: गरियाबंद में बिना श्रंगार और सफेद साड़ी में होती है लड़कियों की शादी: विधवा की तरह रहती हैं शादीशुदा महिलाएं, 7 पीढ़ियों से झेल रही हैं देवी का श्राप
गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले का कोसमी गांव। यहां पुजारी परिवार की बहुओं को सुहागन की तरह दिखने पर मनाही है। विधवा और सुहागन में अंतर चूड़ी का होता है। सुहागन कांसे की, तो विधवाएं चांदी की क्रैक चूड़ी पहनती हैं। इसकी वजह देवी का अभिशाप है। जिसे सात पीढ़ियों से निभाया रहे हैं।
Chhattisgarh Village Adivasi Pujari Family Pratha Story | Gariyaband: दरअसल, परिवार के पढ़े-लिखे सदस्य और नई पीढ़ी इस प्रथा को बदलना चाहती हैं, लेकिन आस्था आड़े आ जाता है। इसे इन्होंने अंधविश्वास नहीं बल्कि पूर्वजों से मिले आशीर्वाद मानकर अब आत्मसात कर लिया है। शादी के मंडप से शुरू हुई बिना सिंगार के सफेद लिबाज पुजारी परिवार के बहुओं के अंतिम सांस निकलते तक बना रहता है।
सजने-संवरने पर मनाही
Chhattisgarh Village Adivasi Pujari Family Pratha Story | Gariyaband: ध्रुव आदिवासी परिवार ग्राम देवी का पुजारी भी हैं। उनके यहां बहुओं को सुहागन की तरह दिखने, सजने-संवरने पर मनाही है। कांसे की चूड़ी और गले में मंगल सूत्र जरूर पहन सकती है। बाकी सभी लिबाज विधवा की तरह होता है।
पुजारी परिवार में 32 सदस्य
Chhattisgarh Village Adivasi Pujari Family Pratha Story | Gariyaband: इस पुजारी परिवार में कुल 32 सदस्य हैं। परिवार में 8वीं पीढ़ी की एक विधवा मां, 5वीं पीढ़ी की 6 बहू है। जिनमें 3 विधवा है। इसके अलावा 7वीं पीढ़ी की 10 बहूं भी है, जो पिछले कई पीढ़ियों से मानी जा रही रिवाज का पालन कर रही हैं।पुजारी को महिला का रूप धारण कर खाना खिलाती थी देवी
Chhattisgarh Village Adivasi Pujari Family Pratha Story | Gariyaband: पुजारी के उत्तराधिकारी फिरत राम ध्रुव का कहना है कि, उन्होंने अपने पिता देवसिंह से सुना था कि परदादा नागेंद्र शाह से पहले उनके पूर्वज ग्राम के पुजारी हुआ करते थे। उनके किसानी काम के बाद देवी उन्हें महिला के वेश में आकर रोजाना खाना खिलाया करती थी।
पुजारिन ने की थी महिला की पिटाई
Chhattisgarh Village Adivasi Pujari Family Pratha Story | Gariyaband: जब कई दिनों तक भोजन घर वापस आने लगा, तो भोजन का रहस्य जानने पुजारिनन छिप गई। पुजारी के भोजन के समय पराई महिला खान लेकर पहुंची। उसी के हाथ का भोजन पुजारी करने लगे थे। तभी पत्नी पुजारिन ने महिला की पिटाई शुरू कर दी।देवी का मिला था अभिशाप
इससे आक्रोशित देवी ने परिवार को अभिशाप देते हुए कहा कि, परिवार की बहू सुहागन की तरह दिखीं, तो शारीरिक कष्ट झेलेंगे। तब से लेकर आज 7वीं पीढ़ी तक परिवार की बहुएं विधवा के लिबाज में रहती हैं। पुजारी ने बताया कि, वे धूमादेवी हैं, जिन्हें हम पीढ़ियों से बड़ी माई के रूप में पूजते आ रहे हैं।
परंपरा तोड़ने पर होता है शारीरिक कष्ट
7वीं पीढ़ी की बहू कमली बाई ने बताया कि, 37 साल पहले जब वे शादी आई, तो अंजाने में माथे पर सिंदूर और टीका लगा लिया। तब उन्हें सिर दर्द हुआ। गांव से बाहर मायके जाकर रंगीन कपड़े पहनने की कोशिश की, तो कमर दर्द और अन्य शारीरिक कष्ट होने लगे। दूसरी बहुओं ने कहा कि, अंगूठी बिछिया पहना तो उंगलियों में सूजन आ गए थे।बैंक मैनेजर बेटा बोला- अंधविश्वास नहीं आस्था का विषय
Chhattisgarh Village Adivasi Pujari Family Pratha Story | Gariyaband: परिवार में सबसे ज्यादा पढ़े-लिखे हरी ध्रुव गरियाबंद सहकारी बैंक के मैनेजर हैं। उन्होंने कहा कि यह अगर अंधविश्वास होता तो टूट गया होता, लेकिन अब यह एक आस्था का विषय बना हुआ है।इनकी पत्नी ललिता कहती है कि, मंगलसूत्र पहन सकते हैं। इसके अलावा कांसे की चूड़ी पहनते हैं।विधवा महिलाओं को चांदी की चूड़ी पहनाई जाती है। जिसे क्रैक किया जाता है। ललिता पढ़ी-लिखी भी हैं। पति के सर्विस के दौरान घर से हमेशा बाहर रहना होता है। गांव में लिबाज को लेकर कोई नहीं कहता, लेकिन बाहर लोगों के पूछने पर बताना पड़ता है।
नई पीढ़ी बोली- इसे बदलना संभव नहीं
बहू बनाने से पहले परिवार के इस रिवाज को दूसरे परिवार को बताया जाता है। उनकी रजामंदी के बाद ही बात आगे बढ़ती है। पहले तो रिश्ता आसान था, लेकिन 7वीं पीढ़ी के बाद रिश्ते जुड़ने में दिक्कतें शुरू हो गई है। अब 8वीं पीढ़ी के बेटे भी चाहते हैं कि यह रिवाज बदले, लेकिन परिवार के बड़े सदस्य चाह कर भी इसे नहीं बदल रहे हैं।Chhattisgarh Village Adivasi Pujari Family Pratha Story | Gariyaband: परिवार के वरिष्ठ विष्णु ध्रुव ने बताया कि पहले हुए बदलाव के प्रयास में बहुओं को हुई शारीरिक कष्ट प्रमाण है कि यह कोई अंधविश्वास नहीं है। हर पीढ़ी के बहू इस बात से अच्छी तरह से वाकिफ है।उन्हें उम्मीद है कि एक दिन जरूर उन्हें रिवाज बदलने के संकेत मिलेंगे।
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