80+ एनकाउंटर करने वाला बनेगा Ram Mandir CEO ? : Former IPS Rajesh Pandey का नाम टॉप पर, 5585 आवेदन में 16 इंटरव्यू, जानिए कहानी ?
अयोध्या के राम मंदिर को आज अपना पहला पूर्णकालिक CEO (Chief Executive Officer) मिल सकता है। इस पद के लिए पूर्व IPS अधिकारी और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट राजेश पांडेय का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है। हालांकि, उनके नाम पर अभी अंतिम मुहर नहीं लगी है।
CEO चयन के लिए बनी सर्च कमेटी ने 1 सितंबर को तीन नामों का पैनल श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को सौंप दिया है। अब 2 सितंबर को होने वाली ट्रस्ट की बैठक में इन नामों पर चर्चा के बाद किसी एक उम्मीदवार का चयन किया जाएगा।
CEO की यह नियुक्ति इसलिए भी अहम है, क्योंकि राम मंदिर में लगातार बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या के बीच प्रशासन, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा, कर्मचारियों के संचालन, तकनीक, वित्तीय व्यवस्था और रोजमर्रा के Temple Operations को व्यवस्थित करने की जिम्मेदारी इस पद से जुड़ी होगी।
चयन प्रक्रिया भी काफी लंबी रही है। कुल 5,585 लोगों ने आवेदन किया था, जिनमें कई चरणों की स्क्रीनिंग के बाद 16 उम्मीदवार अंतिम इंटरव्यू तक पहुंचे।

80 से ज्यादा एनकाउंटर का रिकॉर्ड, राजेश पांडेय क्यों चर्चा में?
पूर्व IPS राजेश पांडेय का नाम CEO की रेस में इसलिए खास है, क्योंकि उनका लंबा Police Service अनुभव रहा है। वह उत्तर प्रदेश पुलिस की विशेष इकाइयों STF (Special Task Force) और ATS (Anti-Terrorist Squad) के संस्थापक सदस्यों में रहे हैं। उनके करियर के दौरान गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला समेत 80 से ज्यादा एनकाउंटर किए जाने की जानकारी सामने आई है।
राजेश पांडेय को संयुक्त राष्ट्र के Kosovo Peacekeeping Mission में काम करने का भी अनुभव है। मूल रूप से प्रयागराज के रहने वाले पांडेय का नाम CEO पद के इंटरव्यू के दौरान से ही चर्चा में रहा है। हालांकि, अंतिम चयन ट्रस्ट द्वारा किया जाना है, इसलिए अभी उनकी नियुक्ति को आधिकारिक तौर पर तय नहीं माना जा सकता।

5,585 आवेदन से 16 उम्मीदवारों तक कैसे पहुंची रेस?
राम मंदिर CEO के चयन की प्रक्रिया में देशभर से कुल 5,585 applications मिले थे। स्क्रीनिंग के दौरान उम्मीदवारों की योग्यता, अनुभव, Management Skills, Leadership, Communication और बड़े स्तर पर कार्यक्रम या भीड़ संभालने की क्षमता जैसे मानकों को देखा गया।
आवेदन प्रक्रिया के बाद उम्मीदवारों की संख्या लगातार कम की गई। अलग-अलग चरणों की जांच के बाद 16 उम्मीदवारों को अंतिम चरण के लिए चुना गया। इन उम्मीदवारों में पूर्व IAS-IPS अधिकारियों के साथ सेना, कॉरपोरेट, इंडस्ट्री, शिक्षा और IT क्षेत्र से जुड़े अनुभवी लोग भी शामिल थे। अंतिम 16 उम्मीदवारों की उम्र करीब 50 से 70 वर्ष के बीच बताई गई थी।
16 उम्मीदवारों का अयोध्या में हुआ Face-to-Face Interview
अंतिम चयन प्रक्रिया के तहत 11 और 12 अगस्त को अयोध्या में 16 उम्मीदवारों के Face-to-Face Interview हुए। इंटरव्यू लेने वाली तीन सदस्यीय सर्च कमेटी में सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जस्टिस प्रमोद कोहली, रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल वीके चतुर्वेदी और न्यूक्लियर साइंटिस्ट डॉ. सुरेश हावरे शामिल थे।
उम्मीदवारों से प्रशासनिक अनुभव, नेतृत्व क्षमता, बड़े कार्यक्रम और श्रद्धालुओं की भीड़ को संभालने की रणनीति, सुरक्षा व्यवस्था, दर्शन को सुचारु रखने और मंदिर संचालन से जुड़े सवाल पूछे गए। चयन प्रक्रिया के बाद कमेटी ने तीन नामों का Final Panel तैयार किया और 1 सितंबर को यह पैनल ट्रस्ट को सौंप दिया।

आज ट्रस्ट की बैठक में होगा अंतिम फैसला
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक 2 सितंबर को अयोध्या के मणिराम दास छावनी में हो रही है। बैठक में CEO के अलावा ट्रस्ट के दूसरे प्रशासनिक और संगठनात्मक मुद्दों पर भी फैसला हो सकता है। सर्च कमेटी द्वारा दिए गए तीन नामों में से किसी एक को राम मंदिर का पहला पूर्णकालिक CEO चुना जाएगा।
यानी अभी सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या 80 से ज्यादा एनकाउंटर का अनुभव रखने वाले पूर्व IPS राजेश पांडेय को राम मंदिर की प्रशासनिक कमान मिलेगी, या पैनल में शामिल किसी दूसरे नाम पर ट्रस्ट भरोसा जताएगा? इसका जवाब आज ट्रस्ट की बैठक के बाद सामने आएगा।
CEO के साथ ट्रस्ट में खाली पदों पर भी फैसला संभव
CEO की नियुक्ति के अलावा ट्रस्ट की बैठक में खाली पड़े पदों को भरने पर भी चर्चा हो सकती है। ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में CEO की भूमिका को मजबूत करने के साथ अलग-अलग समितियों के पुनर्गठन और नई समितियों के गठन पर भी विचार किया जा सकता है।
ट्रस्ट की यह बैठक चढ़ावा चोरी के मामले के सामने आने के बाद तीसरी अहम बैठक है। इसलिए CEO की नियुक्ति के साथ ट्रस्ट की Management System को मजबूत करने और पारदर्शिता बढ़ाने पर भी नजर रहेगी।
चढ़ावा चोरी के बाद क्यों बढ़ी CEO की जरूरत?
राम मंदिर में चढ़ावे और दान से जुड़ी कथित अनियमितताओं का मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था पर सवाल उठे थे। इसी पृष्ठभूमि में एक पूर्णकालिक CEO की नियुक्ति को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
CEO के जरिए मंदिर के प्रशासनिक और प्रबंधकीय कामकाज को अधिक व्यवस्थित करने की योजना है। इसमें श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के बीच Crowd Management, Security, Staff Management, Technology, Finance और Daily Operations जैसे कामों का बेहतर समन्वय शामिल होगा।

चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे के बाद बदलाव
चढ़ावा चोरी मामले के बाद ट्रस्ट की व्यवस्था में भी बदलाव हुए हैं। आपके दिए विवरण के मुताबिक, महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिया था, जिसे ट्रस्ट ने स्वीकार कर लिया। इसके बाद रिटायर्ड IFS कृष्ण मोहन को कार्यवाहक महासचिव की जिम्मेदारी दी गई।
इसी घटनाक्रम के बाद ट्रस्ट ने धार्मिक समिति के गठन समेत प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाए। अब CEO की नियुक्ति को उसी व्यापक Administrative Restructuring का अगला महत्वपूर्ण चरण माना जा रहा है।

आज साफ होगा- कौन संभालेगा राम मंदिर की प्रशासनिक कमान?
फिलहाल राजेश पांडेय का नाम सबसे ज्यादा चर्चा में है, लेकिन आधिकारिक रूप से CEO वही होंगे, जिनके नाम पर श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट अंतिम मुहर लगाएगा। 5,585 आवेदनों से शुरू हुई यह Selection Process अब तीन नामों के पैनल तक पहुंच चुकी है।
आज की बैठक के बाद यह तय हो जाएगा कि राम मंदिर के पहले CEO की जिम्मेदारी किसे मिलती है। अगर राजेश पांडेय चुने जाते हैं, तो पुलिस और सुरक्षा प्रशासन में लंबा अनुभव रखने वाले एक पूर्व IPS अधिकारी के हाथों राम मंदिर की बड़ी प्रशासनिक जिम्मेदारी होगी। लेकिन अंतिम फैसला ट्रस्ट की घोषणा के बाद ही माना जाएगा।
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