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: Tikamgarh: वो चल फिर नहीं सकता, दो साल से अस्पताल में है, डॉक्टर सर्टिफिकेट नहीं बनाते, परिजन घर नहीं ले जाते

News Desk / Sat, Nov 26, 2022


दिव्यांग युवक विनोद यादव

दिव्यांग युवक विनोद यादव - फोटो : अमर उजाला

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मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में अटेंडरों के रुकने वाली जगह पर एक बेड लगा है, जिस पर शहर के कुरयाना मोहल्ला निवासी विनोद यादव पुत्र लक्ष्मन यादव करीब दो साल से भर्ती है। एक्सीडेंट के बाद पैर काम नहीं कर रहा, इसलिए चलने-फिरने में असमर्थ है। मामला केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार के संसदीय क्षेत्र टीकमगढ़ जिला मुख्यालय का है।

बता दें कि विनोद के विकलांगता का सर्टिफिकेट नहीं बनाया जा रहा है। विनोद की मां रामरती ने बताया, दिव्यांगों को मिलने वाले सहायक उपकरण और पेंशन जैसे कोई भी लाभ विनोद को नहीं मिलता, जिसका कारण विकलांग सर्टिफिकेट का अभाव है। जिला अस्पताल में शुक्रवार को बैठने वाले बोर्ड में चार बार पूरे दस्तावेज लेकर मैं स्वयं गई, लेकिन डॉक्टरों ने सर्टिफिकेट बनाने से इनकार कर दिया।
डॉक्टरों का कहना था कि पहले उसे अस्पताल से घर ले जाओ, तब सर्टिफिकेट बनाएंगे। रामरती यादव ने बताया कि हमारा स्वयं का मकान नहीं है। कुरयाना मोहल्ला में किराए से कमरा लेकर रहती हैं, जो ऊपरी मंजिल पर होने के कारण विनोद के लिए सुविधाजनक नहीं है। पति लक्ष्मन यादव स्वास्थ्य विभाग में वैक्सीनेटर थे। उनकी मौत के बाद जो पेंशन मिलती है, उसी से गुजर-बसर करती हूं।

अस्पताल में मरीजों के परिजन कर देते हैं 10-5 रुपये की आर्थिक मदद...
सर्जिकल वार्ड में भर्ती विनोद यादव ने बताया, किराए पर टैक्सी चलाकर रोजी-रोटी चलाता था। 20 सितंबर 2020 को पैदल जाते समय एक बाइक ने पीछे से टक्कर मार दी। दुर्घटना में स्पाइन की नस चोक हो गई। करीब दो महीने तक झांसी में इलाज कराया। इसके बाद से टीकमगढ़ जिला अस्पताल में भर्ती हूं। अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों के परिजन 10-5 रुपये की मदद कर देते हैं। इन्हीं से जैसे-तैसे खर्च चलता है। खाना अस्पताल से मिल जाता है। विकलांग सर्टिफिकेट नहीं बनने के कारण न तो कोई सहायक उपकरण मिल सका और न ही दिव्यांग पेंशन मिल पा रही है।

कई बार परिजनों से घर ले जाने को कहा, लेकिन नहीं ले जाते...
सिविल सर्जन डॉ. अमित शुक्ला का कहना है, सर्जिकल वार्ड में विनोद यादव लंबे समय से भर्ती है। उसको घर ले जाने के लिए परिजनों से कई बार कहा, लेकिन वह दो-चार दिन में ले जाने का बहाना करते रहते हैं। मां ऊपर का कमरा होने के कारण असुविधा बताती है। उसका भाई वार्ड ब्वाय है, लेकिन वह भी नहीं ले जाता है। पैर में दिक्कत होने के कारण वह चल नहीं पाता है। विकलांग सर्टिफिकेट क्यों नहीं बनाया गया, इसकी जानकारी की जाएगी। जो भी नियमानुसार कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।

हर संभव मदद की जाएगी...
टीकमगढ़ जिला कलेक्टर सुभाष कुमार ने कहा, दो साल से अस्पताल में भर्ती होना गंभीर मामला है। मैं सिविल सर्जन से बात करता हूं। अगर युवक दिव्यांगता की श्रेणी होगा तो प्रमाण-पत्र बनवाया जाएगा। जहां तक दिव्यांगों को मिलने वाली सुविधाओं के लाभ की बात है तो इस संबंध में सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग उप संचालक से बात करता हूं। हर संभव मदद की जाएगी।

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मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ जिला अस्पताल के सर्जिकल वार्ड में अटेंडरों के रुकने वाली जगह पर एक बेड लगा है, जिस पर शहर के कुरयाना मोहल्ला निवासी विनोद यादव पुत्र लक्ष्मन यादव करीब दो साल से भर्ती है। एक्सीडेंट के बाद पैर काम नहीं कर रहा, इसलिए चलने-फिरने में असमर्थ है। मामला केंद्र सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार के संसदीय क्षेत्र टीकमगढ़ जिला मुख्यालय का है।

बता दें कि विनोद के विकलांगता का सर्टिफिकेट नहीं बनाया जा रहा है। विनोद की मां रामरती ने बताया, दिव्यांगों को मिलने वाले सहायक उपकरण और पेंशन जैसे कोई भी लाभ विनोद को नहीं मिलता, जिसका कारण विकलांग सर्टिफिकेट का अभाव है। जिला अस्पताल में शुक्रवार को बैठने वाले बोर्ड में चार बार पूरे दस्तावेज लेकर मैं स्वयं गई, लेकिन डॉक्टरों ने सर्टिफिकेट बनाने से इनकार कर दिया।


डॉक्टरों का कहना था कि पहले उसे अस्पताल से घर ले जाओ, तब सर्टिफिकेट बनाएंगे। रामरती यादव ने बताया कि हमारा स्वयं का मकान नहीं है। कुरयाना मोहल्ला में किराए से कमरा लेकर रहती हैं, जो ऊपरी मंजिल पर होने के कारण विनोद के लिए सुविधाजनक नहीं है। पति लक्ष्मन यादव स्वास्थ्य विभाग में वैक्सीनेटर थे। उनकी मौत के बाद जो पेंशन मिलती है, उसी से गुजर-बसर करती हूं।

अस्पताल में मरीजों के परिजन कर देते हैं 10-5 रुपये की आर्थिक मदद...
सर्जिकल वार्ड में भर्ती विनोद यादव ने बताया, किराए पर टैक्सी चलाकर रोजी-रोटी चलाता था। 20 सितंबर 2020 को पैदल जाते समय एक बाइक ने पीछे से टक्कर मार दी। दुर्घटना में स्पाइन की नस चोक हो गई। करीब दो महीने तक झांसी में इलाज कराया। इसके बाद से टीकमगढ़ जिला अस्पताल में भर्ती हूं। अस्पताल में भर्ती होने वाले मरीजों के परिजन 10-5 रुपये की मदद कर देते हैं। इन्हीं से जैसे-तैसे खर्च चलता है। खाना अस्पताल से मिल जाता है। विकलांग सर्टिफिकेट नहीं बनने के कारण न तो कोई सहायक उपकरण मिल सका और न ही दिव्यांग पेंशन मिल पा रही है।


कई बार परिजनों से घर ले जाने को कहा, लेकिन नहीं ले जाते...
सिविल सर्जन डॉ. अमित शुक्ला का कहना है, सर्जिकल वार्ड में विनोद यादव लंबे समय से भर्ती है। उसको घर ले जाने के लिए परिजनों से कई बार कहा, लेकिन वह दो-चार दिन में ले जाने का बहाना करते रहते हैं। मां ऊपर का कमरा होने के कारण असुविधा बताती है। उसका भाई वार्ड ब्वाय है, लेकिन वह भी नहीं ले जाता है। पैर में दिक्कत होने के कारण वह चल नहीं पाता है। विकलांग सर्टिफिकेट क्यों नहीं बनाया गया, इसकी जानकारी की जाएगी। जो भी नियमानुसार कार्रवाई होगी, वह की जाएगी।

हर संभव मदद की जाएगी...
टीकमगढ़ जिला कलेक्टर सुभाष कुमार ने कहा, दो साल से अस्पताल में भर्ती होना गंभीर मामला है। मैं सिविल सर्जन से बात करता हूं। अगर युवक दिव्यांगता की श्रेणी होगा तो प्रमाण-पत्र बनवाया जाएगा। जहां तक दिव्यांगों को मिलने वाली सुविधाओं के लाभ की बात है तो इस संबंध में सामाजिक न्याय एवं नि:शक्तजन कल्याण विभाग उप संचालक से बात करता हूं। हर संभव मदद की जाएगी।


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