BJP के 'मंत्री' जी तो 'जहर' तस्कर निकले ! : गरियाबंद में गाड़ी से मिली अवैध शराब, 5 लोग कर रहे थे तस्करी, जानिए कौन हैं ये रसूखदार ?
गरियाबंद, गिरीश जगत। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले की शांत रात उस वक्त अचानक बेचैन हो गई, जब फिंगेश्वर पुलिस की कार्रवाई ने पूरे इलाके में हलचल मचा दी। बाहर से सब कुछ सामान्य लग रहा था, लेकिन सड़क पर दौड़ रही एक सफेद सुमो गोल्ड के भीतर ऐसा ज़हर छिपा था, जो गांव-गांव तक तबाही फैला सकता था।
राजनीतिक पहचान, सामाजिक रसूख और जनप्रतिनिधि होने का दावा—इन सबके पीछे चल रहा था अवैध महुआ शराब का धंधा (Illegal Mahua Liquor Network), जिसे पुलिस ने ऐन मौके पर बेनकाब कर दिया।

मुखबिर की सूचना और पुलिस का त्वरित एक्शन
शुक्रवार देर रात फिंगेश्वर थाना पुलिस को एक भरोसेमंद मुखबिर से सूचना मिली। बताया गया कि कुछ रसूखदार लोग एक चारपहिया वाहन में भारी मात्रा में कच्ची महुआ शराब भरकर छुरा रोड से होते हुए गांव की ओर बढ़ रहे हैं।
सूचना मिलते ही पुलिस हरकत में आ गई। थाना प्रभारी के निर्देश पर टीम ने बिना वक्त गंवाए सड़क पर नाकाबंदी कर दी। यह कोई रूटीन चेकिंग नहीं थी, बल्कि पूरी तैयारी के साथ किया गया (Planned Operation) था।
नाकाबंदी में फंसी सुमो, खुला राज
कुछ ही देर में वही सुमो गोल्ड सामने आ गई, जिसका जिक्र मुखबिर ने किया था। जैसे ही पुलिस ने वाहन रोका, अंदर बैठे लोगों के चेहरे उतर गए। तलाशी के दौरान पीछे रखी दो बड़ी प्लास्टिक जरकीनों ने सारी कहानी बयां कर दी।
35-35 लीटर की इन जरकीनों में कच्ची महुआ शराब भरी हुई थी—वही शराब, जिसे गांवों में सस्ती नशे की लत और झगड़ों की जड़ माना जाता है। मौके पर ही शराब जब्त कर वाहन को सीज कर दिया गया।

नाम सामने आते ही बढ़ा मामला
पूछताछ में चालक ने अपना नाम खिलेश साहू बताया। उसके साथ वाहन में मौजूद अन्य लोगों की पहचान घनाराम साहू, त्रिलोकी वर्मा, डिगेश साहू और नरसुराम ध्रुव के रूप में हुई।
जैसे ही नरसुराम ध्रुव का नाम सामने आया, पूरा मामला राजनीतिक रंग लेने लगा। वह भाजपा मंडल कोपरा का मंत्री बताया गया और ग्राम सहसपुर के सरपंच का पति भी है। इसके अलावा एक आरोपी का पूर्व जनपद सभापति रहना, इस केस को और संवेदनशील बना गया।
रसूख के पीछे छुपा अवैध कारोबार
ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर कहते हैं कि बड़े नामों की गाड़ियों को कोई रोकता नहीं। लेकिन इस बार पुलिस ने साफ कर दिया कि कानून सबके लिए बराबर है। पूछताछ में आरोपियों ने अवैध रूप से महुआ शराब के परिवहन की बात स्वीकार की। यह सिर्फ एक खेप नहीं थी, बल्कि एक बड़े (Supply Chain) की ओर इशारा कर रही थी।
कानूनी शिकंजा और जेल का रास्ता
पुलिस ने आबकारी अधिनियम के तहत मामला दर्ज कर पांचों आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार किया। शनिवार को उन्हें न्यायालय में पेश किया गया, जहां से सभी को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। इस कार्रवाई के बाद पूरे जिले में चर्चाओं का दौर शुरू हो गया—कौन, कब और कितनी गहराई तक इस धंधे में शामिल है?
सवाल राजनीति पर भी
यह मामला सिर्फ शराब तस्करी का नहीं रहा। जब राजनीतिक पदों से जुड़े नाम सामने आते हैं, तो स्वाभाविक है कि जनता सवाल पूछे। क्या अवैध शराब का कारोबार (Liquor Mafia) राजनीतिक संरक्षण में फल-फूल रहा है? क्या गांवों में फैल रहे नशे के पीछे ऐसे ही रसूखदार चेहरे हैं?
पुलिस का सख्त संदेश
फिंगेश्वर पुलिस ने साफ कहा है कि यह कार्रवाई अंत नहीं, बल्कि शुरुआत है। अवैध शराब के स्रोत, सप्लाई और नेटवर्क से जुड़े हर लिंक को खंगाला जा रहा है। पुलिस का संदेश दो टूक है—न पद काम आएगा, न पहचान। कानून से ऊपर कोई नहीं।
इस एक रात की कार्रवाई ने न सिर्फ एक गाड़ी को रोका, बल्कि जिले में चल रही कई खामोश कहानियों को भी उजागर कर दिया। अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि जांच आगे किन-किन चेहरों से नकाब उठाती है।

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