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राजिम कुंभ मेले में 6 करोड़ के खेला की तैयारी ? : 3 दिन में टेंडर क्लोजिंग से मचा बवाल, कांग्रेस नेता सुखचंद बेसरा बोले-क्या पहले से तय है टेंडर, प्रकिया पर उठाए सवाल

गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद (Gariaband News) में Rajim Kumbh Mela 2026 के आयोजन से पहले ही Event Tender Controversy ने तूल पकड़ लिया है। करीब 6 करोड़ रुपए के इवेंट प्रोजेक्ट (6 Crore Event Project) के लिए जिला कलेक्टर कार्यालय द्वारा जिस तरह से टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है, उस पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। कांग्रेस का आरोप है कि सब कुछ पहले से तय (Pre-Decided Tender) किया गया है और टेंडर प्रक्रिया सिर्फ औपचारिकता बनकर रह गई है।

जंबूरी कैंप विवाद के बीच राजिम कुंभ इवेंट टेंडर भी चर्चा में

Jamboree Camp Event Tender Case अभी शांत भी नहीं हुआ था कि अब Rajim Kumbh Event Tender को लेकर नया विवाद सामने आ गया है। सरकार और भाजपा नेता बृजमोहन अग्रवाल आमने-सामने हैं, वहीं विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर तंज कस रहा है। इसी राजनीतिक माहौल के बीच जिला कलेक्टर कार्यालय द्वारा जारी इवेंट टेंडर ने प्रशासनिक पारदर्शिता (Administrative Transparency) पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

टेंडर टाइमलाइन पर उठे सवाल, 3 दिन में क्लोजिंग

जिला कलेक्टर कार्यालय द्वारा आज एक अखबार में Event Tender Notice प्रकाशित किया गया। लेकिन जैसे ही टेंडर की Timeline सामने आई, सवालों की बौछार शुरू हो गई। प्रकाशित टेंडर के मुताबिक RAJIM KUMBH EVENT के लिए दो अलग-अलग टेंडर जारी किए गए हैं।

7 तारीख – अखबार में टेंडर प्रकाशन

8 तारीख – Pre Bid Meeting

9 तारीख – Bid Submission

10 तारीख – PPT Presentation और Bid Closing

यानी महज तीन दिनों के भीतर टेंडर क्लोज (Tender Closing in 3 Days) किया जा रहा है, जिसे जानकार Tender Norms Violation मान रहे हैं।

नियमों के खिलाफ टेंडर प्रक्रिया का आरोप

जानकारों के मुताबिक छत्तीसगढ़ ही नहीं, बल्कि देशभर में किसी भी Online Tender Process में टेंडर प्रकाशन और क्लोजिंग के बीच कम से कम 21 दिन का समय दिया जाना आवश्यक होता है। ताकि इच्छुक ठेकेदार तकनीकी दस्तावेज, फाइनेंशियल बिड और प्रेजेंटेशन की तैयारी कर सकें।

तीन दिन में टेंडर क्लोज करना Rule Against Procurement Norms माना जा रहा है, जिससे निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा (Fair Competition) पर सवाल खड़े हो गए हैं।

कांग्रेस ने उठाए गंभीर सवाल, पूर्व-निर्धारित ठेके का आरोप

इस पूरे मामले में Congress Reaction सामने आ गई है। कांग्रेस जिला अध्यक्ष सुखचंद बेसरा ने टेंडर प्रक्रिया पर खुलकर सवाल उठाए हैं। बेसरा का कहना है कि Bid Submission और PPT Presentation के लिए ठेकेदारों को तैयारी में कम से कम 5 दिन लग जाते हैं।

उनका आरोप है कि इस तरह की जल्दबाजी में वही Construction Company या Event Firm भाग ले सकती है, जो पहले से पूरी तैयारी में है। बेसरा ने कहा कि साफ है कि जिसे काम देना है, वह पहले से तय है, इसलिए जिला प्रशासन ने नियमों को ताक पर रख दिया है।

कलेक्टर का पक्ष नहीं आया सामने

मामले में जिला कलेक्टर भगवान सिंह उईके से पक्ष जानने के लिए कॉल किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया। ऐसे में District Administration Silence भी सवालों को और गहरा कर रहा है।

पहले पर्यटन विभाग के अधीन था करोड़ों का इवेंट बजट

गौरतलब है कि अब तक राजिम कुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन में Event Management और करोड़ों के खर्च की जिम्मेदारी पर्यटन विभाग / पर्यावरण-धर्मस्व मंत्रालय के अधीन रहती थी। लेकिन पहली बार भाजपा सरकार ने यह जिम्मेदारी सीधे कलेक्ट्रेट (Collectorate Control) को सौंपी है।

हालांकि इस बदलाव के साथ ही यदि Tender Process में ही अनियमितता के आरोप लग रहे हैं, तो पूरे आयोजन की Planning and Execution पर भी सवाल उठना लाजमी है।

नियोजित आयोजन या नियोजित खेल?

राजिम कुंभ जैसे बड़े धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में Public Money Utilization का मामला जुड़ा होता है। ऐसे में टेंडर प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं होना न सिर्फ प्रशासनिक चूक मानी जा रही है, बल्कि इससे सरकार की मंशा पर भी सवाल उठ रहे हैं। विपक्ष इसे Jamboree Part-2 बता रहा है, वहीं आने वाले दिनों में यह मामला और तूल पकड़ सकता है।

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