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: पुष्पराजगढ़ में पर्यावरण पर 'बम'बारी: जल, जंगल, जमीन और पहाड़ भी नहीं सलामत, पठार को निगल रहा खनन माफिया, पाताल पहुंच रहा पानी, कहां नतमस्तक हैं धरती के रखवाले ?

MP CG Times / Mon, Jun 5, 2023

पुष्पराजगढ़ में पर्यावरण पर 'बम'बारी: जल, जंगल, जमीन और पहाड़ भी नहीं सलामत, पठार को निगल रहा खनन माफिया, पाताल पहुंच रहा पानी, कहां नतमस्तक हैं धरती के रखवाले ? पुष्पराजगढ़ में पर्यावरण दिवस और माफिया: हमारी सृष्टि प्रकृति और पर्यावरण पर निर्भर है. जीने के लिए जरूरी हवा, पानी, खाद्य पर्यावरण की देन है. इनके बिना सृष्टि और किसी जीव की कल्पना भी नहीं की जा सकती. हमारे आसपास का वातावरण पेड़-पौधे, नदी, जंगल, जमीन और पहाड़ आदि से घिरा है. प्रकृति से हम बहुत कुछ लेते हैं, लेकिन बदले में सिर्फ इसे प्रदूषित कर रहे हैं. जंगलों को काटना, नदियों को गंदा करना, अवैध खनन कर पहाड़ों का सीना छलनी कर रहे हैं. हम कहीं और की नहीं मेकल पहाड़ के नाम से जाने वाले पुष्पराजगढ़ की बात कर रहे हैं, जहां पर्यावरण का दोहन जारी है. माफिया हावी है. दरअसल, अंधाधुंध खनिज संपदा के दोहन से वातावरण को प्रदूषित कर हम प्रकृति का अस्तित्व खत्म करने के साथ ही अपने जीवन और आने वाली पीढ़ी के लिए खतरनाक वातावरण बना रहे हैं. पुष्पराजगढ़ में खनन माफिया ने हैवी ब्लास्टिंग कर पानी के लेवल को डाउन कर दिया है. लोगों के कंठ सूख रहे हैं, लेकिन माफिया पर लगाम नहीं लगाया जा रहा है. माफिया से बदहाल-ए-परसेल ! अवैध खदानों की भरमार, क्रेशर में 800-1000 गाड़ी गिट्टी से उठा दिया पहाड़, अवैध खनन और भंडारण, कब पड़ेगी माइनिंग की नजर ? अवैध खनन लील गए पहाड़ खनन माफिया ने पुष्पराजगढ़ के सीने को इस कदर छलनी कर दिया है. पुष्पराजगढ़ के सैंकड़ों जगहों पर अवैध खनन जोरों पर चल रहा है. पुष्पराजगढ़ के परसेल, बड़ी तुम्मी, पमरा, बसही और बिजौरी समेत कई इलाकों में अवैध खनन जारी है. जहां से करोड़ों मीट्रिक टन खनिज संपदा माफिया निकाल कर निगल गया. माफिया पहाड़ का पहाड़ निगल गया. माफिया ने सरकार को करोड़ों का चूना लगाया माफिया और अफसरों की सांठगांठ से सरकार को करोड़ों का चूना लगा है. राजस्व को भारी नुकसान पहुंचा है. पुष्पराजगढ़ से कई पहाड़ गायब हो गए हैं. अवैध तरीके से माफिया पत्थर निकाल रहा है. अवैध खदानों से बोल्डर लाकर क्रेशरों में तोड़ा जा रहा है, लेकिन खनिज विभाग की चुप्पी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. पुष्पराजगढ़ में CG के माफिया की काली सल्तनत: पुष्पराजगढ़ हो रहा खोखला, मशरूम की तरह उग रहे क्रेशर, मेकल को लूटने एक के बाद एक 5वें प्लांट को परमिशन, सांसद-विधायक मौन, कलेक्टर साहब देखिए बदहाल-ए-परसेल जल, थल और नभ पर प्रदूषण की मार पर्यावरण संतुलन के लिए जल, जंगल, पहाड़, वन्यजीव एवं प्रकृति दत्त अन्य चीजें जरूरी है। लेकिन अलवर जिले में न जल सुुरक्षित है, न जंगल, पहाड़ छलनी हो गए तो वन्यजीव भी सुरक्षित नहीं रहे. इन दिनों जिले का तापमान 33 डिग्री को पार कर गया तो बारिश का आंकड़ा भी घटता जा रहा है. इसका नुकसान यह हो रहा है कि न पानी बरस रहा और न ही जमीन में पानी का रिचार्ज हो रहा. नतीजतन पानी के लिए मारामारी मचने लगी है. हरे पेड़ कटने से घातक गैसों का प्रभाव बढ़ा हर दिन कट रहे जंगल से भी प्राकृतिक संतुलन गड़बड़ा गया है। हरे वृक्षों के कटने से वायुमंडल में ऑक्सीजन की कमी के साथ ही कार्बन मोनो आक्साइड, कार्बन डाई आक्साइड, मीथेन जैसी घातक गैसों का प्रभाव बढ़ गया है। इसका असर मानव जीवन पर पड़ा है। PM MODI के सपनों पर कौन लगा रहा पलीता ? IGNTU में करोड़ों खर्च कर पर्यावरण और प्रकृति को बचाने सेमिनार, मंत्री जी हुए शामिल, इधर पुष्पराजगढ़ को खनन माफिया कर रहा खोखला ? पाताल पहुंच रहा पानी, सूख रहे कंठ अत्यधिक दोहन और बारिश की कमी के कारण से भूजल स्तर तेजी से पाताल की ओर जा रहा है. जिले के ज्यादातर तालाब, कुएं और बांध सूखे पड़े हैं. अनूपपुर जिले में पानी का लेवल डाउन हो चुका है. आने वाले समय में लोग एक-एक बूंद पानी के लिए तरस जाएंगे. आने वाला कल लोगों के लिए मौत लेकर आएगा. हरे पेड़ों का घटता दायरा बड़ी समस्या वैसे हर किसी ने देखा कि कोरोना की दूसरी लहर में प्राणवायु ऑक्सीजन की कमी के चलते हजारों लोगों का जीवन छिन गया. विकास के नाम व स्वार्थवश कट रहे हरे पेड़ और उजड़ते वनों का ही नतीजा है. विशेषज्ञों के अनुसार एक विशिष्ट हाउस प्लांट का पत्ता प्रति घंटे लगभग 5 मिलीलीटर ऑक्सीजन का उत्पादन करता है. वहीं एक सामान्य मानव को प्रति घंटे लगभग 50 लीटर ऑक्सीजन की आवश्यकता होती है. हरे पेड़ ऑक्सीजन का उत्पादन का बड़ा स्रोत है. MP-CG टाइम्स की खबर का बड़ा असर: ये स्टोन क्रेशर सील, अवैध भंडारण और अवैध खनन, बारूदी धमाकों से धरती को बनाया खाई, पुष्पराजगढ़ SDM के एक्शन से हड़कंप, कानूनी रडार में 5 क्रेशर, हलक पर अटकी माफिया की सांसें स्टोन क्रेशर से क्या नुकसान होता है ? स्टोन क्रशर सक्रिय खनन और क्रशिंग साइटों में गंभीर वायु प्रदूषण की समस्या का कारण बनते हैं, श्रमिकों को लगातार धूल गैसीय प्रदूषकों की बड़ी मात्रा, उच्च स्तर के शोर और दुर्घटनाओं के संपर्क में रहना पड़ता है जो लगातार संचालन के करीब श्रमिकों के जीवन और समुदायों के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं. कौन लगाएगा माफिया पर लगाम ? अनूपपुर जिले में माफिया का बोलबाला है. सिस्टम माफिया के सामने नतमस्तक है. क्रेशरों को लगातार परमिशन दे रहे हैं. ग्रामीण इलाकों में क्रेशर लगातार बढ़ते जा रहे हैं, लेकिन इस पर रोक लगाने वाला कोई नहीं है. माफिया बेखौफ होकर धरती का सीना छलनी कर रहा है. पर्यावरण का दोहन कर रहा है. Read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanistan Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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