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: MP में करोड़पति कांस्टेबल बोला- 52 किलो सोना, 11 करोड़ मेरे नहीं: लोकायुक्त हिरासत में बताया जान को खतरा, अफसरों को पूरा हिसाब देने को तैयार

MP Crorepati constable Saurabh Sharma said- Gold and money are not mine: मध्यप्रदेश परिवहन विभाग के करोड़पति कांस्टेबल सौरभ शर्मा को जब छापेमारी के 41 दिन बाद विशेष कोर्ट में पेश किया गया तो सौरभ ने कहा कि न तो 52 किलो सोना और न ही उस कार में मिले 11 करोड़ रुपए उसके हैं। बाकी मिली संपत्ति और नकदी का वह पूरा हिसाब देने को तैयार है। गिरफ्तारी के महज 4 घंटे बाद ही लोकायुक्त पुलिस उसे कोर्ट में लेकर आई। लोकायुक्त ने कोर्ट से आगे की पूछताछ के लिए एक सप्ताह की रिमांड मांगी थी। इस पर सौरभ के वकील ने कोर्ट में दलील दी कि सौरभ तो सिर्फ मोहरा है। सौरभ की जान को उन लोगों से खतरा है, जिन्हें डर है कि उनके नाम उजागर हो जाएंगे। लोकायुक्त ने दलील दी कि अगर सौरभ मोहरा है तो मुख्य आरोपी तक पहुंचने के लिए सौरभ की पुलिस रिमांड जरूरी है। सौरभ और लोकायुक्त दोनों का पक्ष सुनने के बाद कोर्ट ने कहा कि रिमांड के दौरान सौरभ को पूरी सुरक्षा में रखा जाएगा। उसे दिए जाने वाले खाने-पीने के सामान भी चेक करने के बाद दिए जाएंगे। कोर्ट रूम में कटघरे में सौरभ सामान्य नजर आए। वह अपने दोस्त चेतन सिंह गौड़ से बात करता नजर आया। इस दौरान सौरभ की मां उमा शर्मा और चेतन के पिता भी कोर्ट रूम में नजर आए। सौरभ को 29 जनवरी को कोर्ट में पेश किया जाएगा। करोड़पति बने कॉन्स्टेबल की इनसाइड स्टोरी: मंत्री-अफसरों की मिलीभगत से करोड़ों की काली कमाई, जानिए 52KG सोना और 12 करोड़ का कनेक्शन ? वकील ने कहा- सरेंडर करने आया था, फिर गिरफ्तार क्यों किया गया? 28 जनवरी को सुबह 11 बजे जब सौरभ सरेंडर करने कोर्ट पहुंच रहा था, तो लोकायुक्त पुलिस ने गेट नंबर 3 के पास से नाटकीय ढंग से उसे गिरफ्तार कर लिया, जबकि इससे एक दिन पहले सौरभ सरेंडर करने कोर्ट में पेश हुआ था, लेकिन इस दौरान लोकायुक्त पुलिस उसे गिरफ्तार नहीं कर पाई थी। इस पर सौरभ के वकील ने भी आपत्ति जताई कि जब सौरभ सरेंडर करने आया था, तो फिर उसे गिरफ्तार क्यों किया गया? किससे है सौरभ की जान को खतरा…? सौरभ शर्मा के यहां लोकायुक्त की छापेमारी में परिवहन विभाग की चेकपोस्ट से जुड़ी रसीदें और पिस्टल भी मिली थीं। तब यह संदेह जताया गया था कि सौरभ चेकपोस्ट से जुड़े पैसे को सीधे हैंडल करता था। इस पूरे नेटवर्क में मंत्रियों और परिवहन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं। अब जबकि सौरभ लोकायुक्त की गिरफ्त में है, तो उससे यह भी पूछा जाएगा कि चेकपोस्ट की रसीद उसके घर कैसे पहुंची? उसने कितने चेकपोस्ट से पैसे वसूले? पूरे नेटवर्क में कौन-कौन लोग शामिल थे? चेकपोस्ट से कितना पैसा किसके पास गया? ये सभी ऐसे सवाल हैं जो प्रदेश के चेकपोस्ट में भ्रष्टाचार को उजागर कर सकते हैं। जाहिर है कि इस नेटवर्क में कई बड़े नाम शामिल हो सकते हैं। सौरभ के वकील राकेश पाराशर इन बड़े नामों की ओर इशारा कर रहे हैं। सौरभ 7 दिन की रिमांड पर है, ऐसे ही दूसरे मामले में जमानत क्यों? सौरभ के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का मामला दर्ज किया है। ऐसे मामलों में लोकायुक्त पुलिस आमतौर पर गिरफ्तारी नहीं करती। आरोपी को तुरंत जमानत दे दी जाती है। वर्ष 2004 में वाणिज्यिक कर विभाग के डिप्टी कमिश्नर ऋषभ जैन की पुलिस हिरासत में मौत के बाद लोकायुक्त पुलिस ने ऐसे मामलों में आरोपियों की गिरफ्तारी बंद कर दी थी। ऐसे में सौरभ की गिरफ्तारी के बाद एक सप्ताह की पुलिस रिमांड की जरूरत भी कई बातों की ओर इशारा कर रही है। सौरभ के वकील पाराशर का तर्क है कि सौरभ 27 जनवरी को ही सरेंडर करने आया था। कोर्ट ने ही 28 जनवरी की तारीख दी थी। हमने कोर्ट से कहा था कि हम जांच में पूरा सहयोग करने के लिए तैयार हैं। इसके बावजूद आय से अधिक संपत्ति के मामले में एक सप्ताह की रिमांड की जरूरत क्यों है? यही वजह है कि हमने कोर्ट से कहा है कि पुलिस हिरासत में सौरभ की जान को खतरा है। Read More- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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