: 'पापा' हमारे शिवराज कैबिनेट में मंत्री हैं ! PM, CM आदिवासियों के 'मसीहा', फिर ये विलेन कैसे ? बिसाहूलाल के बेटे ने आदिवासी परिवार को घर से किया बेदखल
दरअसल, प्रदेश के सबसे बड़े आदिवासी नेता और कैबिनेट खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री बिसाहू लाल सिंह के बेटे ओम प्रकाश सिंह ने एक आदिवासी परिवार को उसके प्रधाममंत्री आवास से बेदखल करवाया है. मंत्री के बेटे ओम प्रकाश और संतोष सिंह का जमीनी विवाद का मामला सिविल कोर्ट अनूपपुर में दर्ज है, जिसकी सुनवाई 27 दिसंबर को थी. बाबजूद 26 को ही मंत्री के बेटे ओमप्रकाश ने अपने ही गांव परासी में जमीन खाली करवाने कड़ाके की ठंड में पहुंचे. उन्हीं की ही जाति के एक आदिवासी परिवार पर रहम नहीं किया. बेदखली करवा उस पूरे परिवार को सड़क पर रहने मजबूर कर दिया.
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3 एकड़ कैसे बना 6 एकड़ ?
मंत्री के गांव परासी में 6 एकड़ जमीन थी, जो 3-3 एकड़ रतिराम गोंड और संतोष सिंह दोनों के नाम से दर्ज थी. 2010 से 2021 तक यह जमीन दोनों के नाम पर रही. परिवार ने आरोप लगाया कि मंत्री पुत्र ओमप्रकाश सिंह ने रतिराम से पूरी जमीन की रजिस्ट्री अपने नाम करवाई और संतोष सिंह जो कि पीड़ित है, उसके नाम की जमीन में अवैध काबिज एसडीएम कोर्ट अनूपपुर से सिद्ध कर दिया.
न्यायालय से लगाई गुहार
पीड़ित संतोष सिंह आधी जमीन का मालिक था, जिसे अवैध कब्जा धारी बता बेदखली करवा दिया गया. आरोप है कि मंत्री के बेटे ने 6 एकड़ जमीन अपने नाम करा ली, जबकि एसडीएम अनूपपुर के बेदखली के आदेश के बाद पीड़ित ने सिविल कोर्ट अनूपपुर में न्याय के लिए गुहार लगाई.
कड़ाके की ठंड में निकाला घर से बाहर
नियम कहता है कि कोई भी प्रकरण यदि न्यायालय में विचाराधीन है, तो उस पर कार्रवाई करना न्याय संगत नहीं, जब तक सिविल कोर्ट में सुनवाई चल रही. बाबजूद सैकड़ों एकड़ के मालिक मंत्री और उनके पुत्रों ने एक आदिवासी को बेघर करने में कोई कसर नहीं छोड़ी. आरोप है कि धन बल ओहदे का इस्तेमाल कर एक आदिवासी को अपने घर और जमीन से कड़ाके की ठंड में बाहर सड़क पर रहने मजबूर कर दिया.
बेरहमों का दिल नहीं पसीजा
पीड़ित परिवार ने मीडिया के सामने रो-रोकर अपनी व्यथा सुनाई, जिसे सुनकर मीडिया कर्मी भी भावुक हो उठे, लेकिन बेरहमों का दिल नहीं पसीजा. परिवार ने कहा कि उनके 3 एकड़ जमीन की धोखे से रजिस्ट्री करा ली गई. मंत्री के बेटे ने जमीन को छीन लिया है, जिससे वे अब बेघर हो गए हैं.
रामलाल रौतेल ने की कड़ी निंदा
मंत्री पुत्र के इस कार्य के बाद खुद बीजेपी के पूर्व प्रदेश उपाध्यक्ष, पूर्व विधायक छत्तीसगढ़ प्रदेश अनुसूचित जनजाति मोर्चे के प्रभारी रामलाल रौतेल ने निंदा की. बिसाहूलाल के इस कार्य की उपेक्षा की और अमानवीय बताया. उन्होंने पीड़ित को न्याय दिलाने संबंधित राजस्व अधिकारियों से बात की.
धायक सुनील सराफ ने ये कहा
वहीं कांग्रेस के कोतमा विधायक सुनील सराफ ने भाजपा सरकार और मंत्री बिसाहू लाल सिंह को आदिवासी विरोधी बता लालची कहा है. जबकि पीड़ित के वकील से बात करने पर पता चला कि पूरे मामले की सुनवाई 27 दिसंबर को थी, लेकिन कोर्ट के निर्णय का इंतजार किए बिना ही बेदखली कर दी गई, जो न्याय संगत नहीं है.
दर-दर भटक रहा परिवार
अनुविभागीय राजस्व अधिकारी एसडीएम अनूपपुर कमलेश पुरी ने बताया कि एसडीएम ,कमिश्नर कार्यालय से बेदखली का आदेश जारी हुआ था, जिसका हमने पालन किया. कोर्ट में विचाराधीन मामले में स्टे न होने का हवाला दिया. इन सबके बीच पीड़ित आदिवासी संतोष सिंह और उसका परिवार अपना हक पाने दर-दर भटक रहा है.
बता दें कि मंत्री बिसाहूलाल अभी कुछ महीने पहले ही अपने विवादित बयान के कारण सुर्खियों में आ गए थे. उन्होंने ब्राम्हण और ठाकुरों की बहन बेटी पर अभद्र टिप्पणी की थी, जिससे पूरे प्रदेश में तहलका मच गया था. मंत्री की जमकर फजीहत हुई थी. यहां तक खबर है कि सीएम शिवराज ने अपने बंगले में जमकर लताड़ लगाई थी. इसके बाद मंत्री जी ने माफी मांगी थी.
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बहरहाल, अब सवाल ये उठता है कि स्वयं आदिवासी होकर एक आदिवासी के साथ इनकी संवेदना सैकड़ों एकड़ जमीन के मालिक होकर भी कहां चली गई, जबकि प्रदेश सरकार आदिवासिओं को कब्जा पट्टा दिलाने का काम कर रही, लेकिन मंत्री परिवार छीनने का काम कर रहा है, क्या शिवराज कैबिनेट में यही सिखाया जाता है ?. उसी जमीन पर प्रधानमंत्री आवास बना है, क्या बिना जमीन के आवास दे दिया गया, कहां खेला कर गया मंत्री परिवार ?
read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanistan Taliban Left Behind in 2001
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