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MPCG टाइम्स की खबर का असर: सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री को CEO का नोटिस, स्टॉप डैम निर्माण में भ्रष्टाचार, लटकी कार्रवाई की तलवार

गणेश मरावी,डिंडौरी। मध्यप्रदेश के डिंडौरी जिले में निर्माण कार्य में लापरवाही बरतने वाले सचिव, रोजगार सहायक और उपयंत्री को सीईओ ने कारण बताओ नोटिस जारी किया है। कीचड़ में सूखा मसाला डालकर करा स्टॉप डैम का बेस निर्माण करा रहे थे। संतुष्टि पूर्ण जवाब नहीं मिलने पर कार्रवाई की तैयारी है। जनपद पंचायत समनापुर के ग्राम पंचायत लदवानी का मामला है।

डिंडौरी में पानी की तरह बहा रहे पैसा! उपयंत्री बोले- मेरे कहने पर पानी में डाल रहे मसाला, धूल भरी गिट्टी से करा रहे स्टाप डैम का निर्माण

दरअसल, जनपद पंचायत समनापुर के ग्राम पंचायत लदवानी में लगभग 14 लाख रुपए की लागत से स्टॉप डैम का निर्माण कराया जा रहा है, जिसमें निर्माण ऐजेंसी के द्वारा स्टॉप डैम की बेस निर्माण में सूखा मसाला डाला जा रहा था। उक्त मामले की खबर MPCG टाइम्स ने प्रमुखता से प्रकाशित कर अधिकारियों को अवगत कराया था।

मामले को संज्ञान में लेते हुए जनपद पंचायत समनापुर सीईओ सीपी साकेत ने ग्राम पंचायत लदवानी के सचिव यतेंद्र ठाकुर, रोजगार सहायक गयादीन यादव और उपयंत्री अरुण कुमार भगत्या को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। नोटिस का संतुष्टि पूर्वक जवाब नही मिलने पर उच्च अधिकारियों को कार्रवाई के लिए प्रेषित की जाएगी।

जिम्मेदार करा रहे चैकडेम का घटिया निर्माण

ग्राम पंचायत लदवानी के भदरा टोला में मनरेगा योजना के तहत लगभग 14 लाख रू की लागत से स्टाॅप डैम का निर्माण कार्य कराया जा रहा है, जिसमें सरपंच दयावती मरकाम, सचिव यतेंद्र कुमार ठाकुर, रोजगार सहायक गयादीन यादव एवं उपयंत्री अरूण भगत्या की मिलीभगत से मापदंड को दरकिनार करते हुए घटिया निर्माण करा लाखो रू का बंदरबाट किया जा रहा है।

कीचड़ के उपर डाल रहे सूखा मसाला

निर्माण ऐसेंजी के द्वारा स्टाॅपडेम निर्माण में पानी व मिटटी को सफाई कराये बिना ही सूखा मसाला से ढ़लाई किया जा रहा है, जबकि पूरी तरह से पानी को बाहर फेंककर व मिटटी को सफाई कराकर निर्माण कराया जाना चाहिए, जिससे स्टाॅप डैम की बेस मजबूत रहे।

इससे आने वाले समय में नीचे से पानी लीकेज की समस्या नहीं होगी, लेकिन इस निर्माण कार्य को देखकर लग रहा है कि आने वाले समय में स्टाॅपडेम से पानी लीकेज होने की पूरी संभावना है। इस तरह के कार्य से अंदाजा लगाया जा सकता है कि सरपंच,सचिव एवं उपयंत्री के द्वारा स्वयं को आर्थिक लाभ पहुंचाने के फिराक में पूरी तरह से गुणवत्ताविहीन करा रहे हैं।

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