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: सावधान! अनजान फोटो पर क्लिक किया, खाते से उठे 2 लाख: पीड़ित ने कहा- वॉट्सऐप पर फोटो आई, पूछा- क्या आप इस व्यक्ति को जानते हैं?

MP Jabalpur 2 lakhs deducted from account after clicking on an unknown photo: एमपी के जबलपुर में एक व्यक्ति के व्हाट्सएप पर किसी अनजान नंबर से फोटो भेजी गई और जैसे ही उसने उस पर क्लिक किया, मोबाइल अपने आप हैक हो गया. कुछ ही देर में बैंक खाते से 2 लाख 1 हजार रुपए निकल गए. ठगों ने फोटो में छिपे लिंक के जरिए फोन पर एक ऐप डाउनलोड करवाया, जिससे ओटीपी और बैंक डिटेल सीधे उनके पास आ गई. पीड़ित ने इस घटना की शिकायत साइबर सेल और कोतवाली थाने में की. कोतवाली इलाके में रहने वाले प्रदीप जैन 28 तारीख को अपने घर पर थे. सुबह करीब 9 बजे उनके मोबाइल पर किसी अनजान नंबर (9827832213) से कॉल आया. कॉल करने वाले ने उनके व्हाट्सएप पर एक फोटो भेजा और पूछा, "क्या आप इस व्यक्ति को जानते हैं?" फोटो एक बुजुर्ग व्यक्ति की थी. प्रदीप ने पहले मैसेज और कॉल को नजरअंदाज कर दिया. लेकिन कुछ देर बाद फिर से वही कॉल आया और वही सवाल पूछा गया. दोपहर करीब 1:35 बजे फिर से उसी नंबर से कॉल आया. इस बार प्रदीप जैन ने गुस्से में जवाब दिया, "मैं इस व्यक्ति को नहीं जानता!" और फोन काट दिया। ऐप डाउनलोड होते ही मोबाइल हैक हो गया इस घटना के कुछ देर बाद ही प्रदीप जैन के मोबाइल पर "कस्टमर सपोर्ट" नाम का ऐप अपने आप डाउनलोड हो गया। इसी दौरान साइबर ठगों ने उनके मोबाइल को हैक कर लिया। दोपहर में उनके मोबाइल पर केनरा बैंक से मैसेज अलर्ट आया। पहले उनके खाते में 1 रुपए जमा हुए। फिर कुछ ही मिनटों में उनके खाते से 1 लाख और फिर 1 लाख 1 हजार रुपए निकल गए। प्रदीप जैन को समझ में नहीं आया कि यह सब कैसे हो रहा है। वह तुरंत बैंक पहुंचे और बैलेंस चेक किया तो उनके खाते से 2 लाख 1 हजार रुपए निकल चुके थे। उन्होंने तुरंत अकाउंट सीज करवाया और साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। [caption id="attachment_68323" align="alignnone" width="512"] पीड़ित[/caption] हैदराबाद के एटीएम से निकाले गए पैसे बैंक स्टेटमेंट की जांच में पता चला कि यह ट्रांजेक्शन "आईबी आईबीएफ" नाम के अकाउंट से हुआ है। यह अकाउंट हाल ही में हैदराबाद के केनरा बैंक में खोला गया था। ठगों ने एटीएम के जरिए सारा पैसा निकाल लिया। प्रदीप जैन की पासबुक में "विशाल ऑनलाइन" और "जन्नतुन बीबी ऑनलाइन" के नाम से संदिग्ध ट्रांजेक्शन दिखा। साइबर जालसाजों ने सुबह 9:38 बजे से शाम 5:12 बजे तक लगातार व्हाट्सएप पर डॉट (.) मैसेज भेजकर यह जांच की कि वह ऑनलाइन है या नहीं। जालसाज ने फिर से पैसे निकालने की कोशिश की प्रदीप जैन के खाते से पैसे निकलने के बाद उन्होंने तुरंत उसे सीज करवा दिया। लेकिन इसके बावजूद जालसाज ने 96 हजार रुपये का दूसरा ट्रांजेक्शन करने की कोशिश की। साइबर जालसाज लगातार मैसेज करके एक्सेस पाने की कोशिश कर रहा था, हालांकि खाता सीज होने की वजह से वह इसमें सफल नहीं हो पाया। पीड़ित ने कहा- बैंक ने भी लापरवाही बरती प्रदीप जैन ने बताया कि जब उन्होंने बैंक को इस धोखाधड़ी की जानकारी दी तो बैंक ने तुरंत कार्रवाई करने से मना कर दिया और कहा कि पहले साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराएं। साइबर हेल्पलाइन ने भी तुरंत रिपोर्ट नहीं ली। ऐसे में उन्हें अगले दिन बैंक जाकर लिखित शिकायत देनी पड़ी। साइबर सेल और कोतवाली थाना पुलिस अब इस मामले की जांच कर रही है। पीड़ित ने बताया कि जालसाजों को सीधे कॉल और मैसेज आ रहे थे प्रदीप कुमार जैन ने बताया कि पहले फोन पर 'ग्राहक सेवा' नाम का ऐप अपने आप डाउनलोड हो जाता था। इस ऐप पर जालसाज के व्हाट्सएप नंबर से मिलती-जुलती डिस्प्ले पिक्चर (डीपी) होती थी। प्रदीप कुमार ने बताया कि ठगी होने से पहले कई बार ओटीपी मैसेज भेजे गए। मेरा पूरा कॉल लॉग और मैसेज जालसाज के पास पहुंच रहे थे, जिसमें मेरा बैंक बैलेंस और डिटेल भी शामिल थी। जब साइबर जालसाज द्वारा ऑनलाइन पैसे निकाले जाने की जांच के लिए केनरा बैंक से कॉल किया गया तो साइबर जालसाज ने मेरी तरफ से जवाब दिया और खुद को मेरा बताकर ठगी की। अब जालसाज लिंक नहीं, फोटो भेजकर ठगी कर रहे हैं पुलिस साइबर सेल अधिकारी नीरज नेगी ने बताया कि पहले जालसाज ओटीपी और फिशिंग लिंक के जरिए ठगी करते थे। जब लोग सतर्क हो गए तो अब उन्होंने स्टेग्नोग्राफी नाम की तकनीक अपना ली है। इसमें जालसाज व्हाट्सएप पर सामान्य फोटो भेजकर ठगी करते हैं। जैसे ही कोई इस पर क्लिक करता है, एक अदृश्य लिंक सक्रिय हो जाता है, जो मोबाइल में एक एप्लीकेशन डाउनलोड कर देता है। इसके बाद जालसाज को उस मोबाइल का पूरा एक्सेस मिल जाता है और वह बैंक खाते से पैसे निकाल लेता है।

अनजान फोटो के जरिए हो रही साइबर ठगी

  • सबसे पहले ठग वॉट्सऐप पर इमेज भेजते हैं, जिसमें अदृश्य लिंक छिपी होती है।
  • जैसे ही फोटो डाउनलोड होती है, मोबाइल पर ऑटोमैटिक एक ऐप इंस्टॉल हो जाता है।
  • इस ऐप के जरिए ठग ओटीपी और अन्य जानकारी चुरा लेते हैं।
  • इसके बाद, वे बैंक खाता हैक कर उसमें नया नेट बैंकिंग खाता बनाते हैं।
  • डेबिट कार्ड को ब्लॉक (Hotlist) कर देते हैं, ताकि असली मालिक इसका इस्तेमाल न कर सके।
  • ओटीपी इंटरसेप्ट कर नेट बैंकिंग के जरिए पैसे ट्रांसफर कर लेते हैं।

ऐसे बचें साइबर ठगी से

  • अज्ञात नंबर से आई वॉट्सऐप फोटो को न खोलें।
  • फोन में अनावश्यक ऐप्स की नियमित जांच करें।
  • संदिग्ध कॉल को तुरंत ब्लॉक करें और रिपोर्ट करें।
  • बैंकिंग से जुड़े किसी भी संदिग्ध लेन-देन पर तुरंत बैंक से संपर्क करें।
  • नेट बैंकिंग एक्सेस देने से पहले बैंक के सुरक्षा प्रोटोकॉल की जांच करें।
Read More- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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