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छत्तीसगढ़ में ’24 का चक्रव्यूह’ और ’22 अभिमन्यू’: BJP इन लोकसभा सीटों पर कभी नहीं हारी, 2 सीटों पर सिमट गई कांग्रेस, जानिए 11 सीटों का सियासी फॉर्मूला ?

Detailed story on electoral mathematics of 11 Lok Sabha seats of Chhattisgarh: छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद कांग्रेस दो सीटों से आगे नहीं (Chhattisgarh Lok Sabha seat analysis) बढ़ पाई. 6 सीटें ऐसी हैं, जहां बीजेपी कभी नहीं हारी. पिछले नतीजों पर नजर डालने पर पता चलता है कि कोरबा एक ऐसी सीट है, जहां कांग्रेस एक बार जीतती है और एक बार हारती है. फिलहाल यहां से कांग्रेस की ज्योत्सना महंत सांसद हैं.

Detailed story on electoral mathematics of 11 Lok Sabha seats of Chhattisgarh:  बीजेपी पहली सूची में कोरबा से भी उम्मीदवार उतारने जा रही है. कई लोग यहां से दावेदारी (Chhattisgarh Lok Sabha seat analysis) भी कर रहे हैं. देवेन्द्र पांडे, नवीन पटेल, विकास महतो जैसे कई नाम चर्चा में हैं. वहीं, कांग्रेस ने अभी तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं कि वह ज्योत्सना को दोबारा चुनाव लड़ाएगी या कोई नया चेहरा सामने आएगा.

कब और कहां से जीती कांग्रेस ?

  • 2019 बस्तर से दीपक बैज और कोरबा से ज्योत्सना महंत
  • 2014 दुर्ग सीट से ताम्रध्वज साहू
  • 2009 कोरबा से डाॅ. चरणदास महंत
  • 2004 महासमुंद से अजीत जोगी और राजनांदगांव से देवव्रत सिंह

लोकसभा सीटों के गणित पर एक नजर

रायपुर लोकसभा सीट: 1952 से 1984 तक यह कांग्रेस का गढ़ रहा. 1977 में भारतीय लोकदल के पुरूषोत्तम कौशिक ने जीत हासिल की. 1989 में बीजेपी के रमेश बैस सांसद बने. 1991 में वह दोबारा वीसी चुने गए. 1996 से लगातार बीजेपी जीतती आ रही है.

रायगढ़ लोकसभा सीट: यह सीट भी 1999 से बीजेपी के पास है. मौजूदा सीएम विष्णुदेव साय यहां से लगातार चार बार सांसद रहे हैं. फिलहाल बीजेपी की गोमती साय सांसद चुनी गईं. छत्तीसगढ़ के पहले सीएम अजीत जोगी 1998 में यहां से जीते थे.

बिलासपुर लोकसभा सीट: यहां 28 साल से बीजेपी का कब्जा है. पुन्नूलाल मोहले 1996 से 2004 तक यहां से सांसद रहे। 2009 में दिलीप सिंह जूदेव, 2014 में लखनलाल साहू और 2019 में अरुण साव सांसद बने।

बस्तर लोकसभा सीट: 1996 में कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा ने निर्दलीय चुनाव जीता था. 1998 से बीजेपी के बलिराम कश्यप चार बार सांसद रहे हैं. 2011 में बलिराम की मौत के बाद बेटे दिनेश कश्यप ने जीत का सिलसिला जारी रखा.

राजनांदगांव लोकसभा सीट: 1998 में दुर्ग के मोतीलाल वोरा ने चुनाव जीता. 1992 में मुंबई से आकर चुनाव लड़े बिजनेसमैन रामसहाय पांडे सांसद चुने गए। वह 3 बार बीजेपी और एक बार कांग्रेस से सांसद रह चुके हैं.

दुर्ग लोकसभा सीट: पिछले चार चुनावों की बात करें तो इस सीट पर तीन बार बीजेपी का कब्जा रहा है, जबकि सिर्फ एक बार कांग्रेस का कब्जा रहा है. फिलहाल विजय बघेल यहां से सांसद हैं.

महासमुंद लोकसभा सीट: बीजेपी के चंदूलाल साहू ने 2009 और 2014 में लगातार जीत हासिल कर इस मिथक को तोड़ दिया. 2014 में चंदूलाल महज 1217 वोटों से लोकसभा चुनाव जीते थे.

सरगुजा लोकसभा सीट: 1951 और 1957 में हुए दो चुनावों में दो-दो सांसद चुने गए। यह क्षेत्र 1962 से एसटी आरक्षित है. 1999 में कांग्रेस के खेलसाय सिंह जीते, तब से यह सीट बीजेपी के कब्जे में है.

कांकेर लोकसभा सीट: यहां अब तक 13 बार चुनाव हुए हैं, जिसमें 5 बार अरविंद नेताम और 4 बार सोहन पोटाई चुने गए. 64 उम्मीदवारों में से कई ऐसे हैं जिन्होंने बार-बार चुनाव लड़ा लेकिन कभी सफल नहीं हुए.

कोरबा लोकसभा सीट: 2008 में परिसीमन के बाद लोकसभा अस्तित्व में आई. इसके बाद हुए दो लोकसभा चुनावों में कांग्रेस और बीजेपी को एक-एक मौका दिया गया. फिलहाल वह कांग्रेस सांसद हैं.

जांजगीर-चांपा लोकसभा सीट: बीजेपी ने यहां पहली बार 1989 में अपना पैर जमाया था. इससे पहले पार्टी पांच बार दूसरे नंबर पर रही थी. बीजेपी के दिलीप सिंह जूदेव ने पहली बार 1989 में पार्टी का खाता खोला था.

‘Chakravyuh of 24′ and ’22 Abhimanyu’ in Chhattisgarh: BJP never lost in these Lok Sabha seats

Detailed story on electoral mathematics of 11 Lok Sabha seats of Chhattisgarh: After the formation of Chhattisgarh state, Congress could not advance beyond two seats. There are 6 seats where BJP has never lost. A look at the past results shows that Korba is a seat where Congress wins once and loses once. At present Jyotsna Mahant of Congress is the MP from here.

BJP is also going to field candidates from Korba in the first list. Many people are also staking claim from here. Many names like Devendra Pandey, Naveen Patel, Vikas Mahato are in discussion. At the same time, Congress has not yet revealed its cards whether it will contest Jyotsna again or a new face will emerge.

When and where did Congress win?

2019 Deepak Baij from Bastar and Jyotsna Mahant from Korba
2014 Tamradhwaj Sahu from Durg seat
2009 Dr. from Korba. Charandas Mahant
2004 Ajit Jogi from Mahasamund and Devvrat Singh from Rajnandgaon.

A look at the mathematics of Lok Sabha seats

Raipur: It was a stronghold of Congress from 1952 to 1984. In 1977, Purushottam Kaushik of Bharatiya Lok Dal won. In 1989, Ramesh Bais of BJP became MP. He was again elected VC in 1991. BJP has been winning continuously since 1996.

Raigarh: This seat is also with BJP since 1999. Current CM Vishnudev Sai has been MP from here for four consecutive terms. At present Gomti Sai of BJP was elected MP. Chhattisgarh’s first CM Ajit Jogi won from here in 1998.

Bilaspur: BJP has been in control here for 28 years. Punnulal Mohale was MP from here from 1996 to 2004. Dilip Singh Judev became MP in 2009, Lakhanlal Sahu in 2014 and Arun Sao in 2019.

Bastar: In 1996, Congress leader Mahendra Karma won the election as an independent. BJP’s Baliram Kashyap has been MP four times since 1998. After Baliram’s death in 2011, son Dinesh Kashyap continued the winning streak.

Rajnandgaon: In 1998, Motilal Vora of Durg won the election. In 1992, businessman Ramshay Pandey, who contested elections from Mumbai, was elected MP. He has been MP thrice from BJP and once from Congress.

Durg: Talking about the last four elections, this seat has been held by BJP thrice, while Congress has held it only once. At present Vijay Baghel is the MP from here.

Mahasamund: BJP’s Chandulal Sahu broke this myth by winning consecutively in 2009 and 2014. In 2014, Chandulal won the Lok Sabha elections by just 1217 votes.

Surguja: Two MPs each were elected in the two elections held in 1951 and 1957. This area is ST reserved since 1962. Khelsai Singh of Congress won in 1999, since then this seat is in the possession of BJP.

Kanker: Elections have been held here so far 13 times, in which Arvind Netam was elected 5 times and Sohan Potai 4 times. Among the 64 candidates, there are many who contested elections repeatedly but were never successful.

Korba: Lok Sabha came into existence after delimitation in 2008. In the two subsequent Lok Sabha elections, Congress and BJP were given one chance each. At present he is a Congress MP.

Janjgir-Champa: BJP first established its foothold here in 1989. Before this, the party had stood second five times. BJP’s Dilip Singh Judev first opened the party’s account in 1989.

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