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: देवभोग ब्लॉक के 3 डॉक्टर दूसरे ब्लॉक में पदस्थ: दो पीएचसी डॉक्टर विहीन, स्वास्थ्य सुविधाओं पर 2 लाख की आबादी निर्भर, शासन के निर्देश ताक पर

गरियाबंद से गिरीश जगत की रिपोर्ट

छत्तीसगढ़ शासन का स्पष्ट आदेश है कि, किसी भी ब्लॉक से डॉक्टरों को संलग्न (अटैच) नहीं किया जाएगा। लेकिन देवभोग ब्लॉक में तीन डॉक्टरों को मनमाने ढंग से अन्य स्थानों पर संलग्न कर दिया गया है, जिससे यहां की चिकित्सा व्यवस्था चरमरा गई है।

डॉ. सुनील रेड्डी को देवभोग से हटाकर सीएमएचओ कार्यालय में बैठा दिया गया है। डॉ. इंद्र कुमार को अमलीपदर भेजा गया है। संविदा पर नियुक्त डॉ. अभिषेक सोनकुअर को उनके आग्रह पर छुरा ब्लॉक में अटैच किया गया है। वहीं, झाखरपारा पीएचसी में पदस्थ डॉ. अभिनव श्रीवास्तव "नो वर्क-नो पे" की स्थिति में चले गए हैं।

जनप्रतिनिधियों ने उठाई थी आवाज, पर अफसरशाही के आगे रही नाकाम

जनपद अध्यक्ष पद्मलया बीसी समेत अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने सुशासन तिहार के दौरान चिकित्सा सुविधाओं की बदहाली का मुद्दा उठाया था, लेकिन पूर्व सीएमएचओ की मनमानी के आगे स्थानीय मांगें बेअसर साबित हुईं।

अब नए पदस्थ सीएमएचओ वी.के. नवरत्न ने कहा है कि, "जल्द समीक्षा बैठक लेकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।"

पीएचसी कार्यकर्ताओं के भरोसे, ग्रामीणों की जान जोखिम में

सालभर पहले तक झाखरपारा और दीवानमुड़ा पीएचसी में डॉक्टर सेवा दे रहे थे। लेकिन अब दोनों ही केंद्र सिर्फ दो-दो स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं के भरोसे चल रहे हैं। गंभीर मामलों में मरीजों को इधर-उधर भटकना पड़ता है।

सुपेबेड़ा PHC में स्टाफ की भारी कमी, किडनी मरीज परेशान

किडनी रोगियों के इलाज के लिए बनाए गए सुपेबेड़ा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में दो डॉक्टर तो हैं, लेकिन फार्मासिस्ट, एमएलटी, आया और वार्ड बाय जैसे जरूरी पद रिक्त पड़े हैं। इससे इलाज बाधित हो रहा है और मरीजों को भटकना पड़ रहा है।

ट्रांसफर में हुआ सौतेला व्यवहार, पोस्टिंग नहीं हुई पूरी

ट्रांसफर प्रक्रिया के दौरान देवभोग ब्लॉक में रिक्त पड़े 30 से अधिक पदों को भरने की उम्मीद थी, लेकिन हुआ उल्टा यहां से 4 स्वास्थ्य कर्मियों का तबादला कर दिया गया।एक भी नई नियुक्ति नहीं हुई। अभनपुर से आई महिला नर्स ने एक महीने बाद भी जॉइन नहीं किया।

रेडियोग्राफर के बिना चल रहा एक्स-रे, नॉन टेक्निकल कर्मचारी के भरोसे सेवा

देवभोग सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में एक्स-रे संचालन के लिए रेडियोग्राफर का पद रिक्त है। मजबूरन जीवन दीप समिति से जुड़े नॉन-टेक्निकल कर्मियों से पार्ट टाइम में एक्स-रे कराया जा रहा है, जो मरीजों की सुरक्षा और स्वास्थ्य मानकों के लिहाज से गंभीर चिंता का विषय है।

अब सवाल यह उठते हैं कि

क्या शासन के संलग्नीकरण रोकने के निर्देश सिर्फ कागजों तक सीमित हैं?

संविदा शर्तों के उल्लंघन पर कार्रवाई क्यों नहीं हो रही?

डॉक्टरों की मनमानी और अफसरों की अनदेखी का खामियाजा आम जनता क्यों भुगते?

क्या देवभोग जैसे पिछड़े ब्लॉक को जानबूझकर स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित किया जा रहा है?

आखिर कब तक प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं सिर्फ कागजी योजनाओं में रहेंगी?

Read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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