: मैकल पर्वत से घिरा Kawardha, प्राकृतिक और धार्मिक पर्यटन का बना केंद्र, Ranidahra पिकनिक के लिए है खास
MP CG Times / Mon, Sep 5, 2022

कवर्धा जिला बन गया कबीरधाम
कबीरधाम जिले का जिला मुख्यालय कवर्धा है। कवर्धा को संत कबीर साहिब के आगमन और उनके शिष्य धर्मदास के वंशजों की गुरु गद्दी की स्थापना के कारण, इसे कबीरधाम नाम से जाना जाता है। मगर मुख्य रूप से लोग इसे कवर्धा ही कहते हैं। कवर्धा छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश की सीमा के पास स्थित है। यह क्षेत्र 14 वीं शताब्दी में नागवंशी राजाओं की राजधानी थी। उनके द्वारा निर्मित बहुत सारे ऐतिहासिक स्थल यहां देखने को मिलेंगे, वहीं मैकल पर्वत से घिरे होने के कारण कई प्राकृतिक स्थल भी हैं। जहां दूर-दूर से पर्यटक पहुंचते हैं।
आकर्षण का केंद्र कवर्धा का सरोदा बांध
सरोदा बांध (Saroda Dam) कवर्धा जिले का एक मुख्य आकर्षण स्थल है। यहां पर एक विशाल जलाशय है। यह जलाशय चारों तरफ से पहाड़ियों से घिरा हुआ प्रकृतिक सुंदरता से आच्छादित है। यह जलाशय मध्यम सिंचाई परियोजना के लिए बनाया गया है। यहां पर आपको पहाड़ियों का सुंदर दृश्य देखने को मिलेगा, दूर-दूर तक फैले हुए जलाशय का दृश्य आपको आकर्षित करता है। यह कवर्धा से करीब 12 किलोमीटर दूर है। यहां पर बहुत ही सुंदर गार्डन बना हुआ है,
प्राचीन नागवंशी राजाओं द्वारा निर्मित भोरमदेव मंदिर
भोरमदेव मंदिर कवर्धा का एक मुख्य धार्मिक स्थल है। यह कवर्धा का एक दर्शनीय स्थल है। यह भगवान शिव शिवलिंग के रूप में स्थापित हैं। (Bhoramdev Temple) मंदिर को पुरात्तव सर्वेक्षण विभाग दिल्ली द्वारा संरक्षित किया गया है। यह प्राचीन मंदिर पत्थरों का बना हुआ है। भोरमदेव मंदिर को नागवंशी राजाओं द्वारा 11वीं शताब्दी में बनाया गया था। गौड़ों के उपासक देवता भोरमदेव के नाम पर मंदिर का नाम भोरमदेव मंदिर पड़ा। यह मंदिर कवर्धा से 18 किलोमीटर दूर चौरा गांव में स्थित है। इस मंदिर की बाहरी दीवारों पर सुंदर कलाकृतियां उकेरी गई है। इस मंदिर को "छत्तीसगढ़ का खजुराहो" भी कहा जाता है, क्योंकि खजुराहो की तरह इस मंदिर की कुछ मिथुन मूर्तियां भी बनाई गई हैं।
छेरकी महल और मड़वा महल कवर्धा
मड़वा महल कवर्धा का एक जीर्ण शीर्ण प्राचीन मंदिर है। यह शिव मंदिर भोरमदेव मंदिर के पास ही में स्थित है। इस मंदिर में आपको एक मंडप और गर्भगृह देखने के लिए मिलता है। मंदिर की दीवारों पर मुख्य रूप से मिथुन प्रतिमाओं को दिखाया गया है। जिसके साथ ही छेरकी महल कवर्धा के भोरमदेव में मंदिर परिसर में ही स्थित है। यह मंदिर भोरमदेव एवं मंडवा महल की अपेक्षा छोटा है। स्थानीय नागवंशी राजा द्वारा इस मंदिर का निर्माण लगभग 14 शताब्दी में करवाया गया था। गर्भ गृह के बीचो-बीच कृष्ण प्रस्तर निर्मित शिवलिंग स्थापित है तथा गणेश की मूर्ति रखी गई है।
निरन्तर बहता रानीदहरा जलप्रपात
रानी दहरा झरना कवर्धा का एक प्रसिद्ध प्राकृतिक पर्यटन स्थल है। यह झरना घने जंगलों के अंदर स्थित है। यहां पर चारों तरफ हरियाली देखने के लिए मिलती है। यहां पर ऊंची चट्टानों से पानी कुंड पर गिरता है। यह झरना चिल्फी घाटी के पास में स्थित है। इस झरने तक पहुंचने का, जो रास्ता है। वह 2 किमी जंगल से होकर जाता है। झरने के पास जाने के लिए सीढ़ियां बनी हुई है। इस झरने में पर्यटक आप नहाने का मजा लेते हैं। इस झरने में घूमने का सबसे अच्छा समय बरसात और ठंड का रहता है।
हरियाली से घिरा सुतियापाठ बांध
सुतियापाठ बांध कवर्धा के पास स्थित एक सुंदर जलाशय है। यह चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है। आप यहां बरसात के समय घूमने के लिए आएंगे, तो आपको बहुत प्रकृति का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। यहां पर हरियाली रहती है। यह जलाशय शहर से करीब 17 किलोमीटर दूर है। इसके साथ ही यहां छिरपानी बांध कवर्धा के पास स्थित एक सुंदर पर्यटन स्थल है। यह जलाशय भी चारों तरफ से पहाड़ों से घिरा हुआ है।यह बांध मुख्य रूप से आसपास की कृषि भूमि को सिंचित करने के लिए बनाया गया है। लेकिन यहां पर आकर आप पिकनिक मना सकते हैं।
पीठाघाट वाच टावर से देखें मैकाल पर्वत श्रंखला
पीठाघाट वॉचटावर कवर्धा शहर का एक मुख्य पर्यटन स्थल है। यह वॉचटावर भोरमदेव वन्यजीव अभ्यारण के अंदर स्थित है। इस वॉचटावर में पहुंचने के लिए, जो कच्ची सड़क है। लेकिन इस वॉचटावर पर पहुंचकर आपको, जो दृश्य देखने के लिए मिलेगा। वह आपकी सारी थकान दूर कर देता है। इस वॉच टावर से आप पूरी मैकाल पर्वत श्रंखला का अद्भुत नजारा देख सकते हैं।
भोरमदेव वन्य जीव अभयारण्य
भोरमदेव वन्यजीव अभयारण्य कवर्धा जिले में स्थित एक मुख्य पर्यटन स्थल है। यहां मैकल पर्वत श्रृंखलाओं का सुंदर नजारा आपको सहज ही आकर्षित करता है। इसके साथ ही विभिन्न प्रकार के पेड़ पौधे और जंगली जानवर हैं। भोरमदेव अभयारण्य 352 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। यह कान्हा राष्ट्रीय उद्यान और अचानकमार टाइगर रिजर्व को संरक्षण प्रदान करता है। भोरमदेव अभ्यारण मे बहुत से अज्ञात और सुंदर-सुंदर जलप्रपात और अनेक ऐतिहासिक स्थल हैं।
मैकल पर्वत से घिरा चिल्पी घाटी
चिल्पी घाटी कवर्धा शहर का एक प्रमुख प्राकृतिक पर्यटन स्थल है। यहां पर आपको प्रकृति का अनोखा नजारा देखने के लिए मिलता है। यहां पर आप आएंगे, तो आपको लगेगा कि आप बादलों के बीच में आ गए हैं। यह जगह बहुत ही सुंदर है। यहां पर वॉच टावर भी बना हुआ है, जहां से आप पूरी मैकल पर्वत श्रृंखलाओं का सुंदर दृश्य देख सकते हैं। यहां पर बरसात के समय आप आ सकते हैं। चिल्फी घाटी कवर्धा से मंडला आने वाली सड़क में नेशनल हाईवे 30 में स्थित है।
धार्मिक स्थल है नर्मदा धाम और कबीर टेकरी
झिरना नर्मदा धाम एक धार्मिक स्थल है। यहां पर शिव मंदिर बना हुआ है। यहां पर मुख्य आकर्षण शिव जी की बहुत बड़ी मूर्ति एक कुंड में विराजमान है। यह मंदिर कवर्धा से 10 किलोमीटर पिपरिया के पास में स्थित है। इसके साथ ही कबीर टेकरी कवर्धा में स्थित एक धार्मिक स्थल है। यह मंदिर एक ऊंची पहाड़ी पर बना हुआ है। यह मंदिर संत कबीर दास जी को समर्पित है। कबीर पंथ के लोगों के लिए यह मंदिर बहुत ही महत्वपूर्ण है। यह मंदिर कवर्धा में सहसपुर के पास में स्थित है। इस मंदिर के पास ही में बमलेश्वरी मंदिर भी स्थित है। यहां पर एक बहुत बड़ा जलाशय है, जिसका दृश्य बहुत ही आकर्षक रहता है।विज्ञापन
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