BREAKING- शहडोल सांसद हिमाद्री सिंह-नरेंद्र मरावी का तलाक : BJP नेता से 2017 में हुई थी शादी, 5 साल से रह रहे थे अलग; जानिए अब बेटी किसके साथ रहेगी?
MP CG Times / Mon, Sep 14, 2026
शहडोल लोकसभा से भाजपा सांसद हिमाद्री सिंह और भाजपा नेता नरेंद्र सिंह मरावी का विवाह अब कानूनी तौर पर खत्म हो गया है। अनूपपुर के राजेंद्रग्राम जिला न्यायालय ने दोनों की आपसी सहमति से तलाक की डिक्री जारी की है। दोनों 5 मई 2021 से अलग रह रहे थे। जिला न्यायाधीश धनकुमार कुड़ोपा ने 3 सितंबर 2026 को हिन्दू विवाह अधिनियम, 1955 की धारा 13-बी के तहत यह फैसला सुनाया।
हिमाद्री सिंह और नरेंद्र सिंह मरावी की शादी 23 नवंबर 2017 को राजेंद्रग्राम में हिन्दू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के बाद दोनों साथ रहे। 20 जून 2019 को उनकी बेटी गिरीशा सिंह का जन्म हुआ। इसके बाद छोटी-छोटी बातों को लेकर दोनों के बीच विवाद होने लगे। धीरे-धीरे बातचीत और मिलना-जुलना बंद हो गया और 5 मई 2021 से दोनों अलग-अलग रहने लगे।

कांग्रेस के बड़े राजनीतिक परिवार की बेटी हैं हिमाद्री
हिमाद्री सिंह का संबंध कांग्रेस के बड़े राजनीतिक परिवार से रहा है। उनके पिता दलवीर सिंह कांग्रेस से सांसद रहे और केंद्र सरकार में मंत्री भी रहे। उनकी मां राजेश नंदिनी सिंह भी कांग्रेस से सांसद रह चुकी हैं।
दूसरी ओर, नरेंद्र सिंह मरावी भाजपा की राजनीति से जुड़े रहे हैं। नरेंद्र ने 2009 में शहडोल लोकसभा सीट से राजेश नंदिनी सिंह के खिलाफ चुनाव लड़ा था। इस चुनाव में उन्हें हार मिली थी। बाद में हिमाद्री सिंह भाजपा में शामिल हुईं और 2019 में शहडोल लोकसभा सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर सांसद बनीं। वर्तमान में भी वह शहडोल लोकसभा सीट से भाजपा की सांसद हैं।
हिमाद्री और नरेंद्र की शादी उस समय भी राजनीतिक तौर पर चर्चा में रही थी, क्योंकि दोनों अलग-अलग राजनीतिक पृष्ठभूमि से आते थे। हालांकि, मौजूदा तलाक के मामले में कोर्ट के फैसले में राजनीतिक मतभेद को वैवाहिक विवाद की वजह नहीं बताया गया है। न्यायालय के रिकॉर्ड में दोनों के लंबे समय से अलग रहने और साथ रहने की संभावना नहीं होने का उल्लेख है।

कोर्ट ने 6 महीने का समय दिया, फिर भी साथ नहीं आए
दोनों ने हिन्दू विवाह अधिनियम की धारा 13-बी के तहत आपसी सहमति से विवाह विच्छेद के लिए न्यायालय में याचिका प्रस्तुत की थी। कोर्ट ने दोनों को अपने फैसले पर पुनर्विचार करने के लिए 6 महीने का समय दिया। इस दौरान उनके पुनर्मिलाप का प्रयास भी किया गया, लेकिन यह सफल नहीं हुआ।
6 महीने की अवधि पूरी होने के बाद भी दोनों अपने फैसले पर कायम रहे। दोनों ने न्यायालय में कहा कि 5 मई 2021 से वे अलग रह रहे हैं और अब पति-पत्नी के रूप में दोबारा साथ रहना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि तलाक का फैसला उन्होंने अपनी इच्छा से और बिना किसी दबाव के लिया है।
हिमाद्री खुद और बेटी के लिए नहीं मांगेंगी गुजारा भत्ता
कोर्ट में हिमाद्री सिंह ने स्पष्ट किया कि वह अपने और बेटी गिरीशा के लिए नरेंद्र सिंह मरावी से किसी प्रकार का भरण-पोषण या गुजारा भत्ता नहीं मांगेंगी। दोनों पक्षों ने यह भी कहा कि शादी में मिले उपहार और जेवरात को लेकर उनके बीच कोई विवाद शेष नहीं है।
न्यायालय ने दोनों पक्षों के बयान और पूरे मामले की परिस्थितियों को देखते हुए माना कि उनका पति-पत्नी के रूप में साथ रहकर दाम्पत्य जीवन जारी रखना संभव नहीं है। इसके बाद कोर्ट ने आपसी सहमति के आधार पर विवाह विच्छेद की डिक्री जारी कर दी।

बेटी की परवरिश मां की जिम्मेदारी, पिता की संपत्ति में अधिकार बरकरार
तलाक के साथ कोर्ट ने बेटी गिरीशा सिंह के भविष्य को लेकर भी आदेश दिया है। उसकी शिक्षा, भरण-पोषण, स्वास्थ्य और भविष्य में विवाह कराने की पूरी जिम्मेदारी हिमाद्री सिंह की होगी।
हालांकि, बेटी के संपत्ति संबंधी अधिकार सुरक्षित रहेंगे। कोर्ट ने आदेश में कहा कि गिरीशा को नरेंद्र मरावी की चल-अचल संपत्ति में हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम के तहत अधिकार प्राप्त होगा। दोनों पक्ष अपनी चल-अचल संपत्ति को बेचने, दान करने या वसीयत करने से पहले बेटी के कानूनन निर्धारित हिस्से को ध्यान में रखेंगे।
कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि दोनों पक्ष अपना-अपना वाद व्यय वहन करेंगे। जिला न्यायाधीश धनकुमार कुड़ोपा ने 3 सितंबर 2026 को खुले न्यायालय में निर्णय सुनाया।
हिमाद्री का नहीं मिला जवाब
तलाक के संबंध में हिमाद्री सिंह का पक्ष जानने फोन किया गया लेकिन, उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की।
हिमाद्री के वकील तीरथ प्रसाद लवमेश का कहना है- 3 सितंबर को आपसी सहमति से दोनों के बीच तलाक का आदेश हुआ है।
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