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: पुष्पराजगढ़ में बिना नहर बांध कैसे ? मेहनतकश अन्नदाता खून-पसीना से सींच रहा खेत, करप्ट अफसरों की नाकामी से खेतों में दरार, कौन है जिम्मेदार ?

MP CG Times / Sun, Dec 5, 2021

पुष्पराजगढ़। मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले में किसान परेशान हैं. खेती किसानी का सीजन है, लेकिन सरकारी सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा है. दरअसल पुष्पराजगढ़ जनपद के ग्राम पंचायत बहपुर में करोड़ों की लागत से नॉनघाटी बांध बनाया गया है. जिसका मुख्य उद्देश्य 5 से 6 गांवों के किसानों को निर्धारित 250 हेक्टेयर भूमि सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना था, लेकिन नॉनघाटी बांध 13-14 वर्ष बीत जाने के बाद भी किसानों को पानी नहीं मिल पा रहा है. बांध महज दिखावा बनकर रहा गया हैं. राजेंद्रग्राम मर्डर ब्रेकिंग: डेड बॉडी लेकर सैकड़ों की संख्या में ग्रामीणों ने थाने का किया घेराव, रेप के बाद हत्या की आशंका, परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल एक तरफ सत्ता में बैठी भाजपा सरकार विकास के लाख दावे कर रही है कि हम किसानों के लिए हर सम्भव प्रयास कर रहे है. किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार हो सके, लेकिन जमीनी हकीकत तो कुछ और ही बयाँ कर रही है. पुष्पराजगढ़ आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र है. इस आदिवासी आँचल में जनप्रतिनिधि और जिम्मदारों की लापरवाही का खामियाजा किसान आज भी उठा रहे हैं. नॉनघाटी बांध बहपुर 13 से 14 वर्ष पहले बनकर तैयार हो चुका था, पर आज तक इस गांव के ग्रामीणों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है. विभाग के आला अधिकारी मेंटेनेंस के नाम पर महज खाना पूर्ति करने में लगे हुए है. पुष्पराजगढ़ में भ्रष्टाचार का गुनहगार कौन ? विकास के दावे खोखले, सरपंच-सचिव और इंजीनियर निर्माणकार्य में लगा रहे पलीता, मनरेगा में भी ठेकेदारी हॉवी ! इस बांध के बारे में जब हमने ग्रामीणों से हकीकत जानने की कोशिश की, तो उन्होंने बताया कि यह बांध जब से बना है सिर्फ दिखावे के लिए करोड़ों की लागत से बना है. विभाग के अधिकारियों ने दिखावे के लिए कुछ दूरी पर नहर तो बनवा दिया है, लेकिन उसमें भी पानी नहीं चल रहा है. बांध में पानी भरे होने की वजह से बिना गेट खोले पानी का रिसाव नीचे केनाल से होता है. आगे कुछ दूर जाकर नहर से पहले ही अपना दूसरा रास्ता बनाते हुए खेतों में पानी भर रहा है. जिससे खेती करना ही मुश्किल है. ग्रामीणों ने बताया कि हम लोग बांध के अध्यक्ष के साथ विभाग के जिम्मदारों तक, जिला कलेक्ट्रेट और सम्बंधित विभाग को कई बार लिखित आवेदन कर चुके है. लेकिन आज दिनाँक तक कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है. बारिश के दिनों में इस बांध के गेट खोल दिए जाते है. इस बांध में इतना पानी भर जाता है कि ओवरफ्लो के बनाए हुए रास्ते से यह पानी बहकर सीधा नदी से गांव के खेतों में जा रहा है. जिससे कई तालाबों को यह बांध पाट चुका है. किसान बारिश के दिनों में भी खुश नहीं है. आखिर हो भी तो कैसे. इस बांध का शुरुआती नक्षत्र ही खराब है. बांध निर्माण कार्य में जमकर भ्रष्टाचार किया गया. जब बांध बनकर तैयार हो गया, तब नहर के नाम पर न जाने कितनी राशि आहरित कर ली गई. यह जांच का विषय है. किसानों के लिए बनाई गई महत्वाकांक्षी योजना में किसने पलीता लगाया है. इस खेल का असली जिम्मेदार कौन है. यह जांच में दूध का दूध और पानी का पानी हो सकता है. पुष्पराजगढ़ में मलाईदार कुर्सी: ट्रांसफर के ढाई महीने बाद भी डटे हैं साहब, जुगाड़ से रोकी रिलीविंग, कमाई का जरिया बना अनूपपुर जिला ? विधायक फुंदेलाल सिंह का कहना है कि जिस उद्देश्य से जलाशय का निर्माण किया गया था, उसकी पूर्ति नहीं हो पा रही है. हमने भी कई बार उसका जायजा लिया है. नानघटी बांध के निर्माण के दौरान ही कई प्रश्न चिन्ह खड़े हुए थे, लेकिन विभाग के अधिकारियों ने लीपापोती कर मामले को दबा दिया. जलाशय का निर्माण सिचाई के लिए किया जाता है. जिससे किसानों का पानी मिल सके, लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ. अब देखना यह होगा कि बांध में नहर का निर्माण कब तक हो पाता है, जिससे किसानों को खेती के लिए पानी मिल सके. read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanistan Taliban Left Behind in 2001

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