: बद्री पटेल की पहली संदिग्ध मौत।
20 फरवरी: बुढालू साहू की जान चली गई।
12 मार्च: बुधराम जायसवाल (इनका अंतिम संस्कार पहले ही हो चुका था)।
20 मार्च: छत्तूराम साहू की मौत।
31 मार्च: विनोद साहू ने दम तोड़ा।
28 अप्रैल: गजानंद मांझी की मौत।
29 अप्रैल: चैतूराम साहू की जान गई।
14 मई: महेतरू साहू की आखिरी मौत हुई।

बच गए 'कार्तिक' के बयान से खुली पोल, 21 बलि की अफवाह से सहमा था गांव
लगातार हो रही मौतों से खौफजदा ग्रामीणों ने जब बैठक बुलाई, तो इस खूनी खेल की कड़ियां आपस में जुड़ने लगीं। इसी बीच गांव के कार्तिक कुम्हार का बयान सामने आया, जो बीमार होने के बाद चमत्कारिक रूप से बच गया था। कार्तिक ने बताया कि 14 अप्रैल को उसके दोस्त प्रमोद साहू ने उसे पीने के लिए शराब दी थी, जो बहुत कड़वी थी और उसे पीते ही उल्टियां व पेट दर्द शुरू हो गया था।
जब प्रमोद से पूछा गया तो उसने बताया कि यह शराब उसे किराना दुकान वाले रामसहाय ने दी थी। चूंकि प्रमोद ने खुद नहीं पी और कार्तिक को दे दी, इसलिए कार्तिक की जान तो बच गई लेकिन कातिल का चेहरा बेनकाब हो गया।
ग्रामीणों के बीच यह अफवाह भी जोरों पर थी कि गांव में छिपे किसी गुप्त खजाने को हासिल करने के लिए तांत्रिक क्रिया के तहत 21 लोगों की बलि दी जानी है, जिसमें से 8 दी जा चुकी हैं और 13 लोग अभी कतार में हैं। हालांकि, पुलिस की आला अधिकारियों की टीम ने स्पष्ट किया है कि आरोपी ने अंधविश्वास और आपसी रंजिश के व्यक्तिगत कारणों से यह मर्डर किए हैं, गड़े धन या बलि का कोई एंगल सामने नहीं आया है।
भीड़ का फूटा गुस्सा
मंगलवार को जब पुलिस की भारी टीम आरोपी रामसहाय जायसवाल को उसके घर, किराना दुकान और घटनास्थल पर क्राइम सीन रिक्रिएट करने और जहर की शीशियां जब्त करने ले गई, तो पूरे गांव का आक्रोश फूट पड़ा। सैकड़ों ग्रामीणों ने आरोपी को घेर लिया और उसे फांसी देने की मांग करते हुए जमकर गालियां दीं।
पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए आरोपी को सुरक्षित वाहन में बैठाया और न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है। गांव में शांति बनाए रखने के लिए विशेष शांति पूजा भी आयोजित की गई है।
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