'राम' नाम के अपमान से खुले 'परीक्षा कांड' के किरदार ? : विवादित पेपर की प्रिंटिंग के लिए बदले गए नियम, DPI की कमेटी ने चुने प्रश्न, लेकिन सिर्फ DEO पर उठे सवाल
गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के महासमुंद के बाद अब Gariband district में कक्षा चौथी के प्रश्न पत्र को लेकर उठा विवाद सिर्फ एक सवाल या एक जिले तक सीमित नहीं रहा। Class 4 question paper controversy ने अब सीधे education system failure को उजागर कर दिया है। जिस सवाल में भगवान राम (Lord Ram) के नाम को लेकर आपत्तिजनक संदर्भ सामने आया, उसने यह साफ कर दिया कि मामला जिला स्तर की लापरवाही नहीं, बल्कि Directorate of Public Instruction (DPI) से शुरू हुई एक गंभीर चूक का है।
प्रश्नपत्र में एक वस्तुनिष्ठ प्रश्न के तहत पूछा गया था कि ‘मोना के कुत्ते का नाम क्या है? इसके चार विकल्पों में ‘राम’ नाम भी शामिल था। अन्य विकल्प बाला, शेरू और ‘कोई नहीं’ दिए गए थे। इस सवाल को लेकर विरोध शुरू हो गया है। ये प्रश्न पत्र रायपुर संभाग के बलौदाबाजार, भाटापारा, महासमुंद, धमतरी और गरियाबंद जिले में बांटा गया है। क्वेश्चन पेपर बिना ठीक से वेरिफाई किए हर जिले में डिस्ट्रीब्यूट किए गए थे।
शुरुआती कार्रवाई में भले ही District Education Officer (DEO) पर जिम्मेदारी डालने की कोशिश की जा रही हो, लेकिन हकीकत यह है कि प्रश्नों का चयन और स्वीकृति DPI-level committee द्वारा की गई। ऐसे में यह सवाल स्वाभाविक है कि क्या DEO scapegoat बनाए जा रहे हैं और असली जिम्मेदारों को बचाने की कोशिश हो रही है?

VHP-Bajrang Dal का ऐलान, FIR की चेतावनी
गरियाबंद में मामला सामने आने के बाद Vishwa Hindu Parishad (VHP) और Bajrang Dal protest की तैयारी तेज हो गई है। बजरंग दल नेता Mohit Sahu ने सोशल मीडिया के जरिए ऐलान किया है कि दोपहर 2 बजे Gariband Tiranga Chowk में समस्त हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता एकत्र होंगे।
संगठनों ने साफ कहा है कि Lord Ram insult case में जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ FIR demand की जाएगी। उनका आरोप है कि यह केवल एक अकादमिक गलती नहीं, बल्कि systematic negligence और धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ का मामला है।

पूरे रायपुर संभाग में एक जैसे प्रश्न पत्र, DPI की भूमिका सवालों में
मामले की ground investigation में यह खुलासा हुआ है कि विवादित प्रश्न पत्र सिर्फ महासमुंद और गरियाबंद में नहीं, बल्कि पूरे Raipur division के पांचों जिलों में एक जैसे थे। यह तथ्य अपने आप में साबित करता है कि प्रश्न पत्रों की छपाई और वितरण district level पर नहीं, बल्कि division-level centralized printing के जरिए हुआ।
जानकारी के अनुसार, Lok Shikshan Sanchanalaya (DPI) द्वारा गठित कमेटी ने प्रश्नों का चयन किया और उसके बाद संभाग स्तर पर एक ही printing press को सभी जिलों की जिम्मेदारी सौंप दी गई। यहां से सवाल उठता है कि जब local exams guidelines जिला स्तर पर संचालन और छपाई की अनुमति देती हैं, तो फिर इस प्रक्रिया को संभाग स्तर पर क्यों ले जाया गया?

प्रिंटिंग प्रेस की जांच क्यों नहीं?
इस पूरे विवाद में सबसे संवेदनशील और अहम पहलू है Shubham Printing Press की भूमिका। करीब ₹2 crore exam printing budget की छपाई इसी प्रिंटिंग प्रेस से कराई गई। जबकि पूर्व में यही कार्य Raipur-based printing press से होता था।
प्रश्न यह है कि printing location change क्यों हुआ? क्या यह महज संयोग है या इसके पीछे political influence, favouritism और policy manipulation जैसे तत्व भी शामिल हैं? जानकारों का कहना है कि यदि प्रश्न पत्र में आपत्तिजनक सामग्री छपी है, तो केवल प्रश्न बनाने वाले ही नहीं, बल्कि printing verification process और प्रेस की जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए।
विवादित प्रश्न पत्र कहां छापा गया था ?
वहीं विवादित प्रश्न पत्र राजनांदगांव के शुभम प्रिंटिंग प्रेस में छापा गया था। प्रिंटिंग प्रेस के मालिक आदेश श्रीवास्तव ने कहा कि उन्होंने प्रश्न पत्र वैसा ही छापा जैसा उन्हें दिया गया था।
नियम जिला स्तर के, लेकिन फैसला संभाग स्तर पर
माध्यमिक शिक्षा मंडल की official guidelines के अनुसार प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तर की स्थानीय परीक्षाओं का संचालन district administration के तहत होना चाहिए। छात्रों की संख्या के हिसाब से हर जिले को अलग-अलग exam printing budget allocation किया जाता है—गरियाबंद को लगभग ₹18 lakh, जबकि बड़े जिलों को ₹30 lakh से अधिक।
इसके बावजूद सभी जिलों के बजट को अप्रभावी कर centralized division-level printing का रास्ता अपनाया गया। आरोप है कि इसका मकसद politically connected printing operators को आर्थिक लाभ पहुंचाना था। इस प्रक्रिया में DPI as nodal authority की भूमिका निर्णायक रही।
तिल्दा में सेट हुआ था विवादास्पद प्रश्न पत्र ?
मीडिया रिपोर्टर्स के अनुसार रायपुर संभाग के महासमुंद, गरियाबंद, धमतरी, बलौदाबाजार और रायपुर सभी जिलों के लिए एक ही प्रश्न पत्र रायपुर से सेट किया गया था। विवादास्पद प्रश्न वाला अंग्रेजी का प्रश्न पत्र तिल्दा में सेट किया था। इसलिए विवादास्पद प्रश्न पत्र सिर्फ महासमुंद नहीं बल्कि सभी जिलों में बंट गया।
विवादास्पद प्रश्न को लेकर विहिप और बजरंग दल ने इसका खुलासा महासमुंद में करते हुए प्रदर्शन किया था। इसलिए शुरू में ऐसा लगा कि महासमुंद में ही गड़बड़ी हुई, जबकि यही प्रश्न पत्र सभी जिलों में बांटा गया। मामले को लेकर शिक्षक और अधिकारी पर कल निलंबन की गाज गिर सकती है।
जिला शिक्षा अधिकारी पूरी तरह जिम्मेदार- रायपुर संभागीय संयुक्त संचालक
रायपुर संभागीय संयुक्त संचालक संजीव श्रीवास्तव ने बताया कि महासमुंद DEO विजय लाहरे दोषी पाए गए हैं। उनको जानकारी थी कि प्रश्नपत्र और छपे हुए प्रश्नपत्र एक जैसे नहीं थे। इसके बावजूद उन्होंने गलती को सुधारने के लिए कोई कदम नहीं उठाया। जिला शिक्षा अधिकारी पूरी तरह जिम्मेदार हैं।
असली सवाल: जिम्मेदारी किसकी?
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या इस पूरे मामले में सिर्फ DEO responsibility तय कर ली जाएगी, या फिर DPI accountability, printing press role और नीति स्तर पर लिए गए फैसलों की भी निष्पक्ष जांच होगी? राम के नाम से जुड़े इस विवाद ने यह साफ कर दिया है कि मामला धार्मिक भावनाओं के साथ-साथ administrative ethics और governance failure से भी जुड़ा है।
अगर जांच सिर्फ निचले अधिकारियों तक सीमित रही, तो यह साफ होगा कि system बचाया गया और अफसरों की बलि दी गई। लेकिन अगर DPI और प्रिंटिंग प्रेस की भूमिका की भी जांच होती है, तभी यह माना जाएगा कि सरकार इस पूरे मामले को रही है।
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