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पावर कंपनी ने हड़प ली अन्नदाता की जमीन ? : Anuppur में सिस्टम की नाक के नीचे New Zone India कंपनी की करतूत, नहीं मिला मुआवजा, किसान बोला-फिर शुरू करूंगा खेती

MP CG Times / Thu, Jan 8, 2026

New Zone India Private Limited Raksa Village Anuppur Compensation Controversy: मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के ग्राम रक्सा (Raksa Village, Anuppur) में आयोजित Environmental Public Hearing के दौरान एक बार फिर यह सवाल खुलकर सामने आ गया कि क्या बड़ी पावर कंपनियां और प्रशासन मिलकर किसानों के हक को कुचल रहे हैं?

New Zone India Private Limited Raksa Village Anuppur Compensation Controversy: New Zone India Private Limited की 1600 मेगावाट कोयला आधारित थर्मल पावर परियोजना (1600 MW Coal Based Thermal Power Project) की जनसुनवाई में जो सामने आया, उसने land acquisition process और administrative accountability दोनों पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए।

New Zone India Private Limited Raksa Village Anuppur Compensation Controversy: यह Public Hearing on Power Plant मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, शहडोल (MP Pollution Control Board, Shahdol) की निगरानी में आयोजित की गई थी।

New Zone India Private Limited Raksa Village Anuppur Compensation Controversy: मंच पर अधिकारी, कंपनी प्रतिनिधि और ग्रामीण मौजूद थे, लेकिन सबसे मजबूत आवाज उस किसान की थी, जिसकी जमीन तो ले ली गई, पर मुआवजा आज तक नहीं मिला।

किसान ने मंच से खोली कंपनी की पोल

New Zone India Private Limited Raksa Village Anuppur Compensation Controversy: जनसुनवाई के दौरान ग्राम रक्सा निवासी किसान रामदीन राठौर ने खुले मंच से आरोप लगाया कि कंपनी ने उनकी करीब साढ़े सात एकड़ जमीन हड़प ली, लेकिन compensation payment अब तक उनके खाते में नहीं पहुंचा।

किसान ने बताया कि वह लंबे समय से कंपनी और अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काट रहा है, लेकिन हर बार उसे सिर्फ आश्वासन दिए गए। किसान का सवाल सीधा था— जब जमीन कंपनी के कब्जे में है, तो मुआवजा क्यों नहीं? यह सवाल corporate ethics और government oversight दोनों पर भारी पड़ता है।

प्रशासन की नाराजगी, लेकिन क्या कार्रवाई होगी ?

कंपनी अधिकारियों ने मुआवजे को लेकर मंच से सफाई देने की कोशिश की, लेकिन उनकी दलीलें district administration को भी रास नहीं आईं। अपर कलेक्टर दिलीप कुमार पांडेय और एसडीएम कमलेश पुरी ने कंपनी पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बहानेबाजी बंद कर किसान की समस्या का immediate resolution किया जाए।

New Zone India Private Limited Raksa Village Anuppur Compensation Controversy: हालांकि सवाल यह है कि जब मामला सार्वजनिक मंच पर आकर भी सिर्फ “निर्देश” तक सीमित रह जाए, तो क्या इसे effective governance कहा जा सकता है?

7 दिन का अल्टीमेटम, खेती फिर शुरू करूंगा

New Zone India Private Limited Raksa Village Anuppur Compensation Controversy: पीड़ित किसान राम सिंह राठौर ने प्रशासन और कंपनी दोनों को सीधी चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि यदि 7 दिन के भीतर उनकी जमीन का मुआवजा नहीं मिला, तो वे उसी जमीन पर दोबारा खेती (Resume Farming) शुरू कर देंगे।

किसान ने यह भी स्पष्ट किया कि खेती के दौरान यदि उनके साथ कोई अप्रिय घटना होती है, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन और पावर कंपनी की होगी। यह चेतावनी दरअसल उस हताशा का संकेत है, जहां किसान के पास विरोध का आखिरी रास्ता भी खेत ही बचा है।

2006 में अधिग्रहण, 18 साल बाद भी अधूरा इंसाफ

जानकारी के मुताबिक, New Zone India Private Limited ने वर्ष 2006 में 191 किसानों से करीब 776.78 हेक्टेयर जमीन अधिग्रहित की थी। हैरानी की बात यह है कि 18 वर्षों तक न तो पावर प्लांट लगा और न ही गांवों से जुड़े rehabilitation promises पूरे किए गए।

New Zone India Private Limited Raksa Village Anuppur Compensation Controversy: इतने लंबे समय तक जमीन रोके रखना और किसानों को अधर में छोड़ देना, यह सीधे तौर पर policy failure और corporate negligence की मिसाल है।

2024 में फिर जागी कंपनी, सवाल जस के तस

वर्ष 2024 में कंपनी ने एक बार फिर power plant development process शुरू की। इस दौरान किसानों को प्रति एकड़ दोगुना मुआवजा (Double Compensation) देने के दावे किए गए और जमीन के चारों ओर fencing work भी शुरू कर दिया गया। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि आज भी कुछ किसानों को उनका हक नहीं मिला।

New Zone India Private Limited Raksa Village Anuppur Compensation Controversy: यह पूरा मामला यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या environment clearance की प्रक्रिया में किसानों के अधिकार सिर्फ कागजों तक सीमित रह गए हैं?

अब बड़ा सवाल यही है कि क्या प्रशासन इस बार सिर्फ मंच से नाराजगी दिखाकर चुप बैठ जाएगा, या फिर किसान को उसका हक दिलाने के लिए real action on ground देखने को मिलेगा? क्योंकि अगर 7 दिन बाद खेत में हल चला, तो जिम्मेदारी तय करने से कोई नहीं बच पाएगा।

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