: सावन में RUDRAKSHA पहनने के फायदे: भगवान शिव की बरसेगी कृपा, जानिए रुद्राक्ष के लाभ और प्रकार ?
MP CG Times / Sun, Jul 28, 2024
RUDRAKSHA PAHANNE KE DAYDE: श्रावण मास (जिसे श्रावण या सावन भी कहते हैं) हिन्दू पंचांग का एक महत्वपूर्ण महीना है, जो विशेष रूप से भगवान शिव की पूजा और साधना के लिए समर्पित होता है। इस माह में रुद्राक्ष पहनने के कई धार्मिक और स्वास्थ्य लाभ माने जाते हैं। आइए जानें, रुद्राक्ष पहनने के नियम, लाभ और धारण करने का तरीका:
भगवान पशुपतिनाथ के मुख पर दरारें: सावन के पहले सोमवार पर ये कैसी अनहोनी, जानिए क्या है Pashupatinath Shivling Cracks ?रुद्राक्ष पहनने के लाभ:
- धार्मिक लाभ: रुद्राक्ष पहनने से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है। यह धार्मिक पवित्रता और मानसिक शांति प्रदान करता है।
- मानसिक स्वास्थ्य: रुद्राक्ष का नियमित प्रयोग ध्यान और साधना में सहायक होता है। यह मानसिक तनाव और चिंता को कम करता है।
- शारीरिक लाभ: रुद्राक्ष पहनने से शरीर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और यह रक्तदाब, हृदय रोग जैसी समस्याओं को भी नियंत्रित कर सकता है।
- आध्यात्मिक उन्नति: यह साधक की आध्यात्मिक यात्रा में सहायक होता है और ध्यान और साधना में गहराई लाता है।
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नियम:
- सप्ताह के दिन: श्रावण मास के दौरान सोमवार, बुधवार, और शनिवार को रुद्राक्ष पहनने की विशेष महत्ता होती है।
- शुद्धता: रुद्राक्ष पहनने से पहले स्नान कर शुद्ध होकर पूजा करनी चाहिए। इस दौरान मन को भी शांत रखना आवश्यक है।
- मंत्र जाप: रुद्राक्ष पहनते समय 'ऊँ नमः शिवाय' या 'महा मृत्युंजय मंत्र' का जाप करना लाभकारी होता है।
- सहेजना: रुद्राक्ष को सदैव स्वच्छ रखें और नियमित रूप से उसकी सफाई करें।
रुद्राक्ष धारण करने का तरीका:
- सही रुद्राक्ष का चयन: रुद्राक्ष की कई किस्में होती हैं (जैसे 1 मुखी, 5 मुखी, 7 मुखी आदि)। अपनी ज़रूरत और सलाह के अनुसार सही रुद्राक्ष का चयन करें।
- पवित्रता: रुद्राक्ष को पहनने से पहले, उसे गंगाजल या शुद्ध जल से धो लें और सूर्यास्त के समय पूजा करके ही पहनें।
- धारण का तरीका: रुद्राक्ष को साधारण तौर पर काले धागे या सोने/चांदी के तार में पिरोकर गले या कलाई पर पहन सकते हैं।
- अस्थायी या स्थायी धारण: आप इसे स्थायी रूप से पहन सकते हैं, लेकिन इसे उतारने से पहले या किसी विशेष अवसर पर इसे विशेष पूजा और ध्यान से उतारें।
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1. धार्मिक महत्व:
- भगवान शिव की पूजा: श्रावण मास भगवान शिव की पूजा का विशेष महीना होता है। रुद्राक्ष भगवान शिव का प्रिय आभूषण है। इसे पहनने से भगवान शिव की कृपा प्राप्त होती है और उनकी उपासना को विशेष महत्व दिया जाता है।
- रुद्राक्ष की उत्पत्ति: मान्यता के अनुसार, रुद्राक्ष भगवान शिव की आँसु की उत्पत्ति मानी जाती है। इसे पहनने से शिव की उपासना की जाती है, जो इस महीने की प्रमुख पूजा है।
2. आध्यात्मिक लाभ:
- ध्यान और साधना: रुद्राक्ष पहनने से ध्यान और साधना में गहराई आती है। यह ध्यान के दौरान मन को स्थिर और शांत करता है, जिससे आध्यात्मिक उन्नति में सहायक होता है।
- आध्यात्मिक सुरक्षा: रुद्राक्ष पहनने से व्यक्ति को आध्यात्मिक सुरक्षा और आत्म-संयम प्राप्त होता है। यह ध्यान की प्रक्रिया को सशक्त बनाता है और साधक को आत्मज्ञान की ओर ले जाता है।
3. वैज्ञानिक और स्वास्थ्य लाभ:
- ऊर्जा संतुलन: रुद्राक्ष को पहनने से शरीर में विद्युत चुंबकीय ऊर्जा का संतुलन बना रहता है, जिससे शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में सुधार होता है।
- सकारात्मक ऊर्जा: यह सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जो तनाव और चिंता को कम करने में मददगार होता है।
4. रुद्राक्ष के विभिन्न प्रकार:
- प्रकार की विशेषता: रुद्राक्ष के विभिन्न मुख (faces) होते हैं, जैसे 5 मुखी, 7 मुखी, 12 मुखी आदि। प्रत्येक मुख का अलग-अलग महत्व होता है और इसका चयन व्यक्ति की ज़रूरत और उद्देश्य के अनुसार किया जाता है।
- साधना के लिए उपयुक्तता: विशेष मुख के रुद्राक्ष का उपयोग साधना और पूजा के उद्देश्य से किया जाता है, जो श्रावण मास में विशेष लाभकारी होता है।
5. परंपरा और संस्कार:
- श्रावण मास की विशेषता: यह माह भगवान शिव के अनुष्ठान, व्रत, और पूजा के लिए विशेष रूप से समर्पित होता है। रुद्राक्ष पहनना इस माह की परंपरा और धार्मिक संस्कारों का हिस्सा है, जो भक्तों को शिव के प्रति समर्पण और श्रद्धा को प्रकट करता है।
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1. रुद्राक्ष का धार्मिक महत्व
- शिव की उपासना: रुद्राक्ष भगवान शिव का प्रिय आभूषण है। इसे पहनने से भगवान शिव की उपासना और साधना को विशेष महत्व प्राप्त होता है। यह शिव की ऊर्जा को समेटे हुए माना जाता है, जिससे शिव की कृपा प्राप्त होती है।
- शिव के आशीर्वाद: रुद्राक्ष पहनने से व्यक्ति के जीवन में शांति, समृद्धि, और आध्यात्मिक उन्नति के लिए भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
2. श्रावण मास का महत्व
- धार्मिक अनुष्ठान: श्रावण मास (जिसे सावन भी कहते हैं) भगवान शिव की पूजा और व्रतों के लिए विशेष रूप से समर्पित होता है। इस महीने में रुद्राक्ष पहनना शिव की विशेष कृपा को आकर्षित करता है।
- सावन सोमवार: इस महीने के सोमवार विशेष रूप से महत्वपूर्ण होते हैं, जब शिव भक्त व्रत और पूजा करते हैं। रुद्राक्ष पहनने से पूजा और व्रत की प्रभावशीलता बढ़ जाती है।
3. रुद्राक्ष पहनने के लाभ
- आध्यात्मिक उन्नति: रुद्राक्ष पहनने से ध्यान और साधना में सहूलियत होती है, जिससे व्यक्ति की आध्यात्मिक उन्नति होती है और शिव के साथ एक गहरा संबंध स्थापित होता है।
- शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य: रुद्राक्ष सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है, जो मानसिक तनाव और शारीरिक समस्याओं को कम करने में सहायक होता है।
4. रुद्राक्ष पहनने की विधि
- शुद्धता और समर्पण: रुद्राक्ष पहनने से पहले स्नान कर शुद्ध होकर पूजा करनी चाहिए। इसे पहनने के लिए सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा और ध्यान करें।
- मंत्र जाप: रुद्राक्ष पहनते समय 'ऊँ नमः शिवाय' या 'महा मृत्युंजय मंत्र' का जाप करना लाभकारी होता है। यह मंत्र शिव की कृपा को और अधिक आकर्षित करता है।
- पहनने का तरीका: रुद्राक्ष को साधारण तौर पर काले धागे, चांदी, या सोने के तार में पिरोकर गले या कलाई पर पहन सकते हैं।
5. कृपा की प्राप्ति
- श्रद्धा और समर्पण: रुद्राक्ष का उपयोग श्रद्धा और समर्पण के साथ करना चाहिए। इसके सही प्रयोग और सही उद्देश्य से पहनने पर भगवान शिव की कृपा के द्वार खुलते हैं।
- समर्पण और तपस्या: रुद्राक्ष पहनने के साथ नियमित पूजा, व्रत, और तपस्या से भगवान शिव की कृपा प्राप्त की जा सकती है।
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