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Chemical Free गुड़ Lakhpati बनीं ममता : गरियाबंद में Organic Jaggery Business से लाखों की कमाई, जानिए Rural Economy कैसे हो रही Boost ?

गिरीश जगत, गरियाबंद। कम लागत, देसी जुगाड़, परिवार की मेहनत और शुद्ध देशी गुड़ की मिठास ने मैनपुर ब्लॉक के सिहारलटी गांव की ममता यादव और उनके परिवार की जिंदगी बदल दी है। Self Employment और Rural Livelihood का यह मॉडल आज ग्रामीण अर्थव्यवस्था (Rural Economy) में मिसाल बन चुका है। छत्तीसगढ़ शासन की बिहान योजना और National Livelihood Mission से जुड़कर मजदूरी करने वाली महिलाएं अब स्वरोजगार के जरिए आत्मनिर्भर बन रही हैं।

यह प्रेरणादायक कहानी है मैनपुर ब्लॉक के अमलीपदर क्लस्टर की, जहां 2017 से Livelihood Mission के तहत महिलाओं को संगठित कर उन्हें प्रशिक्षण और लोन दिया गया। सिहारलटी गांव की ममता यादव 2017 में बिहान से जुड़ीं और तीन चरणों में 90 हजार रुपये का लोन लिया। शुरुआत में सेंट्रिंग प्लेट के काम से आमदनी हुई, फिर पति के साथ कृषि कार्य में जुड़ते हुए गन्ने की खेती शुरू की।

आधा एकड़ जमीन में गन्ने की फसल लेने के बाद ममता ने पति जगराम यादव और पूरे परिवार के साथ मिलकर Organic Jaggery यानी शुद्ध देशी गुड़ बनाने का काम शुरू किया। महंगी मशीनों की जगह परिवार ने किफायती देसी जुगाड़ अपनाया। मवेशी जोड़ी महंगी पड़ रही थी, ऐसे में पति ने बाइक को रस्सी से घानी में बांधकर गन्ना पेराई शुरू कर दी। ममता खुद घानी को संभालती हैं, पति बाइक चलाते हैं और बच्चे भी इस Family Based Enterprise में हाथ बंटाते हैं।

Organic Jaggery Business | 2 लाख की बिक्री एक सीजन में

एक सीजन में 20 से 25 दिनों तक रोजाना यह काम चलता है। प्रतिदिन लगभग 75 किलो शुद्ध गुड़ तैयार होता है। 12 घंटे बाइक चलाने में 4 लीटर पेट्रोल यानी करीब 400 रुपये का खर्च आता है, वहीं गन्ना तोड़ने और सहयोगी मजदूरों पर 800 से 1000 रुपये खर्च होते हैं। इसके बावजूद रोजाना 7 से 8 हजार रुपये का गुड़ तैयार हो जाता है। इस तरह एक सीजन में करीब 2 लाख रुपये की बिक्री होती है, जबकि कुल खर्च महज 35 हजार रुपये के आसपास आता है।

गन्ने की खेती पर आधा एकड़ में एक बार करीब 50 हजार रुपये की लागत लगती है, लेकिन यही खेती चार बार होती है। इस हिसाब से एक सीजन का वास्तविक खर्च करीब 15 हजार रुपये ही पड़ता है। Organic Farming और गुड़ व्यवसाय से ममता का परिवार एक सीजन में सवा लाख रुपये से ज्यादा की कमाई कर रहा है, जिससे वे Lakhpati Didi की श्रेणी में आ चुकी हैं।

Pure Desi Jaggery | Chemical Free Product

ममता के यहां बनने वाला शुद्ध देशी गुड़ पूरी तरह Chemical Free होता है। गन्ने के रस को बड़ी कढ़ाही में करीब तीन घंटे तक खौलाया जाता है। पकने के बाद गाढ़े रस को लकड़ी के डोंगे में डालकर ठंडा किया जाता है। यही कारण है कि इस Pure Desi Jaggery में स्वाद और खुशबू बनी रहती है। ममता के खलिहान से यह गुड़ मात्र 120 रुपये प्रति किलो में मिल जाता है, जबकि बाजार में यही गुड़ 130 से 150 रुपये किलो तक बिकता है। शुद्धता और स्वाद के कारण गुड़ बनते ही हाथों-हाथ बिक जाता है।

Amliapadar Cluster | 3000 से ज्यादा Lakhpati Didi

अमलीपदर क्लस्टर जिले का सबसे बड़ा क्लस्टर बन चुका है। क्लस्टर इंचार्ज निधि साहू बताती हैं कि इस इलाके में महिलाएं मेहनती थीं, लेकिन उन्हें अपने हुनर को व्यवसाय में बदलने का तरीका नहीं पता था। 2017 में विशेष अभियान चलाकर 833 महिला स्वसहायता समूह बनाते हुए 10,833 महिलाओं को Bihan Yojana और Livelihood Mission से जोड़ा गया।

आज अमलीपदर क्लस्टर में 600 समूहों की 6 हजार से ज्यादा महिलाओं को 12 करोड़ रुपये से अधिक का लोन दिया जा चुका है। इनमें से 3000 से ज्यादा महिलाएं सालाना 1 लाख रुपये से ज्यादा कमा कर Lakhpati Didi बन चुकी हैं। महिलाएं किराना दुकान, मछली पालन, मसाला निर्माण, पापड़, फिनाइल, सब्जी बाड़ी, जैविक खेती जैसे कार्य कर रही हैं, जिन्हें पहले पुरुषों का काम माना जाता था।

Women Empowerment की इस मिसाल ने साबित कर दिया है कि सही प्रशिक्षण, समय पर लोन और परिवार के सहयोग से ग्रामीण महिलाएं मजदूर से मालिक बन सकती हैं। राष्ट्रीय आजीविका मिशन और बिहान योजना ने न सिर्फ महिलाओं को रोजगार दिया है, बल्कि गांवों की तस्वीर भी बदल दी है।

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