: बस्तर में हमलों की मास्टरमाइंड महिला नक्सली सुजाता गिरफ्तार: 1 करोड़ की है इनामी, हिडमा को ट्रेनिंग दी, 176 जवानों की शहादत में थी शामिल
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इन बड़ी वारदातों की थी साजिश
9 जुलाई 2007: सीआरपीएफ और जिला पुलिस के जवान एर्राबोर के उरपालमेटा में सर्चिंग के बाद बेस कैंप लौट रहे थे। तभी नक्सलियों ने घात लगाकर उन पर हमला कर दिया। इसमें 23 जवान शहीद हो गए।
6 अप्रैल 2010: बस्तर के ताड़मेटला में सीआरपीएफ के जवान सर्च ऑपरेशन के लिए निकले थे। नक्सलियों ने बारूदी सुरंग में विस्फोट कर दिया। इसमें 76 जवान शहीद हो गए।
17 मई 2010: दंतेवाड़ा से सुकमा जा रहे यात्री बस पर दंतेवाड़ा के गादीरास के पास नक्सलियों ने बारूदी सुरंग लगाकर हमला कर दिया। इसमें 12 विशेष पुलिस अधिकारियों समेत 36 लोग मारे गए।
25 मई 2013: बस्तर के झीरम घाटी में हुए नक्सली हमले में आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा, कांग्रेस पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 32 लोग मारे गए।
24 अप्रैल 2017: सुकमा जिले के चिंतागुफा के पास नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया। इसमें सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हो गए। हमले के दौरान जवान सड़क निर्माण के दौरान सुरक्षा के बीच खाना खा रहे थे।
21 मार्च 2020: सुकमा जिले के चिंतागुफा इलाके में डीआरजी और एसटीएफ के जवान सर्चिंग पर थे। कोरजागुड़ा पहाड़ी के पास छिपे नक्सलियों ने जवानों पर चारों तरफ से फायरिंग कर दी। इसमें 17 जवान शहीद हो गए।
3 अप्रैल 2021: बीजापुर जिले के टेकुलगुडेम में नक्सलियों ने सुरक्षा बलों की संयुक्त पार्टी पर घात लगाकर हमला किया। इस हमले में 21 जवान शहीद हो गए। एक जवान राकेश्वर मन्हास को नक्सलियों ने अगवा कर लिया। बाद में उसे छोड़ दिया गया।
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नक्सली संगठन में कई नामों से जानी जाती है सुजाता
नक्सली संगठन में सुजाता के कई चर्चित नाम हैं। उसे पद्मा, कल्पना, सुजाता, सुजातक्का, झांसीबाई कहा जाता है। बंगाल में उसे मैनीबाई के नाम से भी जाना जाता है। 12वीं तक पढ़ी सुजाता अंग्रेजी, हिंदी, बंगाली, ओडिया, तेलुगु के साथ-साथ गोंडी, हल्बी बोली भी जानती है।
किशनजी के साथ बंगाल से बस्तर आई थी
सुजाता नक्सली नेता कोटेश्वर राव उर्फ किशनजी की पत्नी है। किशनजी के साथ वह बंगाल से बस्तर आई थी। किशनजी को बंगाल का प्रभार दिए जाने के बाद वह कुछ समय बंगाल में ही रही। 2011 में किशनजी के मारे जाने के बाद वह बस्तर आ गई।
हिडमा समेत महिला विंग तैयार की
सुजाता को हार्डकोर नक्सली माना जाता है। आमतौर पर महिला नक्सली अपने पति की मौत के बाद संगठन छोड़ देती हैं, लेकिन सुजाता ने सरेंडर नहीं किया। उसका देवर सोनू सेंट्रल कमेटी का सदस्य है। सोनू की पत्नी भी नक्सली नेता है। सुजाता ने ही नक्सली कमांडर माड़वी हिडमा को तैयार किया था। संगठन में महिलाओं की भर्ती में उसकी अहम भूमिका रही है।
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