छत्तीसगढ़ से 10 राज्यों में बिजली सप्लाई, लेकिन अपने अंधेरे में : 20 आदिवासी गांवों से कैसी कपट, सड़क पर उतरे सैंकड़ों परिवार, बोले-बिजली मांग रहे, भीख नहीं
गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ सरकार खुद को Power Surplus State बताकर बिहार, झारखंड, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, तेलंगाना, गुजरात, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र, चंडीगढ़, दिल्ली और हरियाणा जैसे करीब 10 राज्यों को बिजली सप्लाई कर रही है, लेकिन गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक में बसे आदिवासी गांव आज भी अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। राजापड़ाव क्षेत्र की 8 पंचायतों के 20 से अधिक गांवों में आज तक Electricity Connection नहीं पहुंच पाया है।
नेशनल हाईवे 130-C पर ग्रामीणों का उग्र प्रदर्शन
बिजली की मांग को लेकर सैकड़ों ग्रामीणों ने National Highway 130-C को जाम कर दिया, जिससे सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। करीब 30 गांवों से आए दो हजार से ज्यादा महिला-पुरुषों ने मिलकर हाईवे पर बैठकर सरकार के खिलाफ विरोध दर्ज कराया। यह बीते एक साल में चौथी बार है जब ग्रामीणों को Highway Protest करना पड़ा है।
उदंती-सीतानदी अभयारण्य बना बहाना, बिजली नहीं पहुंची
यह पूरा इलाका Udanti Sitanadi Wildlife Sanctuary के Core Zone में आता है। प्रशासन ने यहां Underground Power Line डालने की मंजूरी दी थी, लेकिन बजट का हवाला देकर काम शुरू ही नहीं किया गया। जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने साफ कहा कि सरकार की उदासीनता के कारण गांव आज भी अंधेरे में डूबे हुए हैं।

8 पंचायतों में सिर्फ 3 में आंशिक बिजली
राजापड़ाव क्षेत्र की 8 पंचायतों में से केवल अड़गड़ी, शोभा और गोना पंचायतों में आंशिक रूप से बिजली पहुंची है। भूतबेड़ा, कुचेंगा, कोकड़ी, गरहाडीह और गौरगांव पंचायतें आज भी पूरी तरह Electricity Deprived Villages बनी हुई हैं, जहां रात होते ही सन्नाटा और अंधेरा छा जाता है।
पेसा कानून और संविधान का खुला उल्लंघन
यह क्षेत्र Scheduled Area है जहां PESA Act 1996 लागू होता है। इसके बावजूद यहां के आदिवासियों को बुनियादी सुविधा तक नहीं दी जा रही। यह सीधे-सीधे संविधान के अनुच्छेद 14, 21 और 21-A यानी समानता, जीवन और शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है।

बिजली अब सुविधा नहीं, मूल अधिकार है
आज बिजली केवल सुविधा नहीं बल्कि Basic Human Right बन चुकी है। इसके बिना बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा, किसानों की सिंचाई और गांवों की आजीविका सब ठप हो जाती है। अंधेरे में जीना किसी भी नागरिक के लिए अपमानजनक है।
2023 के बाद अचानक रोक दिया गया काम
ग्रामीणों के अनुसार इन पंचायतों के लिए विद्युतीकरण की मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी और काम भी शुरू हुआ था, लेकिन 2023 के बाद बिना किसी Official Order के काम रोक दिया गया। यह Rule of Law और प्रशासनिक पारदर्शिता पर बड़ा सवाल खड़ा करता है।

राज्यपाल तक पहुंचेगा आदिवासियों का दर्द
अब ग्रामीणों ने राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपने और आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि अगर जल्द बिजली नहीं मिली तो यह आंदोलन पूरे जिले में फैलाया जाएगा।
बिजली बेचने वाला राज्य अपने लोगों को अंधेरे में क्यों रखे?
सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो छत्तीसगढ़ देश के 10 राज्यों को बिजली बेच सकता है, वह अपने ही आदिवासी गांवों को रोशनी क्यों नहीं दे पा रहा? यह मामला अब सिर्फ बिजली का नहीं बल्कि Justice, Rights और Government Accountability का बन चुका है।
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