FIR against Rahul Gandhi in Chhattisgarh in Sikhism case: कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ रायपुर और सरगुजा के सिविल लाइंस थाने में एफआईआर दर्ज की गई है। भाजपा नेताओं ने शिकायत की है कि अमेरिका दौरे के दौरान राहुल गांधी के बयान से सिख समुदाय की भावनाएं आहत हुई हैं।
संजय श्रीवास्तव के मुताबिक पगड़ी और कड़ा सिख धर्म के प्रतीक हैं, इस पर टिप्पणी करना अशोभनीय है। जिस तरह की भाषा वे बोल रहे हैं, वह देश को जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र के आधार पर बांटने वाली है।
प्रदेश के सभी 5 संभागों में भाजपा नेताओं ने गुरुवार को थाने का घेराव कर राहुल गांधी के खिलाफ एफआईआर की मांग की। हालांकि रायपुर और सरगुजा को छोड़कर अन्य थानों में एफआईआर दर्ज नहीं की गई। रायपुर में भाजपा नेता सिख समुदाय के लोगों के साथ थाने पहुंचे थे।
भाजपा के प्रदेश महामंत्री संजय श्रीवास्तव के मुताबिक यह आपत्तिजनक है कि राहुल गांधी अपने विदेश दौरे के दौरान उन विदेशी ताकतों के प्रतिनिधियों से मिले। जो भारत में राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक अस्थिरता पैदा कर भारत को नुकसान पहुंचाने में लगे हैं।
राहुल ने ऐसा क्या कहा जिससे बवाल मच गया
अमेरिका में राहुल ने कहा था, भारत में सिख समुदाय के बीच यह चिंता है कि उन्हें पगड़ी और कड़ा पहनने की इजाजत होगी या नहीं? क्या वे गुरुद्वारे जा सकेंगे? यह चिंता सिर्फ सिखों के लिए नहीं बल्कि सभी धर्मों के लिए है।
बीजेपी यह नहीं मानती कि देश सबका है। बीजेपी यह नहीं समझती कि यह देश सबका है। भारत एक संघ है। संविधान में यह साफ लिखा है। भारत एक संघ राज्य है, जिसमें अलग-अलग इतिहास, परंपराएं, संगीत और नृत्य शामिल हैं। बीजेपी कहती है कि यह संघ नहीं है, यह अलग है।
आरएसएस भारत को नहीं समझता। आरएसएस कहता है कि कुछ राज्य दूसरे राज्यों से कमतर हैं। कुछ भाषाएं दूसरी भाषाओं से कमतर हैं, कुछ धर्म दूसरे धर्मों से कमतर हैं, कुछ समुदाय दूसरे समुदायों से कमतर हैं। हर राज्य का अपना इतिहास, परंपरा है। आरएसएस की विचारधारा में तमिल, मराठी, बंगाली, मणिपुरी कमतर भाषाएं हैं। इस मुद्दे पर झगड़ा है। आरएसएस भारत को नहीं समझता।
आरक्षण खत्म करने का सही समय नहीं है- राहुल गांधी
अभी आरक्षण खत्म करने का सही समय नहीं है। सही समय आने पर कांग्रेस आरक्षण खत्म करने के बारे में सोचेगी। जब आप वित्तीय आंकड़ों पर नजर डालेंगे तो आदिवासियों को 100 रुपये में से 10 पैसे मिलते हैं, दलितों को 100 रुपये में से 5 रुपये मिलते हैं और ओबीसी को भी लगभग इतना ही मिलता है।
भारत के बिजनेस लीडर्स की सूची देखिए। मुझे लगता है कि शीर्ष 200 में से एक ओबीसी है, जबकि भारत में वे 50% हैं, लेकिन हम इस बीमारी का इलाज नहीं कर रहे हैं।
अगर निष्पक्ष चुनाव होते तो भाजपा 246 के करीब नहीं होती
चुनावों से पहले हम इस बात पर जोर देते रहे कि संस्थानों पर कब्जा कर लिया गया है। शिक्षा प्रणाली पर आरएसएस का कब्जा है। उन्होंने मीडिया और जांच एजेंसियों पर कब्जा कर लिया है। मैंने संविधान को सामने रखना शुरू किया।
अगर संविधान नष्ट हो गया तो सारा खेल खत्म हो जाएगा। लोगों ने समझा कि यह संविधान की रक्षा करने वालों और इसे नष्ट करने वालों के बीच की लड़ाई है। मुझे नहीं लगता कि अगर निष्पक्ष चुनाव हुए होते तो भाजपा 246 के करीब पहुंच पाती।
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