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गरियाबंद में सिस्टम की लाचारी : 8 लाख डकार कर भाग गया ठेकेदार, अब मासूम बच्चे और ग्रामीण मिलकर बना रहे 'अपना स्कूल', भ्रष्ट ठेकेदारों पर मेहरबान प्रशासन
Mon, Sep 7, 2026
गिरीश जगत। गरियाबंद जिले के आदिवासी बहुल मैनपुर ब्लॉक से सिस्टम की लापरवाही, भ्रष्टाचार और लाचारी की शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। ग्राम मोतीपानी में प्राथमिक शाला के 41 मासूम बच्चे और ग्रामीण मिलकर खुद फावड़ा, कवेलू और गारा उठाकर एक कच्चे मकान को 'स्कूल भवन' बनाने में जुटे हुए हैं।
आदिवासी अंचल से आई यह तस्वीर प्रदेश की बदहाल शिक्षा व्यवस्था और दावों के मुंह पर करारा तमाचा है।
8 लाख रुपए की मंजूरी, आधा पैसा खाकर भागा ठेकेदार
जानकारी के मुताबिक, करीब 4 साल पहले 'मुख्यमंत्री जतन योजना' के तहत मोतीपानी प्राथमिक शाला में अतिरिक्त कक्ष निर्माण के लिए 8 लाख रुपए स्वीकृत किए गए थे।
इस निर्माण कार्य की पूरी जिम्मेदारी ट्राइबल डिपार्टमेंट के पास थी। ठेकेदार ने स्वीकृत राशि में से आधी से ज्यादा रकम तो निकाल ली, लेकिन स्कूल भवन का काम आधा-अधूरा छोड़कर रफूचक्कर हो गया।
सिर पर मंडराता खतरा देख ग्रामीणों ने शुरू किया श्रमदान
स्कूल का पुराना भवन पूरी तरह जर्जर हो चुका था और बरसात के दिनों में छत गिरने का खतरा मंडरा रहा था। अधिकारियों के चक्कर काटकर थके ग्रामीणों और शिक्षकों ने आखिरकार बच्चों की सलामती के लिए खुद ही कमान संभाली।
गांव के लोग और मासूम स्कूली बच्चे मिलकर एक पुराने कच्चे मकान की दीवारों को ठीक कर रहे हैं और खपरैल (कवेलू) बदल रहे हैं ताकि बच्चे सिर ढककर पढ़ाई कर सकें।
इस प्राथमिक शाला में कुल 41 बच्चे पढ़ते हैं, जो हर दिन खौफ के साए में शिक्षा हासिल करने को मजबूर हैं।
अकेले मैनपुर ब्लॉक में 40 से ज्यादा स्कूल भवन अधूरे!
मोतीपानी की यह घटना कोई अकेली नहीं है। मैनपुर ब्लॉक में ही 40 से ज्यादा स्कूल भवनों का काम भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ चुका है और वर्षों से अधूरा पड़ा है।
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि प्रशासन ने लापरवाह और भ्रष्ट ठेकेदारों पर सिर्फ नाममात्र की कागजी कार्रवाई करके मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया। जिम्मेदार अफसरों की मिलीभगत के कारण आज गरीब आदिवासियों के बच्चों को अपने हाथ से मिट्टी और कवेलू उठाकर अपना स्कूल संवारना पड़ रहा है।